बिहार सिपाही भर्ती पेपर लीक कांड: जांच तेज, पूर्व DGP से मांगा गया जवाब—भर्ती सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

बिहार पुलिस सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस बहुचर्चित कांड में पूर्व डीजीपी एसके सिंघल से विस्तृत जवाब तलब किया है। इस कदम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि जांच का दायरा अब उच्च स्तर तक पहुंच चुका है और जिम्मेदारियों की गहन पड़ताल की जा रही है।

जांच के घेरे में भर्ती प्रक्रिया के अहम चरण

EOU की प्रारंभिक जांच में भर्ती प्रक्रिया के कई अहम चरणों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी चयन से लेकर प्रश्न-पत्र की छपाई, पैकेजिंग, परिवहन और वितरण तक की पूरी प्रणाली में खामियां पाई गई हैं।

जांच एजेंसी का मानना है कि यदि तय प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता, तो इतने बड़े स्तर पर पेपर लीक की घटना को रोका जा सकता था।

पूर्व DGP से पूछे गए कई अहम सवाल

सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के अध्यक्ष रहे एसके सिंघल को सिलसिलेवार कई सवाल भेजे गए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • परीक्षा एजेंसी का चयन कैसे हुआ
  • प्रश्न-पत्र की छपाई और सुरक्षा व्यवस्था
  • पैकेजिंग और सीलिंग प्रक्रिया
  • प्रश्न-पत्र के ट्रांसपोर्ट और वितरण की निगरानी

EOU ने इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट और विस्तृत जवाब मांगा है। फिलहाल उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जवाब के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

जांच अधिकारियों का कहना है कि सिंघल के जवाब के बाद ही मामले की अगली दिशा तय की जाएगी। यदि जवाब में किसी तरह की लापरवाही या अनियमितता के संकेत मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।

EOU इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरतना चाहती और हर कड़ी को जोड़कर दोषियों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।

परीक्षा रद्द, लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित

गौरतलब है कि बिहार पुलिस में 21 हजार से अधिक सिपाही पदों के लिए 1 अक्टूबर 2023 को परीक्षा आयोजित की गई थी। पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया।

इस घटना के बाद राज्यभर में आक्रोश और विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला था।

संगठित गिरोह की भूमिका आई सामने

जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे कांड में संजीव मुखिया के नेतृत्व वाला गिरोह सक्रिय था। आरोप है कि परीक्षा से करीब चार दिन पहले ही प्रश्न-पत्र सिस्टम से निकाल लिया गया था, जिससे अंदरूनी मिलीभगत की आशंका और मजबूत हो गई है।

बताया जा रहा है कि इस गिरोह ने प्रश्न-पत्र लीक कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली।

SOP की अनदेखी बनी बड़ी वजह

EOU की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि प्रश्न-पत्र के परिवहन के दौरान तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं किया गया।

प्रेस से जिला कोषागार तक प्रश्न-पत्र ले जाने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर लापरवाही बरती गई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ी और आरोपियों को मौका मिल गया।

अब तक 21 गिरफ्तार, जांच जारी

इस मामले में अब तक 21 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

साथ ही केंद्रीय चयन पर्षद के कुछ अधिकारियों की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है।

सिस्टम सुधार की तैयारी

राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की योजना पर काम किया जा रहा है।

बिहार सिपाही भर्ती पेपर लीक कांड अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि पूरे भर्ती तंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने वाला मुद्दा बन चुका है।

अब सबकी नजरें EOU की अगली कार्रवाई और पूर्व डीजीपी के जवाब पर टिकी हैं, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले की सच्चाई और स्पष्ट हो सकेगी।

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