
पटना/भागलपुर। बिहार के राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों में जहाँ एक तरफ सत्ता के समीकरण बदल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य के बुनियादी ढांचे को आधुनिक रंग देने की कवायद भी युद्धस्तर पर तेज हो गई है। “सिल्क सिटी” भागलपुर के भौगोलिक और नगरीय विस्तार की दिशा में गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को एक युगांतरकारी निर्णय लिया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य में प्रस्तावित 11 सेटेलाइट टाउनशिप की श्रृंखला में ‘विक्रमशिला टाउनशिप’ के निर्माण को लेकर विधिवत संकल्प जारी कर दिया है। यह टाउनशिप केवल एक आवासीय परियोजना नहीं, बल्कि भागलपुर के भविष्य का एक नया ‘महानगर’ होगा जो 24,000 एकड़ के विशाल भूखंड पर बसाया जाएगा। विभाग ने इस टाउनशिप की चौहद्दी और प्रभावित होने वाले राजस्व गांवों की सूची स्पष्ट कर दी है। सबसे बड़ा असर जमीन के कारोबार पर पड़ा है—प्रशासन ने चिन्हित 84 गांवों की जमीन की खरीद-बिक्री और किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस कदम से जहाँ विकास की नई उम्मीदें जागी हैं, वहीं जमीन के बाजार में भारी हलचल मच गई है।
विक्रमशिला टाउनशिप: सपनों का नया आशियाना और 24,000 एकड़ का साम्राज्य
भागलपुर की बढ़ती आबादी और शहर के भीतर बढ़ते दबाव को देखते हुए ‘विक्रमशिला टाउनशिप’ को एक ‘सेटेलाइट टाउन’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका कुल क्षेत्रफल 24,000 एकड़ तय किया गया है, जो भागलपुर के वर्तमान नगरीय क्षेत्र से कई गुना बड़ा होगा। इस विशाल टाउनशिप के भीतर एक 861 एकड़ का ‘कोर एरिया’ होगा, जहाँ मुख्य प्रशासनिक भवन, पार्क, कमर्शियल हब और अत्याधुनिक नागरिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
भौगोलिक दृष्टि से इस टाउनशिप का स्थान अत्यंत रणनीतिक चुना गया है। प्रस्तावित टाउनशिप की दूरी भागलपुर नगर सीमा से मात्र 4 किलोमीटर होगी। इसके अलावा, परिवहन और कनेक्टिविटी के लिहाज से भी यह एक ‘हब’ साबित होगा:
- रेलवे कनेक्टिविटी: भागलपुर रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी महज 10 किलोमीटर होगी।
- हवाई कनेक्टिविटी: प्रस्तावित सुल्तानगंज एयरपोर्ट से टाउनशिप की दूरी केवल 18 किलोमीटर होगी। यह त्रिकोणीय कनेक्टिविटी भविष्य में इस टाउनशिप को बिहार के सबसे विकसित व्यापारिक और आवासीय केंद्रों में शुमार कर देगी। विभाग अब जल्द ही इसका एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने जा रहा है, जिसमें स्मार्ट सिटी की तर्ज पर ड्रेनेज, बिजली और चौड़ी सड़कों का खाका होगा।
‘रेड लिस्ट’ का साया: 84 गांवों की जमीन पर लगा ‘सरकारी ताला’
नगर विकास विभाग के संकल्प जारी होते ही सबसे पहले निबंधन कार्यालय (रजिस्ट्री ऑफिस) को सतर्क कर दिया गया है। टाउनशिप के लिए चिन्हित जमीनों के खाता-खेसरा को ‘रेड लिस्ट’ में डालने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। तकनीकी भाषा में ‘रेड लिस्ट’ का अर्थ है कि इन मौजा (राजस्व गांवों) की जमीन का डिजिटल लॉगिन पूरी तरह लॉक कर दिया जाएगा। इसके बाद न तो कोई व्यक्ति अपनी जमीन बेच सकेगा और न ही कोई इसे खरीद पाएगा।
विभाग द्वारा जारी सूची में शुरुआत में 126 गांवों का उल्लेख था, लेकिन नामों के दोहराव (Repetition) को हटाने के बाद कुल 84 गांव ही इस दायरे में आए हैं। इनमें सबसे अधिक प्रभाव नाथनगर प्रखंड पर पड़ेगा।
- नाथनगर: यहाँ के सर्वाधिक 49 गांवों की जमीन को रेड लिस्ट में शामिल किया गया है।
- शाहकुंड: इस प्रखंड के 16 गांव टाउनशिप के दायरे में आएंगे।
- सुल्तानगंज: यहाँ के 15 गांवों की जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगाई गई है।
- नारायणपुर: इस प्रखंड के 4 गांवों की जमीन भी अब सरकारी प्रोजेक्ट का हिस्सा बनेगी।
सब-रजिस्ट्रार प्रियदर्शन के अनुसार, मुख्यालय से निर्देश प्राप्त होते ही सॉफ्टवेयर में इन गांवों के डेटा को फ्रीज कर दिया जाएगा। इस रोक का उद्देश्य यह है कि मास्टर प्लान लागू होने से पहले वहां कोई अवैध निर्माण या बड़े पैमाने पर जमीन की हेराफेरी न हो सके, जिससे भविष्य में मुआवजे और अधिग्रहण की प्रक्रिया में अड़चन आए।
प्रखंडवार प्रभावित गांवों की सूची: कहाँ-कहाँ रुकी रजिस्ट्री?
टाउनशिप के संकल्प ने भागलपुर के चार प्रमुख प्रखंडों की राजनैतिक और सामाजिक स्थिति को प्रभावित किया है। प्रभावित गांवों की विस्तृत सूची जिला प्रशासन को सौंप दी गई है:
- नाथनगर के प्रमुख गांव: फतेहपुर, बिहारीपुर, भतोड़िया, गंगा प्रसाद, पचकठिया, भोलापुर, मनियारपुर चौर, पैगंबरपुर, बसंतपुर, पुरानी सराय, राघोपुर, माधोपुर, मथुरापुर, रत्तीपुर, सूजापुर, सेरमपुर, करणपुर, गौरीपुर, खोटिया, मकुनपुर, रसीदपुर, गोसाईंदासपुर, रामपुर खुर्द, खुटाहा, मोहम्मदपुर, जैतीपुर, हरिदासपुर, कंझिया, बेलखोरिया, गोलाहू, हबीबचक, शाहपुर, इंग्लिश, मेहरबान चक, चांदपुर, कालुपुर, गोवर्धनपुर, नूरपुर और जगरनाथपुर सहित कुल 49 मौजा।
- शाहकुंड के गांव: पचरूखी, बाला चौकी, पचरूखी अराजी, पचरूखी अमानत, मनियारपुर किता, पचरूखी खुर्द, जमालपुर, नियामतखान हवलदार इंग्लिश, सरोख इंग्लिश, मनुल्लाह हवलदार इंग्लिश, पचरूखी इंग्लिश, करणपुर, पचरूखी जागीर, पतौनी, छत्तर सिंह हवलदार इंग्लिश, दरियापुर और रहतुल्लाह जमादार इंग्लिश।
- सुल्तानगंज के गांव: मकंदपुर छीट, भवनाथपुर अराजी, चत्रभुजपुर, गौरीपुर चौर, हरियो, शंकरचक, बसंतपुर, बसंतचक, फतेहपुर अराजी, खैरा किशनपुर, दामोदरपुर अराजी, खुटाहा, यादगार, मथुरापुर और दीनानाथपुर।
- नारायणपुर के गांव: मिर्जापुर, गंगापुर, युशुफपुर और शाहजादपुर।
जमीन मालिकों की चिंता और विकास का संतुलन
विक्रमशिला टाउनशिप की घोषणा ने जहाँ एक तरफ भागलपुर के विकास को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का वादा किया है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय किसानों और जमीन मालिकों के बीच अनिश्चितता का माहौल भी पैदा कर दिया है। 84 गांवों में रजिस्ट्री पर रोक लगने का मतलब है कि अब लोग अपनी पैतृक या खरीदी हुई जमीन का उपयोग अपनी निजी जरूरतों (जैसे बच्चों की शादी या उच्च शिक्षा) के लिए नहीं कर पाएंगे।
जब तक मास्टर प्लान फाइनल नहीं होता और जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजे की दरें तय नहीं की जातीं, तब तक ये ग्रामीण अपनी ही जमीन पर केवल ‘पहरेदार’ बनकर रह जाएंगे। सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन 84 गांवों के लोगों को विश्वास में लेना और उन्हें बाजार दर से उचित मुआवजा दिलाना होगा। हालांकि, विभाग का तर्क है कि इस टाउनशिप के बसने से पूरे इलाके की ‘लैंड वैल्यू’ में कई गुना बढ़ोत्तरी होगी और यह क्षेत्र भागलपुर की नई आर्थिक रीढ़ बनेगा।
मास्टर प्लान की तैयारी: अत्याधुनिक सुविधाओं का वादा
नगर विकास एवं आवास विभाग अब विक्रमशिला टाउनशिप के लिए एक विशेषज्ञ एजेंसी के माध्यम से मास्टर प्लान तैयार कराएगा। इसमें न केवल आवासीय परिसर होंगे, बल्कि आईटी पार्क, औद्योगिक क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थान और ग्रीन कॉरिडोर भी शामिल किए जाएंगे। टाउनशिप को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि यह पूरी तरह ‘सेल्फ-सस्टेनेबल’ (स्व-निर्भर) हो।
स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम और 24 घंटे बिजली-पानी की व्यवस्था इसकी प्राथमिकता होगी। कोर एरिया (861 एकड़) को एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ से पूरे टाउनशिप का संचालन होगा। 4 किलोमीटर की दूरी शहर से होने के कारण यह मुख्य भागलपुर शहर पर पड़ने वाले भीड़ और प्रदूषण के दबाव को भी कम करेगा।


