भागलपुर में गूंजेगा बाबू वीर कुंवर सिंह का विजयघोष: जनसंपर्क रथ ने गांवों में भरी देशभक्ति की हुंकार; 23 अप्रैल को जुटेगा दिग्गजों का जमावड़ा

भारतीय स्वाधीनता संग्राम के पहले महासमर 1857 के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह की शौर्यगाथा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए भागलपुर की धरती एक बार फिर तैयार है। आगामी 23 अप्रैल 2026 को आयोजित होने वाले ‘बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह’ की तैयारियों को धार देने के लिए सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को एक विशेष जनसंपर्क रथ को रवाना किया गया। कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. राजीव कुमार सिंह ने इस रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसका उद्देश्य गांव-गांव जाकर लोगों को इस ऐतिहासिक गौरव से जोड़ना और उन्हें समारोह में आमंत्रित करना है। यह रथ केवल एक वाहन नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस और वीरता का प्रतीक बनकर निकला है, जिसने 80 वर्ष की आयु में भी अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दी थीं। भागलपुर के ग्रामीण इलाकों में इस रथ का जिस तरह से स्वागत हो रहा है, उससे स्पष्ट है कि आज भी नई पीढ़ी के भीतर राष्ट्रवाद और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

गांव-गांव में विजयोत्सव का निमंत्रण: जनसंपर्क रथ का सफर

​डॉ. राजीव कुमार सिंह द्वारा रवाना किया गया यह जनसंपर्क रथ सोमवार को भागलपुर के दर्जनों गांवों की पगडंडियों से होकर गुजरा। रथ के माध्यम से समिति के सदस्यों ने बनामा, बकचप्पर, कोदंडा, जगरिया, मानिकपुर, रतनपुर, रहमतपुर, चटमाडीह, बंशीपुर, रायपुर, बाजार चटमा, गढ़ी कुरमा, रामचुआ, पहाड़ी खजूरी, गुलनी कुशहा, मेहरपुर और केंदुआर जैसे इलाकों में सघन जनसंपर्क किया। हर गांव में रथ के पहुँचते ही ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और ‘बाबू वीर कुंवर सिंह अमर रहें’ के नारों से आसमान गूँज उठा।

​समिति के सदस्यों ने ग्रामीण जनता को संबोधित करते हुए न केवल 23 अप्रैल के कार्यक्रम का आमंत्रण दिया, बल्कि बाबू वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व और उनके पदचिन्हों पर चलने का आवाहन भी किया। वक्ताओं ने याद दिलाया कि कैसे जगदीशपुर के उस वृद्ध शेर ने अपनी बांह काटकर गंगा में अर्पित कर दी थी, लेकिन फिरंगियों के सामने घुटने नहीं टेके थे। इसी वीरता को आज के दौर में चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का आधार बनाने की अपील की गई। गांवों में जनसंपर्क के दौरान यह देखा गया कि युवाओं में विशेष रूप से एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा है। वे अपनी संस्कृति और इतिहास से जुड़ने के लिए आतुर दिखे।

23 अप्रैल का भव्य खाका: सिंह चौक से टाउन हॉल तक शौर्य यात्रा

​विजयोत्सव समारोह समिति ने आगामी 23 अप्रैल 2026 के लिए जो योजना तैयार की है, वह भागलपुर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह होगी। उस दिन शहर की सड़कों पर एक भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी, जो पारंपरिक गौरव और आधुनिक उत्साह का अनूठा संगम होगी। यह यात्रा शहर के सिंह चौक से प्रारंभ होकर टाउन हॉल तक जाएगी। इस शोभा यात्रा की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें ढोल-नगाड़े, गाजे-बाजे के साथ-साथ हाथी और घोड़े भी शामिल रहेंगे।

​शोभा यात्रा के दौरान भागलपुर की सड़कों पर केसरिया झंडों और वीर कुंवर सिंह के चित्रों के साथ हजारों की संख्या में लोग पैदल और वाहनों पर चलेंगे। समिति का लक्ष्य है कि यह यात्रा केवल एक दिखावा न होकर एक जन-आंदोलन का रूप ले, जिससे लोग अपने वीर पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर सकें। टाउन हॉल पहुँचने के बाद यह यात्रा एक भव्य सभा में तब्दील हो जाएगी, जहाँ देश के बड़े राजनैतिक और सामाजिक चेहरों का संबोधन होगा।

दिग्गज वक्ताओं का जमावड़ा: बृजभूषण शरण सिंह और धनंजय सिंह देंगे ओजस्वी भाषण

​इस विजयोत्सव समारोह की सबसे बड़ी विशेषता इसमें शामिल होने वाले मुख्य अतिथि हैं। टाउन हॉल में आयोजित मुख्य समारोह में उत्तर प्रदेश के दो दिग्गज नेता और पूर्व सांसद अपने ओजस्वी विचारों से जनता को संबोधित करेंगे। गोंडा (यूपी) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और जौनपुर (यूपी) के पूर्व सांसद धनंजय सिंह इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण होंगे। ये दोनों ही नेता अपनी प्रखर वक्तृत्व शैली और क्षत्रिय समाज सहित आम जनमानस में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं।

​बृजभूषण शरण सिंह और धनंजय सिंह का संबोधन बाबू वीर कुंवर सिंह की विरासत और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रवाद की चुनौतियों पर केंद्रित होगा। समिति का मानना है कि इन नेताओं के विचारों से भागलपुर और आसपास के जिलों से आने वाले हजारों युवाओं को एक नई दिशा मिलेगी। इनके आगमन को लेकर जिले के युवाओं में जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है और सोशल मीडिया पर भी इस कार्यक्रम की चर्चा जोरों पर है। वक्ताओं के चयन से स्पष्ट है कि समिति इस आयोजन को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रखकर एक व्यापक फलक देना चाहती है।

सैकड़ों युवाओं का कारवां: स्वागत और सम्मान की बयार

​सोमवार को निकला जनसंपर्क रथ का कारवां देखते ही देखते एक विशाल जुलूस में बदल गया। सैकड़ों की संख्या में युवा अपनी मोटरसाइकिलों और पैदल ही रथ के साथ चलते नजर आए। स्थानीय ग्रामीणों ने कई जगहों पर रथ का स्वागत फूल-मालाओं और तिलक लगाकर किया। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आम लोगों के लिए यह गर्व का क्षण था कि उनके द्वार तक महान सेनानी की स्मृतियों को लेकर कोई आया है।

​जनसंपर्क यात्रा में श्वेता सिंह, डॉ. संजय सिंह, डॉ. मृत्युंजय सिंह गंगा, डॉ. रौशन सिंह, नितेश सिंह, राहुल चौहान, रजनीश सिंह, राजेश सिंह, गोल्डन सिंह तोमर, सुशील सिंह, आशुतोष सिंह, साकेत सिंह तोमर, रूपेश सिंह, रोहित सिंह, आदित्य राज, मुखिया उत्तम सिंह, पैक्स अध्यक्ष हीरा सिंह और सोनू सिंह सहित क्षेत्र के कई अन्य गणमान्य व्यक्ति सक्रिय रूप से शामिल थे। इन नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से लोगों से अपील की कि वे राजनीति और गुटबाजी से ऊपर उठकर इस राष्ट्रीय गौरव के पर्व में शामिल हों।

बाबू वीर कुंवर सिंह: 1857 की ज्वाला और वर्तमान संदर्भ

​बाबू वीर कुंवर सिंह का विजयोत्सव मनाना केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह उस इतिहास को जीवंत करने की कोशिश है जिसे अक्सर मुख्यधारा की पाठ्यपुस्तकों में वह स्थान नहीं मिला जिसका वह हकदार था। 1858 में अस्सी साल की उम्र में उन्होंने आज़मगढ़ से लेकर बलिया और जगदीशपुर तक अंग्रेजों को धूल चटाई थी। उनके युद्ध कौशल (गोरिल्ला वारफेयर) की चर्चा आज भी सैन्य विशेषज्ञों के बीच होती है।

​भागलपुर में होने वाला यह आयोजन इसी स्मृति को ताजा करने का माध्यम है। मीडिया प्रभारी गोल्डन सिंह तोमर के अनुसार, इस बार का विजयोत्सव पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और भव्य होगा। जनसंपर्क रथ के माध्यम से जो संदेश गाँवों तक पहुँचाया गया है, उसका असर 23 अप्रैल की भीड़ के रूप में देखने को मिलेगा। समिति ने सुरक्षा और यातायात को लेकर भी प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया है ताकि इतनी बड़ी शोभा यात्रा और सभा के दौरान आम जनता को कोई असुविधा न हो।

युवाओं और महिलाओं की भागीदारी पर विशेष जोर

​इस वर्ष के आयोजन में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह देखा जा रहा है कि समिति ने महिलाओं और बुजुर्गों को भी मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया है। जनसंपर्क रथ के दौरान महिलाओं ने बड़ी संख्या में बाहर निकलकर बाबू वीर कुंवर सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। बुजुर्गों ने अपनी युवा पीढ़ी को उन किस्सों को सुनाया जो उन्होंने अपने पूर्वजों से सुने थे। युवाओं के लिए यह आयोजन अपनी जड़ों को पहचानने और स्वाभिमान के साथ जीने की प्रेरणा है।

​जैसे-जैसे 23 अप्रैल की तारीख नजदीक आ रही है, भागलपुर में उत्साह का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। सिंह चौक से टाउन हॉल तक का मार्ग अभी से चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस यात्रा को अपना समर्थन दिया है। यह विजयोत्सव केवल एक जाति या वर्ग का नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जो इस माटी से प्रेम करता है और बाबू वीर कुंवर सिंह को अपना आदर्श मानता है। आने वाले तीन दिनों तक जनसंपर्क का यह सिलसिला और भी तेज होगा, जिससे भागलपुर के चप्पे-चप्पे से लोग इस ऐतिहासिक गौरव गाथा का साक्षी बनने के लिए टाउन हॉल पहुँचेंगे।

  • ये भी पढ़े..

    भागलपुर में ट्रक चालकों से अवैध वसूली का आरोप, बाईपास थाना अध्यक्ष समेत चार पुलिसकर्मी निलंबित

    Share Add as a preferred…

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से भागलपुर के 13,200 से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ, 25 वर्षों तक मिलेगी ऊर्जा सुरक्षा

    Share Add as a preferred…