बिहार की रसोई में अब धुएं की जगह दौड़ेगी ‘साफ ऊर्जा’: एक लाख से अधिक घरों में पहुँची पीएनजी की सौगात; कटिहार बना नया गैसकृत जिला

पटना। बिहार में आधुनिक बुनियादी ढांचे और स्वच्छ ईंधन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य सरकार की प्राथमिकता अब आम आदमी की रसोई को पारंपरिक और असुरक्षित ईंधन से मुक्त कर पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) से जोड़ने की है। इसी सिलसिले में सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के मुख्य सचिव कोषांग में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के ‘क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप’ (CMG) की इस बैठक में राज्य के सभी 38 जिलों में ऊर्जा आपूर्ति की वर्तमान स्थिति का बारीकी से विश्लेषण किया गया। बैठक में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बिहार के बदलते शहरी परिदृश्य की एक सुखद तस्वीर पेश करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 18 अप्रैल 2026 तक प्रदेश के 1,04,036 से अधिक घरों में पीएनजी सेवा ‘लाइव’ हो चुकी है, यानी इन घरों में अब पाइप के जरिए सीधे गैस पहुँच रही है। यह आंकड़ा न केवल एक मील का पत्थर है, बल्कि यह केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों का परिणाम भी है।

रफ्तार पकड़ता पीएनजी नेटवर्क: मार्च में बना नया रिकॉर्ड

​बिहार में पीएनजी कनेक्शन देने की प्रक्रिया ने पिछले कुछ महीनों में अभूतपूर्व गति पकड़ी है। बैठक के दौरान दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले एक साल में पीएनजी कनेक्शन देने की औसत गति लगभग 3,000 से 3,500 प्रति माह के आसपास बनी हुई थी। लेकिन सरकार के निरंतर दबाव और तेल कंपनियों की सक्रियता के कारण मार्च 2026 में इसमें बड़ा उछाल देखा गया। मार्च महीने में अकेले 7,585 नए घरेलू कनेक्शन लाइव किए गए, जो अब तक की सबसे अधिक मासिक वृद्धि है।

​प्रत्यय अमृत ने इस प्रगति की सराहना तो की, लेकिन साथ ही तेल कंपनियों—आईओसी (IOCL), बीपीसी (BPCL) और गेल (GAIL)—को स्पष्ट चेतावनी भी दी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि इस गति को केवल बनाए ही नहीं रखना है, बल्कि इसे और बढ़ाकर 9,000 से 12,000 कनेक्शन प्रति माह के लक्ष्य तक पहुँचाना है। सरकार का मानना है कि जितनी जल्दी शहरी आबादी को पीएनजी से जोड़ा जाएगा, एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता और उनकी कालाबाजारी में उतनी ही कमी आएगी। पाइप वाली गैस न केवल सुरक्षित है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से भी अधिक किफायती साबित हो रही है।

कटिहार के नाम बड़ी उपलब्धि: अब 18 जिलों में फैला जाल

​समीक्षा बैठक में एक और बड़ी खबर सीमावर्ती जिले कटिहार से आई। कटिहार जिला 13 अप्रैल 2026 को आधिकारिक रूप से पूरी तरह ‘गैसकृत’ (Gasified) श्रेणी में शामिल हो गया है। इसका अर्थ यह है कि जिले के मुख्य शहरी क्षेत्रों में पीएनजी का बुनियादी ढांचा तैयार हो चुका है और आपूर्ति शुरू कर दी गई है। कटिहार की इस सफलता के साथ ही बिहार में अब कुल 18 जिले ‘गैसकृत’ श्रेणी में आ गए हैं।

​गैसकृत जिलों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि गैस ग्रिड का विस्तार अब केवल पटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर और सीमावर्ती बिहार के इलाकों तक पहुँच गया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि कटिहार मॉडल को अन्य जिलों में भी दोहराया जाए जहाँ बुनियादी ढांचे का काम अंतिम चरण में है। लक्ष्य यह है कि जल्द से जल्द बिहार के सभी 38 जिले इस श्रेणी में शामिल हों ताकि स्वच्छ ऊर्जा का लाभ समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुँच सके।

अवैध गैस कारोबार पर नकेल: अररिया से मधेपुरा तक भारी जब्ती

​एक तरफ जहाँ सरकार नई तकनीक को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू गैस की कालाबाजारी और अवैध भंडारण के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया गया है। 19 अप्रैल 2026 तक राज्य भर में चलाए गए सघन निरीक्षण अभियान की रिपोर्ट बैठक में पेश की गई। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की टीमों ने विभिन्न जिलों में हजारों गैस एजेंसियों और संदिग्ध स्थलों पर छापेमारी की।

​इस अभियान के दौरान अररिया जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 268 अवैध गैस सिलेंडर जब्त किए गए। इसी तरह कटिहार में 45 और मधेपुरा में 57 सिलेंडर बरामद हुए हैं। केवल जब्ती ही नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा भी कसा गया है। कई जिलों में गैस एजेंसियों और अवैध गोदाम संचालकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 6A के तहत मामले दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि एलपीजी की उपलब्धता में बाधा डालने वाले या कालाबाजारी करने वाले तत्वों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

जमीन आवंटन और बुनियादी ढांचा: जिला प्रशासन को कड़े निर्देश

​पीएनजी नेटवर्क के विस्तार में सबसे बड़ी बाधा अक्सर गैस स्टेशनों के लिए भूमि की उपलब्धता और स्थानीय स्तर पर मिलने वाली मंजूरी होती है। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि दरभंगा, बक्सर और मधुबनी जैसे जिलों में गैस स्टेशनों के निर्माण के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया अभी भी लंबित है। इस पर प्रत्यय अमृत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की और संबंधित जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि वे बिना किसी देरी के इस प्रक्रिया को पूर्ण करें।

​उन्होंने कहा कि पीएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर का कार्य एक ‘समयबद्ध’ परियोजना है और इसमें किसी भी स्तर पर होने वाली देरी राज्य के विकास को प्रभावित करती है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे तेल कंपनियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें ताकि पाइपलाइन बिछाने के दौरान आने वाली बाधाओं को तत्काल दूर किया जा सके। बुनियादी ढांचे के निर्माण में सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं करने की भी हिदायत दी गई है।

जन-जागरूकता और सुरक्षा: घर-घर पहुँचने की रणनीति

​सिर्फ बुनियादी ढांचा खड़ा कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को पीएनजी के लाभों के प्रति जागरूक करना भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीएनजी पंजीकरण बढ़ाने के लिए वार्ड-वार विशेष कैंप लगाए जाएं। साथ ही, डोर-टू-डोर (घर-घर जाकर) अभियान चलाने की भी योजना बनाई गई है ताकि लोग पारंपरिक सिलेंडर के मुकाबले पीएनजी की सुरक्षा और सुविधा को समझ सकें।

​सुरक्षा के मोर्चे पर पीएनजीआरबी (PNGRB) के मानकों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है। बैठक में यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि उपभोक्ता के घर तक पहुँचने वाली गैस पाइपलाइन और फिटिंग की नियमित जांच हो। तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों को सख्त लहजे में कहा गया कि स्वच्छ ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है। आम उपभोक्ताओं को गैस की कमी या आपूर्ति में व्यवधान का सामना न करना पड़े, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक के अंत में यह साफ संदेश दिया गया कि बिहार अब ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है और इसमें लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।

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