​बिहार की सत्ता का ‘महापरिवर्तन’: नीतीश कुमार के दो दशकों के राज का अंतिम दिन, आज थमेगी हलचल और कल शुरू होगा भाजपा का नया अध्याय

पटना। बिहार की मिट्टी में राजनीति की गंध हमेशा से ही तीखी रही है, लेकिन 14 अप्रैल 2026 की यह सुबह कुछ अलग है। आज केवल कैलेंडर का पन्ना नहीं बदल रहा, बल्कि बिहार के पिछले दो दशकों के राजनीतिक इतिहास की दिशा बदलने जा रही है। वह पद, जिस पर नीतीश कुमार ने अपनी लंबी और गहरी लकीर खींची है, आज वे उसे औपचारिक रूप से अलविदा कह देंगे। राजधानी पटना के सियासी गलियारों में सुबह से ही उस बेचैनी का अहसास है जो किसी बड़े तूफान के आने से पहले होती है। मंगलवार का यह दिन बिहार के लिए ‘दो हिस्सों’ का महासंग्राम है—एक तरफ विदाई का भावुक प्रोटोकॉल और दूसरी तरफ नई ताजपोशी की बिसात। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली पहली पूर्ण एनडीए सरकार के गठन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। राजभवन से लेकर लोकभवन तक और 1 अणे मार्ग से लेकर भाजपा कार्यालय तक, हर ईंट जैसे किसी नए नाम की गूँज सुनने को बेताब है।

नीतीश कुमार की विदाई का अंतिम प्रोटोकॉल: आंबेडकर प्रतिमा से राजभवन तक

​मंगलवार की सुबह नीतीश कुमार के लिए केवल एक मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक युग के प्रस्थान के रूप में शुरू होगी। उनका दिन सबसे पहले संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ शुरू होगा। हाईकोर्ट के पास स्थित प्रतिमा स्थल पर आयोजित राजकीय समारोह में उनकी मौजूदगी यह संदेश देगी कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए पद का त्याग कर रहे हैं। इसके तुरंत बाद वे सीधे मुख्य सचिवालय पहुँचेंगे, जहाँ उनके नेतृत्व वाली वर्तमान कैबिनेट की आखिरी बैठक होगी। यह बैठक नीतिगत फैसलों के लिए कम और स्मृतियों के लिए ज्यादा होगी। इस कैबिनेट में मंत्री और सहयोगी उनके दो दशकों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त करेंगे, जो बिहार की राजनीति के लिए एक दुर्लभ और गरिमापूर्ण दृश्य होगा।

​कैबिनेट की बैठक खत्म होते ही नीतीश कुमार का काफिला सीधे लोकभवन की ओर रुख करेगा। वहां वे राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। यह वह क्षण होगा जब बिहार की सत्ता की धुरी आधिकारिक तौर पर खाली होगी। नीतीश कुमार का यह इस्तीफा केवल एक पद का त्याग नहीं है, बल्कि बिहार में भाजपा को ‘लीड रोल’ में लाने का अंतिम रास्ता साफ करना है। इसके साथ ही एनडीए ने अपने सभी विधायकों को पटना में ही ‘घेरे’ रखने का सख्त निर्देश दिया है। यहाँ तक कि पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार में जुटे 50 से अधिक विधायकों को भी हवाई मार्ग से सुबह तक पटना पहुँचने का अल्टीमेटम दिया गया है, ताकि बहुमत की ताकत में कोई कमी न दिखे।

भाजपा का ‘मिशन लीडर’: शिवराज सिंह चौहान और नितिन नवीन की भूमिका

​नीतीश कुमार के राजभवन से निकलते ही सत्ता के केंद्र का दूसरा सिरा भाजपा कार्यालय (वीरचंद पटेल पथ) पर सक्रिय हो जाएगा। भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद व्यवस्थित और रणनीतिक तरीके से प्लान किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी इस बात का सबूत है कि दिल्ली का शीर्ष नेतृत्व इस बदलाव को लेकर कितना गंभीर है। शिवराज सिंह चौहान को ‘पर्यवेक्षक’ बनाकर भेजा गया है, जो पार्टी के विधायक दल के नेता के चयन की प्रक्रिया को पूर्ण कराएंगे।

​दोपहर बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में जब नेता का चुनाव होगा, तो वह केवल एक विधायक का नहीं, बल्कि बिहार के होने वाले मुख्यमंत्री का चुनाव होगा। इसके बाद शाम 4 बजे के करीब एनडीए विधायक दल की संयुक्त बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में भाजपा द्वारा चुने गए नेता के नाम पर जदयू, लोजपा (आर), हम और रालोमो के विधायक अपनी मुहर लगाएंगे। यह पूरी प्रक्रिया किसी सधे हुए नाटक की तरह चलेगी, जिसमें हर किरदार को अपनी भूमिका पता है। शाम होते-होते बिहार के नए मुख्यमंत्री का चेहरा दुनिया के सामने होगा और सरकार बनाने का दावा राजभवन में पेश कर दिया जाएगा।

लोकभवन में ‘जर्मन हैंगर’ और सुरक्षा का महाजाल

​बुधवार, 15 अप्रैल की सुबह 11 बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के लिए पटना जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। लोकभवन के सचिवालय परिसर में सोमवार से ही युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं। पटना के डीएम और एसएसपी ने राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा के साथ मिलकर सुरक्षा और प्रोटोकॉल की रूपरेखा तैयार की है। लोकभवन के पिछले हिस्से में एक विशाल ‘जर्मन हैंगर’ हॉल तैयार किया गया है, जिसमें एक हजार से अधिक विशिष्ट मेहमानों के बैठने की व्यवस्था है। यह भव्य आयोजन यह बताने के लिए काफी है कि नई सरकार अपनी शुरुआत एक बड़े ‘पावर शो’ के साथ करना चाहती है।

​सुरक्षा के लिहाज से पूरे लोकभवन को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के साथ और कितने मंत्री शपथ लेंगे, इसका सस्पेंस मंगलवार की शाम तक बना रहेगा, लेकिन प्रशासनिक अमला हर संभावित स्थिति के लिए तैयार है। वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए राजभवन और लोकभवन जाने वाले रास्तों पर यातायात के कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।

वीओबी (VOB) विशेष: सत्ता की नई बिसात और जनता की उम्मीदें

​बिहार में चल रही इस गहमागहमी के बीच आम आदमी की नजरें केवल चेहरों पर नहीं, बल्कि आने वाले बदलावों पर भी हैं। नीतीश कुमार ने सोमवार को अपने आवास पर जिस तरह से संजय झा, ललन सिंह और सम्राट चौधरी के साथ लंबी गुफ्तगू की, उससे साफ है कि वे इस विदाई को एक सुरक्षित भविष्य के साथ जोड़ना चाहते हैं। भाजपा के लिए यह एक ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत है, जहाँ वे अब तक के अपने सबसे बड़े सहयोगी के बिना नेतृत्व करने जा रहे हैं।

​यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार में विभागों का बंटवारा किस प्रकार होता है और क्या ‘सुशासन’ की जो परिभाषा नीतीश कुमार ने गढ़ी थी, उसे नया नेतृत्व और अधिक धार दे पाएगा या नहीं। फिलहाल, पटना का आसमान वीआईपी विमानों की गूँज और नेताओं की आवाजाही से भरा हुआ है। 29-30 घंटों के भीतर बिहार एक नई सुबह देखेगा, जहाँ सत्ता का पता वही होगा, लेकिन उस पते पर नाम बदल चुका होगा। यह 2026 की वह ऐतिहासिक तारीख है जिसे बिहार कभी नहीं भूलेगा।

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