बिहार में जनगणना 2027 का पहला चरण 2 मई से, पहली बार पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया

पटना | 15 अप्रैल 2026: बिहार में जनगणना 2027 को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी, जिसमें नागरिकों को पहली बार स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी दी गई है।

जनगणना कार्य निदेशालय, बिहार और पत्र सूचना कार्यालय द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों ने बताया कि जनगणना 2027 के पहले चरण ‘मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना’ का कार्य 2 मई 2026 से 31 मई 2026 तक चलेगा।

17 अप्रैल से शुरू होगी स्व-गणना सुविधा

राज्य में स्व-गणना की सुविधा 17 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 1 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इस दौरान नागरिक घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने परिवार की जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे।

स्व-गणना के लिए परिवार के मुखिया का नाम और किसी एक सदस्य का मोबाइल नंबर आवश्यक होगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक यूनिक सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी (Self Enumeration ID) मिलेगी, जिसे सुरक्षित रखना होगा। बाद में जब प्रगणक घर आएंगे, तो यह आईडी उन्हें दिखानी होगी।

2 मई से घर-घर सर्वे शुरू

स्व-गणना की अवधि समाप्त होने के बाद 2 मई से सरकारी प्रगणक घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। जिन परिवारों ने ऑनलाइन जानकारी नहीं भरी होगी, उनका डेटा प्रगणक द्वारा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा।

डेटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि के तहत एकत्र किया गया डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एन्क्रिप्शन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

समय की बचत और आसान प्रक्रिया

स्व-गणना को सरल, सुरक्षित और समय बचाने वाली प्रक्रिया बताया गया है। इससे लोगों को सरकारी कर्मचारियों का इंतजार किए बिना अपनी सुविधा के अनुसार जानकारी दर्ज करने का मौका मिलेगा।

अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल प्रणाली से जनगणना कार्य अधिक पारदर्शी, तेज और त्रुटिरहित होगा। इससे डेटा संग्रहण और विश्लेषण में भी सुधार आएगा।

लोगों से भागीदारी की अपील

जनगणना कार्य निदेशालय ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे “जनगणना से जन-कल्याण” के उद्देश्य को सफल बनाने में सहयोग करें और अधिक से अधिक संख्या में स्व-गणना सुविधा का उपयोग करें।

सरकार का मानना है कि यह नई डिजिटल पहल न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान बनाएगी, बल्कि देश के विकास के लिए सटीक और विश्वसनीय आंकड़े जुटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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