भागलपुर में बी-फार्मा छात्र की मौत का मामला: ‘बेरोजगारी’ के ताने ने ली अंकित की जान, अब प्रेमिका के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज

भागलपुर। बिहार की ‘सिल्क सिटी’ भागलपुर के बरारी इलाके में पिछले दिनों हुई एक हृदयविदारक घटना ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। एक होनहार बी-फार्मा छात्र की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मृतक की प्रेमिका के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है। प्रेम प्रसंग और करियर के बीच उलझी इस दुखद कहानी का अंत रविवार की सुबह एक कमरे के सन्नाटे में हो गया, लेकिन उसके पीछे छिपे कारणों ने समाज के संवेदनशील पहलुओं को झकझोर कर रख दिया है। अंकित कुमार नाम के इस मेधावी छात्र ने फंदे से लटककर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी, लेकिन जांच में यह बात सामने आई है कि उसे यह कदम उठाने के लिए मानसिक रूप से मजबूर किया गया था। पुलिस ने अब प्रेमिका पर ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’ (Abetment to Suicide) का मामला दर्ज किया है और इस दिशा में सघन जांच शुरू कर दी गई है। यह मामला केवल एक प्रेम कहानी के अंत का नहीं है, बल्कि बिहार जैसे राज्य में युवाओं पर ‘रोजगार’ के सामाजिक दबाव और रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट का एक जीता-जागता प्रमाण बन गया है।

रविवार की वह काली सुबह और बरारी में मचा कोहराम

​घटना की शुरुआत रविवार, 12 अप्रैल 2026 की सुबह लगभग नौ बजे हुई। भागलपुर के बरारी थाना क्षेत्र स्थित अपने पैतृक निवास पर अंकित कुमार ने उस वक्त खौफनाक कदम उठाया जब घर के अन्य सदस्य अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे। जब काफी देर तक अंकित के कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। खिड़की से झांकने पर देखा गया कि अंकित रस्सी के फंदे से लटका हुआ था। आनन-फानन में दरवाजा तोड़कर उसे नीचे उतारा गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।

​अंकित बी-फार्मा का छात्र था और अपने भविष्य को लेकर काफी आशान्वित था। एक ऐसा युवा जो दूसरों को दवाइयां देकर जीवन बचाने की पढ़ाई कर रहा था, उसने खुद की जिंदगी खत्म करने का फैसला क्यों किया, यह सवाल पूरे मोहल्ले में गूँज रहा था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया था कि यह मामला केवल अवसाद का नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई गहरा मानसिक आघात है जिसने अंकित को इस कदर तोड़ दिया था कि उसे मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आई।

‘बेरोजगारी’ का दंश और माँ का कड़ा इनकार: क्या था मुख्य कारण?

​अंकित की आत्महत्या के बाद जब पुलिस ने उसके परिजनों और करीबियों के बयान दर्ज किए, तो इस मामले की असली जड़ सामने आई। परिजनों का आरोप है कि अंकित अपनी एक प्रेमिका के साथ विवाह करना चाहता था और दोनों के बीच लंबे समय से संबंध थे। अंकित ने अपने घर वालों को भी इस बारे में जानकारी दे दी थी। विवाद उस समय शुरू हुआ जब अंकित ने लड़की के परिवार के सामने शादी का प्रस्ताव रखा।

​परिजनों के अनुसार, घटना से महज चार दिन पहले अंकित की प्रेमिका की माँ ने उसे स्पष्ट रूप से दुत्कार दिया था। लड़की की माँ ने अंकित के साथ अपनी बेटी का विवाह करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वह ‘बेरोजगार’ है और उसके पास अभी कोई स्थायी आय का साधन नहीं है। बी-फार्मा की पढ़ाई कर रहे अंकित के लिए ‘बेरोजगार’ शब्द एक गहरे जख्म की तरह साबित हुआ। समाज में युवाओं को उनकी योग्यता के बजाय केवल उनके वर्तमान वेतन से आंकने की यह प्रवृत्ति अंकित के लिए जानलेवा बन गई। लड़की की माँ के कड़े शब्दों और बेरोजगारी के ताने ने उसे इस कदर आहत किया कि वह पिछले चार दिनों से गहरे डिप्रेशन में चला गया था। उसे लगा कि उसकी सालों की पढ़ाई और उसका प्रेम, दोनों ही ‘सफलता’ के सामाजिक पैमाने पर विफल हो गए हैं।

प्रेमिका पर केस दर्ज: बरारी पुलिस की कार्रवाई

​इस पूरे घटनाक्रम के बाद मृतक के परिजनों ने बरारी थाने में प्रेमिका और उसके परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। बरारी थाने के प्रभारी थानेदार शुभम कुमार ने पुष्टि की है कि अंकित की प्रेमिका के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को मानसिक प्रताड़ना के जरिए ऐसी स्थिति में पहुँचा दिया जाए जहाँ उसे आत्महत्या ही विकल्प लगे, तो यह कानूनन अपराध है।

​प्रभारी थानेदार शुभम कुमार ने बताया कि पुलिस अब लड़की के परिवार और खुद प्रेमिका से भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। यह जांचा जा रहा है कि क्या लड़की की माँ के अलावा प्रेमिका ने भी अंकित पर कोई दबाव बनाया था या उसे अपमानित किया था। पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि क्या उस दिन अंकित और उसकी प्रेमिका के बीच फोन पर कोई ऐसी बातचीत हुई थी जिसने उसे तुरंत यह कदम उठाने के लिए उकसाया।

मोबाइल फोन में छिपा है मौत का राज: डिजिटल फॉरेंसिक जांच

​अंकित की मौत के पीछे की कड़ियाँ जोड़ने के लिए पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल में मौजूद चैट रिकॉर्ड्स, कॉल हिस्ट्री और आखिरी समय में किए गए मैसेज इस केस के सबसे बड़े साक्ष्य साबित होंगे। अंकित ने मरने से पहले किससे बात की थी और क्या उसने कोई सुसाइड नोट या आखिरी संदेश अपनी प्रेमिका को भेजा था, इसकी जांच की जा रही है।

​डिप्रेशन के उन चार दिनों के दौरान अंकित की डिजिटल गतिविधियां क्या थीं, इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही केस की दिशा पूरी तरह साफ होगी। यदि व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई ऐसी बातचीत मिलती है जहाँ उसे आत्महत्या के लिए उकसाया गया हो या उसे अत्यंत नीचा दिखाया गया हो, तो प्रेमिका की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। भागलपुर पुलिस की तकनीकी सेल इस फोन के डेटा को रिकवर करने में जुटी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

सामाजिक विमर्श: करियर बनाम रिश्ते का दबाव

​अंकित की इस दुखद परिणति ने बिहार के शैक्षिक और सामाजिक परिवेश पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। अक्सर देखा जाता है कि प्रोफेशनल कोर्स कर रहे छात्र पहले से ही करियर की अनिश्चितता को लेकर तनाव में रहते हैं। ऐसे में जब निजी संबंधों में भी ‘आर्थिक स्थिति’ को हथियार बनाया जाता है, तो युवा मन टूट जाता है। अंकित के मामले में भी बी-फार्मा जैसा कठिन कोर्स करने के बावजूद उसे केवल ‘अभी नौकरी नहीं है’ के आधार पर खारिज कर देना समाज की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

​विशेषज्ञों का कहना है कि रिश्तों में संवाद की कमी और परिवार का सहयोग न मिलना ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देता है। अंकित के परिजनों ने बताया कि वह चार दिनों से चुप-चुप रह रहा था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि उसके मन में इतना बड़ा तूफान चल रहा है। समाज में ‘सफल होने’ की जो परिभाषा गढ़ी गई है, वह अक्सर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। अंकित की मौत यह चेतावनी है कि हमें अपने बच्चों के करियर के साथ-साथ उनके भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

आगे की कानूनी प्रक्रिया और पुलिस की तैयारी

​बरारी पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि यह आधिकारिक रूप से पुष्टि हो सके कि मौत का कारण केवल दम घुटना (Asphyxia) ही है। इसके बाद, नामजद प्रेमिका को पूछताछ के लिए समन भेजा जाएगा। शुभम कुमार ने बताया कि पुलिस इस मामले में निष्पक्षता से जांच कर रही है और सभी बिंदुओं—चाहे वह मोबाइल रिकॉर्ड्स हों या प्रत्यक्षदर्शियों के बयान—को संकलित किया जा रहा है।

​अंकित के सहपाठियों और बी-फार्मा कॉलेज के अन्य छात्रों ने भी इस घटना पर दुख जताया है। उनका कहना है कि अंकित एक शांत और मिलनसार छात्र था, और उसके साथ हुई यह ज्यादती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में पुलिस की चार्जशीट यह तय करेगी कि क्या प्रेमिका और उसके परिवार की बातों को कानूनी रूप से ‘उकसावा’ माना जा सकता है या नहीं। फिलहाल, भागलपुर का बरारी इलाका एक उभरते हुए भविष्य के इस तरह बुझ जाने के शोक में डूबा है और सबकी निगाहें पुलिसिया तफ्तीश पर टिकी हैं।

​यह घटना उन सभी प्रेमियों और परिवारों के लिए एक सबक है जो अपनी अपेक्षाओं के बोझ तले मासूम जिंदगियों को कुचल देते हैं। अंकित अब नहीं रहा, लेकिन उसके पीछे छूटे सवाल आज भी भागलपुर की सड़कों पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

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