​बिहार में प्रशासनिक फेरबदल की आहट: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का दिल्ली मिशन, क्या 6 मई को शपथ लेंगे नए मंत्री?

पटना/दिल्ली। बिहार की सत्ता के गलियारों में इस समय सबसे बड़ी चर्चा मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हो रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का अचानक दिल्ली रवाना होना इस चर्चा के केंद्र में है। शनिवार की शाम जब मुख्यमंत्री पटना से दिल्ली के लिए निकले, तभी से कयासों का बाजार गर्म हो गया कि अब बिहार सरकार को उसका पूर्ण स्वरूप मिलने वाला है। रविवार, 3 मई 2026 का दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दिल्ली पहुँच चुके सम्राट चौधरी आज केंद्रीय आलाकमान के साथ अंतिम दौर की बातचीत करेंगे। इस दौरे का सीधा संबंध बिहार में खाली पड़े मंत्री पदों को भरने और गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच विभागों के बंटवारे को अंतिम रूप देने से है। फिलहाल बिहार सरकार एक ऐसी स्थिति में है जहाँ मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों के कंधों पर ही दर्जनों विभागों का भारी बोझ है, जिसे कम करने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार को अब अपरिहार्य माना जा रहा है।

दिल्ली में बैठकों का दौर और अमित शाह से मुलाकात

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार शाम को ही राष्ट्रीय राजधानी पहुँच चुके हैं और रविवार का उनका पूरा दिन व्यस्त रहने वाला है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सम्राट चौधरी रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात को मंत्रिमंडल विस्तार की दिशा में सबसे निर्णायक कड़ी माना जा रहा है। अमित शाह के साथ बैठक में उन नामों पर अंतिम मुहर लग सकती है जिन्हें भाजपा कोटे से मंत्री बनाया जाना है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात करने वाले हैं।

​इन बैठकों का मुख्य एजेंडा बिहार में सत्ता संतुलन बनाए रखना और आगामी राजनैतिक चुनौतियों को देखते हुए एक मजबूत टीम तैयार करना है। दिल्ली में होने वाला यह विचार-विमर्श केवल भाजपा के अंदरूनी मसलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें एनडीए के अन्य घटक दलों जैसे जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो की हिस्सेदारी पर भी चर्चा होगी। सम्राट चौधरी की कोशिश होगी कि दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही पटना लौटकर इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए।

नीतीश कुमार के साथ बंद कमरे में हुई रणनीति पर चर्चा

​दिल्ली रवाना होने से ठीक पहले पटना में भी राजनैतिक सरगर्मी चरम पर रही। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली के लिए उड़ान भरने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर पहुँचे। इस मुलाकात ने राजनैतिक पंडितों का ध्यान अपनी ओर खींचा क्योंकि यह कोई सामान्य शिष्टाचार भेंट नहीं थी। नीतीश कुमार के आवास पर बंद कमरे में एक लंबी और गोपनीय बैठक हुई, जिसमें उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे।

​बताया जाता है कि इस बैठक के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार के फार्मूले पर विस्तृत चर्चा की गई है। नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी के बीच उन नामों और विभागों के बंटवारे पर सहमति बनाने की कोशिश हुई है, जो गठबंधन की स्थिरता के लिए जरूरी हैं। विजय कुमार चौधरी की उपस्थिति यह दर्शाती है कि जदयू और भाजपा के बीच तालमेल बिठाने के लिए सूक्ष्म स्तर पर कार्य किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक में तय किए गए बिंदुओं को ही सम्राट चौधरी दिल्ली में अमित शाह के सामने रखेंगे ताकि गठबंधन में किसी भी प्रकार के मतभेद की गुंजाइश न रहे।

कैबिनेट का गणित: 36 की सीमा और 33 की संभावना

​बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर संवैधानिक सीमाओं और राजनैतिक जरूरतों के बीच एक संतुलन बनाने की चुनौती है। नियमों के अनुसार, बिहार में मुख्यमंत्री सहित कुल मंत्रियों की संख्या 36 हो सकती है। वर्तमान में स्थिति यह है कि केवल मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री ही सरकार चला रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि मंत्रिमंडल में 33 नए सदस्यों को शामिल करने की संभावना बनी हुई है।

​इस विस्तार में एनडीए के सभी पांच प्रमुख घटक दलों की हिस्सेदारी तय होनी है:

  • भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): सबसे बड़े घटक दल के रूप में भाजपा के पास मंत्रियों की एक बड़ी संख्या होगी।
  • जनता दल यूनाइटेड (जदयू): नीतीश कुमार की पार्टी के पुराने और अनुभवी चेहरों को फिर से जगह मिल सकती है।
  • लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास): चिराग पासवान की पार्टी की ओर से भी नए चेहरों के नाम चर्चा में हैं।
  • हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम): जीतन राम मांझी की पार्टी की हिस्सेदारी पर भी विचार चल रहा है।
  • राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो): उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को भी मंत्रिमंडल में उचित स्थान मिलने की उम्मीद है।

विभागों का भारी बोझ और बंटवारे का फार्मूला

​मंत्रिमंडल विस्तार की आवश्यकता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि वर्तमान मंत्रियों के पास विभागों का अत्यधिक अंबार लगा हुआ है। कार्यक्षमता और प्रशासनिक सुगमता के लिए इन विभागों का विकेंद्रीकरण जरूरी है। वर्तमान स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी: इनके पास वर्तमान में अकेले 29 विभागों की जिम्मेदारी है।
  • विजय कुमार चौधरी: उपमुख्यमंत्री के पास 10 महत्वपूर्ण विभाग हैं।
  • बिजेन्द्र प्रसाद यादव: इनके पास 8 विभागों का कार्यभार है।

​प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि एक ही मंत्री के पास इतने अधिक विभाग होने से फाइलों के निपटारे और योजनाओं की निगरानी में कठिनाई आती है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद, जदयू के मंत्रियों के बीच बिजेन्द्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी के पास मौजूद 18 विभागों में से काम का बंटवारा किया जाएगा। वहीं, भाजपा कोटे से आने वाले मंत्रियों और अन्य सहयोगी दलों (लोजपा, हम, रालोमो) के बीच मुख्यमंत्री के पास मौजूद 29 विभागों का बंटवारा होने की प्रबल संभावना है। इससे न केवल सरकार के काम में तेजी आएगी बल्कि सभी घटक दलों को शासन में अपनी भागीदारी महसूस होगी।

6 मई की तारीख और भविष्य की तस्वीर

​तमाम राजनैतिक कयासों के बीच 6 मई 2026 की तारीख सबसे अधिक चर्चा में है। राजनैतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि 6 मई को राजभवन में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हो सकता है। सम्राट चौधरी की दिल्ली यात्रा का समय और पटना में नीतीश कुमार के साथ हुई बैठक के संकेत इसी ओर इशारा कर रहे हैं। यदि रविवार को दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से सहमति मिल जाती है, तो सोमवार तक नामों की सूची तैयार हो जाएगी और बुधवार यानी 6 मई को नए मंत्री शपथ ले सकते हैं।

​इस विस्तार के जरिए भाजपा और जदयू का नेतृत्व जातीय समीकरणों को भी साधने की कोशिश करेगा। आने वाले समय में होने वाली राजनैतिक परीक्षाओं को देखते हुए हर दल अपने कोटे से ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहता है जो न केवल प्रशासनिक रूप से सक्षम हों, बल्कि अपने-अपने समुदायों में अच्छी पकड़ भी रखते हों। भाजपा के लिए यह विस्तार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी को अपने कोटे से अन्य छोटे सहयोगी दलों को भी संतुष्ट रखना है। सम्राट चौधरी के दिल्ली दौरे के परिणामों पर अब पूरे बिहार की नजरें टिकी हुई हैं।

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