बिहार कैबिनेट के बड़े फैसले: कर्मचारियों को कैशलेस इलाज, सड़क परियोजनाओं पर अरबों की मुहर और न्यायिक व्यवस्था का विस्तार

बिहार सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पटना में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 27 महत्वपूर्ण एजेंडों पर मुहर लगाई गई। इस बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी देते हुए मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि सरकार ने इस बार राज्य के कर्मचारियों, स्वास्थ्य क्षेत्र, सड़क कनेक्टिविटी और न्यायिक व्यवस्था को लेकर कई दूरगामी फैसले किए हैं। कैबिनेट के इन फैसलों से सीधे तौर पर लाखों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

कर्मचारियों और पेंशनधारियों को मिला बड़ा स्वास्थ्य उपहार
इस कैबिनेट बैठक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार ने बिहार सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत अंतर्वासी चिकित्सा यानी आईपीडी के लिए पूरी तरह से कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की स्वीकृति दे दी है।

इस नई व्यवस्था के दायरे में कई श्रेणियों के लोगों और उनके आश्रितों को शामिल किया गया है:
* बिहार विधान मंडल के वर्तमान एवं पूर्व सदस्य तथा उनके आश्रित।
* अखिल भारतीय सेवा के सेवारत एवं सेवानिवृत्त पदाधिकारी तथा उनके परिवार।
* राज्य सरकार के नियमित अधिकारी, कर्मचारी और उनके आश्रित।
* सेवानिवृत्त पेंशनधारी राज्य कर्मी (पति-पत्नी) और पारिवारिक पेंशनर।

इस मंजूरी के बाद अब इन सभी लाभार्थियों को अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इलाज के लिए नकद राशि देने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे कर्मचारियों को बहुत बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी。

बिहार में सड़कों का बिछेगा जाल: अरबों रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति

सड़क परिवहन और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए पथ निर्माण विभाग के तहत ‘बिहार स्टेट हाईवे प्रोजेक्ट-IV’ (BSHP-IV) के अंतर्गत पांच बड़ी सड़क परियोजनाओं के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण को हरी झंडी दिखाई गई है। इसके लिए सरकार ने भारी-भरकम राशि मंजूर की है:

मधुबनी-राजनगर-बाबूबरही-खुटौना पथ:  इस 38.872 किलोमीटर लंबी सड़क के विकास के लिए 632.72 करोड़ रुपये (₹63,272.00 लाख) स्वीकृत किए गए हैं。

सीतामढ़ी-पुपरी-बेनीपट्टी पथ (SH-52): इसकी कुल लंबाई 51.261 किलोमीटर है, जिसके चौड़ीकरण कार्य के लिए 434.37 करोड़ रुपये (₹43,437.00 लाख) की प्रशासनिक स्वीकृति मिली है。

विशनपुर-अतरबेल (NH-57) से जाले घोघरचट्टी (SH-52) पथ:** इस 47.875 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना के उन्नयन के लिए सबसे बड़ी राशि यानी 990.03 करोड़ रुपये (₹99,003.50 लाख) को मंजूरी दी गई है。

गणपतगंज-परवाहा पथ (SH-92):इस 47.432 किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण कार्य के लिए 703.95 करोड़ रुपये (₹70,395.00 लाख) का प्रावधान किया गया है।

ब्रहमपुर-कोरनसराय-इटाढ़ी सरंजा-इटाढ़ी बक्सर तथा उजियारपुर-कुकराहा-जमुआंव-इंदौर-समदा पथ:

इस विस्तृत 80.728 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना के सुदृढ़ीकरण के लिए 982.58 करोड़ रुपये (₹98,258.00 लाख) स्वीकृत किए गए हैं

अदालतों का विस्तार और नए पदों का सृजन
राज्य में न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज करने और मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत नए विशेष न्यायालयों के गठन और पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।
पूर्णियाँ, भागलपुर और गया न्यायमंडल में एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत दर्ज मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश स्तर के एक-एक यानी कुल 3 अनन्य विशेष न्यायालयों (Exclusive Special Courts) की स्थापना की जाएगी। इसके लिए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के 3 पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है।

इसके अलावा, बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मधुबनी (सदर) न्यायमंडल में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के एक अतिरिक्त न्यायालय और दरभंगा न्यायमंडल के बेनीपुर अनुमंडलीय न्यायालय में एक नए न्यायालय की स्थापना होगी। इन दोनों न्यायालयों के संचालन के लिए कुल 2 पदों का सृजन किया गया है।

रोजगार, युवा विकास और कौशल संवर्धन के प्रयास
युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के तहत प्रशासनिक ढांचे में सुधार और नए पदों के सृजन को लेकर तीन महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं:

1. नाम में बदलाव और प्रतिस्थापन: “बिहार स्टेट काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग” और “बिहार राज्य समुद्रपार नियोजन ब्यूरो” के पुराने संकल्पों में अब “श्रम संसाधन विभाग” के स्थान पर “युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग” शब्द को प्रतिस्थापित करने की मंजूरी दी गई है।

2. विशेष नियोजन निदेशालय: विभाग के अंतर्गत विशेष नियोजन निदेशालय में 6 नई प्रशाखाओं के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न श्रेणियों के कुल 57 नए पदों के सृजन की प्रशासनिक स्वीकृति मिली है।

3. छात्र एवं युवा कल्याण निदेशालय: इस निदेशालय की 6 नई प्रशाखाओं के लिए पहले से स्वीकृत 7 पदों को वापस (प्रत्यार्पित) लेते हुए, अलग-अलग कोटि के कुल 55 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचा और नियमावली में संशोधन
चिकित्सा सेवाओं को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने कई अन्य नीतिगत निर्णय लिए हैं:

पीएमसीएच में नई यूनिट: पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (PMCH) के हड्डी रोग विभाग के अंतर्गत एक स्वतंत्र ‘स्पाईन सब-स्पेशियलिटी यूनिट’ स्थापित की जाएगी। इस विशेष यूनिट के कामकाज को संभालने के लिए कुल 39 नए पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है।

अस्पतालों के लिए नई नियमावली: छोटे और मध्यम स्तर के चिकित्सा संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए ‘बिहार लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान (स्थापना एवं पंजीकरण) विनियमावली 2026’ को हरी झंडी दिखाई गई है।

भर्ती नियमों में बदलाव: सीनियर रेजिडेन्ट / ट्यूटर तथा बिहार चिकित्सा शिक्षा सेवा भर्ती, नियुक्ति एवं प्रोन्नति (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026 की भी स्वीकृति दी गई है।
### भूमि सुधार, सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण स्वीकृतियां
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के तहत कई जिलों में महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों के निर्माण के लिए सशुल्क और निःशुल्क भूमि हस्तांतरण के प्रस्तावों को पास किया गया है:

शेखपुरा: शेखपुरा अंचल के मौजा-गिरिहिण्डा में आईबी के कार्यालय और आवासीय परिसर के निर्माण के लिए 27.48 डीह गैरमजरूआ आम भूमि को 6,24,02,487 रुपये के भुगतान पर भारत सरकार की एजेंसी एसआईबी को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी गई है।

गोपालगंज: गोपालगंज सदर अंचल के मौजा-तिरबिरवा में आईबी कार्यालय सह आवासीय परिसर निर्माण के लिए 30 डीह गैरमजरूआ मालिक भूमि को 67,50,000 रुपये के भुगतान पर गृह मंत्रालय, भारत सरकार को हस्तांतरित करने की स्वीकृति मिली है।

बेगूसराय: खोदावंदपुर अंचल के मौजा-फफौत में 21 एकड़ गैरमजरूआ खास परती कदीम भूमि पर एक नई उप कारा (जेल) के निर्माण के लिए गृह विभाग, बिहार को निःशुल्क अंतर्विभागीय स्थायी हस्तांतरण की स्वीकृति दी गई है।

नीतिगत सुधार: विभाग के तहत ‘बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त (संशोधन) नियमावली, 2026’ और ‘बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026’ को भी मंजूरी दी गई है।

जल संसाधन और कृषि क्षेत्र को सहारा देने के लिए लघु जल संसाधन विभाग द्वारा पंचायतों को पूर्व में हस्तांतरित किए गए सभी राजकीय नलकूपों की मरम्मती, संचालन और रख-रखाव का काम अब खुद विभाग द्वारा किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही भूगर्भ शास्त्री संवर्ग के नियमन के लिए नई सेवा नियमावली, 2026 को स्वीकृति दी गई है। विश्व बैंक द्वारा संपोषित ‘बिहार जल सुरक्षा एवं सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना’ के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से 102.98 करोड़ रुपये के अग्रिम की मंजूरी दी गई है।

इसके अतिरिक्त, राज्य के सभी 38 जिलों में सात निश्चय कार्यक्रम के तहत संचालित जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्रों (DRCC) के रख-रखाव के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 65 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। न्यायिक क्षेत्र में सुविधाओं को बढ़ाते हुए पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के उपयोग के लिए 10 नए ईवी/हाइब्रिड वाहनों की खरीद हेतु आकस्मिकता निधि से 3.70 करोड़ रुपये के अग्रिम की स्वीकृति दी गई है। परिवहन विभाग के तहत पटना के सेवानिवृत्त होने जा रहे वरीय पुलिस उपाधीक्षक (यातायात) अनिल कुमार को उनकी सेवानिवृत्ति तिथि 31 मई 2026 के बाद संविदा के आधार पर पुनर्नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।

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