भागलपुर में शराबबंदी कानून को लेकर प्रशासन सख्त, डीएम ने अवैध कारोबारियों पर तेज कार्रवाई के दिए निर्देश

भागलपुर,  बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने और अवैध शराब कारोबार पर सख्ती बढ़ाने को लेकर भागलपुर जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। समीक्षा भवन में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में जिलाधिकारी ने उत्पाद विभाग और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि जिले में चल रहे मद्यनिषेध अभियान को और अधिक तेज एवं प्रभावी बनाया जाए।

बैठक में शराबबंदी कानून के तहत हो रही कार्रवाई, शराब बरामदगी, गिरफ्तारी, लंबित मामलों और अधिग्रहित वाहनों से जुड़े विषयों की विस्तार से समीक्षा की गई। जिला प्रशासन ने साफ संकेत दिया कि अवैध शराब कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ अब और कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने अप्रैल और मई महीने में अब तक उत्पाद विभाग तथा पुलिस प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की बिंदुवार समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने शराब तस्करी, अवैध निर्माण, भंडारण और परिवहन से जुड़े मामलों में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जिले के सभी थाना क्षेत्रों में अभियान को और अधिक सघन बनाया जाए। खासकर उन इलाकों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया जहां पहले शराब तस्करी या अवैध कारोबार के मामले सामने आ चुके हैं।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध शराब कारोबार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि शराब माफियाओं की पहचान कर उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल शराब बरामद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई करना जरूरी है। शराब निर्माण, भंडारण और सप्लाई से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में लंबित शराब विनष्टीकरण मामलों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जब्त शराब को नष्ट करने से जुड़े सभी लंबित मामलों का जल्द निष्पादन किया जाए ताकि कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।

इसके अलावा शराब तस्करी में इस्तेमाल किए गए वाहनों के अधिग्रहण प्रस्तावों की भी समीक्षा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि अधिग्रहण से संबंधित सभी लंबित प्रस्तावों को बिना देरी जिला पदाधिकारी कार्यालय को भेजा जाए, ताकि आगे की कार्रवाई समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।

बैठक में अधिगृहीत वाहनों की नीलामी प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने मोटर यान निरीक्षक को निर्देश दिया कि जब्त किए गए 59 वाहनों का मूल्यांकन प्रतिवेदन जल्द से जल्द जमा किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

प्रशासन का मानना है कि शराब तस्करी के मामलों में वाहनों की जब्ती और उनकी कानूनी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करना जरूरी है। इससे अवैध कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और शराब माफियाओं के नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिलेगी।

बैठक में अधिकारियों ने जिले में चल रहे मद्यनिषेध अभियान की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी दी। बताया गया कि पिछले कुछ महीनों में विभिन्न थाना क्षेत्रों में छापेमारी अभियान चलाकर बड़ी मात्रा में शराब बरामद की गई है और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

हालांकि जिलाधिकारी ने कहा कि अभी भी कई क्षेत्रों में और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि गुप्त सूचना तंत्र को और मजबूत किया जाए ताकि अवैध शराब कारोबार से जुड़े नेटवर्क की समय रहते पहचान की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद अवैध शराब तस्करी रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई बार पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी की कोशिशें सामने आती रही हैं, जिसके कारण लगातार निगरानी और अभियान की जरूरत बनी रहती है।

प्रशासन ने यह भी कहा कि शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने में आम लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। लोगों से अपील की गई कि यदि कहीं अवैध शराब निर्माण, बिक्री या भंडारण की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस या उत्पाद विभाग को सूचित करें।

बैठक में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि कई इलाकों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोगों को शराबबंदी कानून और उसके सामाजिक प्रभावों के बारे में जानकारी दी जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि शराबबंदी केवल कानूनी अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार का भी हिस्सा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जाए।

बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक , उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और कार्रवाई को तेज करने का निर्देश दिया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की सख्ती से कई इलाकों में अवैध शराब कारोबार पर रोक लगी है, लेकिन अभी भी कुछ क्षेत्रों में गुप्त रूप से शराब बिक्री की शिकायतें मिलती रहती हैं। लोगों ने प्रशासन से लगातार निगरानी बनाए रखने की मांग की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाए रखने के लिए पुलिस, उत्पाद विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है। साथ ही तस्करी के नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया में तेजी भी महत्वपूर्ण है।

भागलपुर जिला प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और समाज को नशामुक्त बनाने के लिए हर स्तर पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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