बिहार में अपराध पर सख्ती का ऐलान: CM सम्राट ने पुलिस को ‘फ्री हैंड’ दिया, DM-SP को सख्त निर्देश

पटना: बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को पूरी तरह ‘फ्री हैंड’ दिया जा रहा है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

राजधानी पटना में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) शामिल हुए। इस बैठक में और भी मौजूद रहे। बैठक में कानून-व्यवस्था, औद्योगिक विकास और जनसेवा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

अपराध पर जीरो टॉलरेंस का संदेश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि राज्य में अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस को अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता दी जा रही है।

उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर तत्काल और कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। ऐसे मामलों में तेजी से जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने और दोषियों को जल्द सजा दिलाने पर जोर दिया गया।

“क्राइम, करप्शन और कम्युनिलिज्म से समझौता नहीं”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता के खिलाफ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुशासन तभी नजर आता है, जब उसका लाभ आम लोगों तक समय पर पहुंचे।

उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ काम करें और सरकार की योजनाओं को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करें।

उद्योगों के लिए तैयार करें अनुकूल माहौल

बैठक में औद्योगिक विकास को लेकर भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर जिले में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए और इंडस्ट्री हब विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जो उद्योगपति बिहार में निवेश करना चाहते हैं, उन्हें पूरी सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं दी जाएं। इसके लिए प्रत्येक निवेशक के साथ एक-एक अधिकारी को जोड़ने की योजना बनाई गई है, ताकि उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान हो सके।

‘डायल 112’ को और प्रभावी बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने राज्य की आपातकालीन सेवा ‘डायल 112’ को और मजबूत बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस सेवा के माध्यम से लोगों को त्वरित सहायता मिलनी चाहिए और पुलिस की प्रतिक्रिया समय को और बेहतर किया जाए।

पंचायत स्तर पर लगेगा सहयोग शिविर

जनसमस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर पर विशेष व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर लगाए जाएं, जहां लोगों की शिकायतें सुनी जाएं और 30 दिनों के भीतर उनका समाधान सुनिश्चित किया जाए।

जनसुनवाई पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनसुनवाई को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने निर्देश दिया कि DM और SP रोजाना सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक अपने कार्यालय में उपस्थित रहकर आम जनता की समस्याएं सुनें।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यदि किसी जिले में जिम्मेदार और सक्रिय अधिकारी हों, तो अधिकांश समस्याएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।

अधिकारियों को खुद को साबित करने का अवसर

बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य के अधिकारी सक्षम हैं, लेकिन उन्हें अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय खुद को साबित करने का है और अधिकारियों को बेहतर प्रदर्शन करना चाहिए।

अपराधियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई

डीजीपी विनय कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपराधियों के खिलाफ अदालत में मजबूत पक्ष रखें, ताकि वे आसानी से जमानत न पा सकें। उन्होंने बताया कि कई मामलों में अपराधी बार-बार जमानत पर बाहर आ जाते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर असर पड़ता है।

पुलिस बल की कमी होगी दूर

डीजी ऑपरेशन कुंदन कृष्णन ने जानकारी दी कि राज्य में पुलिस बल की कमी को दूर करने के लिए लगातार भर्ती प्रक्रिया जारी है। आने वाले समय में बड़े स्तर पर नई बहाली की जाएगी, जिससे पुलिस व्यवस्था और मजबूत होगी।

दो महीने बाद होगी समीक्षा

मुख्यमंत्री ने बैठक के अंत में कहा कि दो महीने बाद इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। उस समय अधिकारियों से बेहतर परिणाम की अपेक्षा की जाएगी और उनकी कार्यप्रणाली का मूल्यांकन किया जाएगा।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए ये निर्देश बिहार में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। पुलिस को ‘फ्री हैंड’ देने के फैसले से जहां अपराधियों में डर का माहौल बनने की संभावना है, वहीं प्रशासनिक जवाबदेही भी बढ़ेगी।

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