जल-जीवन-हरियाली अभियान से बदली तस्वीर: बेगूसराय में 808 कुओं का जीर्णोद्धार, सोक पिट से बढ़ेगा जलस्तर

पटना/बेगूसराय | 15 अप्रैल 2026: बिहार में भूगर्भ जलस्तर को बनाए रखने और जल संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “जल-जीवन-हरियाली” अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इसी कड़ी में बेगूसराय जिले में बड़े पैमाने पर कार्य करते हुए 808 सार्वजनिक कुओं का जीर्णोद्धार किया गया है, जबकि 723 कुओं के किनारे सोक पिट का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है।

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित इस अभियान को पंचायत स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से गांवों में जल संरक्षण के लिए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं।

कुओं का जीर्णोद्धार और सोक पिट से मिलेगा फायदा

अभियान के तहत पुराने और अनुपयोगी हो चुके कुओं को पुनर्जीवित कर उनका सौंदर्यीकरण किया गया है। वहीं, कुओं के आसपास सोक पिट बनाए गए हैं, जिससे वर्षा जल सीधे जमीन में समाहित हो सके और भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाने में मदद मिले।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोक पिट जैसी संरचनाएं जल संरक्षण के लिए बेहद प्रभावी होती हैं, क्योंकि ये पानी को जमीन में पहुंचाकर प्राकृतिक जल चक्र को मजबूत करती हैं।

छत वर्षा जल संचयन पर भी जोर

जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत छत से वर्षा जल संचयन (रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग) पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। बेगूसराय जिले में अब तक 210 छत वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है।

इन संरचनाओं के माध्यम से छतों से गिरने वाले वर्षा जल को पाइप के जरिए फिल्टर कर भूमिगत टैंक या सोक पिट में पहुंचाया जाता है। इससे पानी की बर्बादी रुकती है और जलस्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है।

ग्रामीण जीवन पर सकारात्मक असर

अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान के चलते न केवल जलस्तर में सुधार देखने को मिल रहा है, बल्कि सिंचाई, पशुपालन और घरेलू उपयोग के लिए पानी की उपलब्धता भी बढ़ी है।

इसके अलावा, जल संरक्षण की यह पहल भविष्य के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार कर रही है, जिससे सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने में मदद मिलेगी।

लंबे समय की रणनीति का हिस्सा

सरकार का मानना है कि जल-जीवन-हरियाली अभियान केवल एक योजना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक दीर्घकालिक रणनीति है।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के प्रयासों से न सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो रहा है, बल्कि लोगों में जल के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है। आने वाले समय में इस अभियान को और व्यापक रूप देने की योजना है, ताकि पूरे राज्य में जल संकट की समस्या को नियंत्रित किया जा सके।

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