स्वच्छता की राष्ट्रीय रेस में ‘अंग प्रदेश’ भागलपुर अव्वल: पूर्वी भारत के 115 जिलों को पछाड़कर SSG-2025 में हासिल किया शीर्ष स्थान; बिहार-बंगाल-ओडिशा और झारखंड के दिग्गजों को दी मात

भागलपुर। बिहार के रेशमी शहर और ऐतिहासिक अंग जनपद की धरती भागलपुर ने विकास और स्वच्छता के वैश्विक मानचित्र पर एक नई और गौरवशाली इबारत लिख दी है। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित देश के सबसे व्यापक और प्रतिष्ठित स्वच्छता अभियान ‘स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (SSG) 2025’ के ताजा परिणामों ने पूरे पूर्वी भारत को चौंका दिया है। रविवार, 10 मई 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भागलपुर जिले ने पूर्वी भारत (ईस्ट जोन) के चार प्रमुख राज्यों—बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के कुल 115 जिलों को पीछे छोड़ते हुए स्वच्छता की रैंकिंग में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भागलपुर के ग्रामीण अंचलों में आए उस बुनियादी बदलाव का प्रमाण है, जिसे ‘स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (SBM-G)’ के तहत धरातल पर उतारा गया है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पिछले वर्ष शुरू किए गए इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत में न केवल खुले में शौच से मुक्ति (ODF) को बरकरार रखना था, बल्कि ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के जरिए ‘ओडीएफ प्लस मॉडल’ गांवों की संकल्पना को साकार करना था। भागलपुर की इस बड़ी छलांग ने बिहार के अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरक मिसाल पेश की है, जिससे यह साबित हो गया है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी का संगम हो, तो सीमित संसाधनों में भी शिखर तक पहुँचा जा सकता है।

सर्वेक्षण का विशाल कैनवास: 761 जिलों और 21000 गांवों की कसौटी

​स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 कोई साधारण आकलन नहीं था। यह भारत सरकार की एक ऐसी वैज्ञानिक पद्धति थी, जिसके तहत देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 761 जिलों को शामिल किया गया था। इस महाअभियान की जद में भारत के 21,000 से अधिक गांव आए, जहाँ स्वच्छता के स्तर को बारीकी से परखा गया। सर्वेक्षण की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई थी कि गाँवों में सतत स्वच्छ जल सुरक्षा और स्वच्छता मॉडल के परिणामों का न केवल आकलन हो, बल्कि उनका सुदृढ़ीकरण भी सुनिश्चित किया जा सके।

​मंत्रालय ने इस बार केवल शौचालय निर्माण को पैमाना नहीं बनाया, बल्कि ग्रामीण स्वच्छता की जमीनी स्थिति का गहन मूल्यांकन किया। इसमें मुख्य ध्यान ‘ओडीएफ प्लस मॉडल’ की निरंतरता पर था। इसका अर्थ यह है कि जिन गांवों ने खुले में शौच से मुक्ति पा ली है, वहां अब कचरा प्रबंधन और गंदे पानी की निकासी की क्या स्थिति है? सर्वेक्षण की टीम ने गांव-गांव जाकर मात्रात्मक (Quantitative) और गुणात्मक (Qualitative) मापदंडों की जांच की। इसमें भौतिक सत्यापन के साथ-साथ डिजिटल डेटा और फोटो-वीडियो साक्ष्यों का भी मिलान किया गया, ताकि रैंकिंग में पूरी पारदर्शिता बनी रहे। भागलपुर ने इन सभी कठिन मापदंडों पर खुद को खरा साबित किया और पूर्वी जोन के मुकुट पर चमकता हुआ सितारा बन गया।

जीत के मानक: प्लास्टिक प्रबंधन से लेकर ‘गोबर्धन’ संयंत्रों तक की कार्यक्षमता

​भागलपुर को नंबर-1 बनाने में जिन घटकों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई, वे ग्रामीण विकास के आधुनिक स्तंभ हैं। एसएसजी-2025 के दौरान केंद्रीय टीम ने ग्राम मूल्यांकन के लिए एसबीएम-जी की प्रगति के कई तकनीकी स्तरों का परीक्षण किया।

इन प्रमुख बिंदुओं पर भागलपुर रहा अव्वल:

  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयां (PWMU): जिले के विभिन्न प्रखंडों में स्थापित प्लास्टिक कचरा प्रबंधन केंद्रों की सक्रियता ने भागलपुर के स्कोर को काफी बढ़ा दिया। यहाँ केवल कचरा जमा नहीं किया जा रहा, बल्कि उसे रिसाइकिल करने और उसके प्रबंधन की एक सुचारू व्यवस्था विकसित की गई है।
  • मल कीचड़ प्रबंधन (FSM) संयंत्र: ग्रामीण क्षेत्रों में सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले कीचड़ के सुरक्षित निपटान के लिए लगाए गए एफएसएम संयंत्रों की कार्यक्षमता ने सर्वेक्षण टीम को काफी प्रभावित किया। यह सुनिश्चित किया गया कि कीचड़ को खुले में या जल स्रोतों में न बहाया जाए।
  • गोबर्धन संयंत्रों का संचालन: पशुओं के गोबर और कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा और जैविक खाद बनाने की ‘गोबर्धन’ योजना के तहत भागलपुर में लगे संयंत्र न केवल क्रियाशील पाए गए, बल्कि वे किसानों की आय और स्वच्छता में भी योगदान दे रहे हैं।
  • सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता: स्कूल, पंचायत भवन, सामुदायिक केंद्र और हाट-बाजारों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर कचरा संग्रहण और साफ-सफाई की स्थिति भागलपुर में अन्य 114 जिलों के मुकाबले काफी बेहतर पाई गई।

पूर्वी जोन की कड़ी प्रतिस्पर्धा: भागलपुर का दबदबा

​स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 के तहत पूरे भारत को कुल 07 जोन में विभाजित किया गया था। भागलपुर जिस ‘पूर्वी जोन’ का हिस्सा है, उसमें चार राज्य—बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड शामिल हैं। इन चार राज्यों में कुल 115 जिले हैं। पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों के कई जिले परंपरागत रूप से स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करते रहे हैं, लेकिन इस बार भागलपुर ने सभी समीकरणों को पलट दिया।

​115 जिलों की इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में भागलपुर का पहले स्थान पर आना यह दर्शाता है कि जिले ने न केवल बिहार के भीतर अपनी श्रेष्ठता साबित की है, बल्कि पड़ोसी राज्यों के उन जिलों को भी मात दी है जहाँ संसाधन और बुनियादी ढांचा तुलनात्मक रूप से अधिक सुदृढ़ माना जाता रहा है। भागलपुर का स्कोर कार्ड मात्रात्मक उपलब्धि (शौचालयों और संयंत्रों की संख्या) और गुणात्मक उपलब्धि (उपयोग की दर और नागरिकों की संतुष्टि) का एक संतुलित मिश्रण रहा। विशेष रूप से कचरा संग्रहण की ‘डोर-टू-डोर’ व्यवस्था जो अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रभावी हो रही है, उसने भागलपुर के पक्ष में निर्णायक भूमिका निभाई।

नागरिकों की प्रतिक्रिया और जनभागीदारी: सफलता का मुख्य सूत्र

​इस सर्वेक्षण की एक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ‘नागरिकों की प्रतिक्रिया’ (Citizen Feedback) थी। केंद्रीय टीम ने सीधे ग्रामीणों से संवाद किया और उनसे पूछा कि क्या वे अपने क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था से संतुष्ट हैं? क्या सफाई कर्मी नियमित आते हैं? और क्या कचरे का निपटान सही तरीके से हो रहा है? भागलपुर के नागरिकों ने जिस सक्रियता और सकारात्मकता के साथ अपनी प्रतिक्रिया दी, वह जिले की रैंकिंग में बड़ा ‘प्लस पॉइंट’ साबित हुआ।

​स्वच्छता अब भागलपुर के गाँवों में केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन बन चुका है। ग्रामीण इलाकों के लोगों ने स्वयं आगे बढ़कर अपने घर के पास जलजमाव रोकने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने और डस्टबिन का प्रयोग करने की आदतों को अपनाया है। सर्वेक्षण के दौरान भागलपुर के ग्रामीणों में स्वच्छता के प्रति जो जागरूकता दिखी, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि यहाँ की जनता अब स्वच्छ और स्वस्थ जीवनशैली की महत्ता को समझने लगी है। यह जनभागीदारी ही थी जिसने कठिन मापदंडों और स्थल निरीक्षणों के दौरान प्रशासन का काम आसान कर दिया।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया: उप विकास आयुक्त ने जताई प्रसन्नता

​भागलपुर की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर जिले के प्रशासनिक गलियारों में भी उत्साह का माहौल है। भागलपुर के उप विकास आयुक्त (DDC) प्रदीप सिंह ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 में पूर्वी जोन के 114 जिलों को पीछे छोड़ते हुए भागलपुर का अव्वल आना पूरे जिले के लिए हर्ष और गर्व का विषय है।

​उप विकास आयुक्त प्रदीप सिंह ने इस सफलता का श्रेय उन सभी अधिकारियों और मैदानी स्तर पर काम करने वाले स्वच्छता कर्मियों को दिया, जिन्होंने रात-दिन एक कर गांवों को ‘ओडीएफ प्लस’ की श्रेणी में लाने के लिए मेहनत की। उन्होंने कहा, “भारत सरकार के सबसे बड़े स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रथम स्थान पर रहने से संबंधित पदाधिकारियों और कर्मियों के मनोबल में जबरदस्त वृद्धि होती है। यह सफलता हमें रुकने नहीं, बल्कि आगे के कार्यों में और अधिक जोश, शक्ति और समर्पण के साथ जुटने की प्रेरणा देगी।” उन्होंने भागलपुर वासियों को बधाई देते हुए अपील की कि वे इस स्थान को बरकरार रखने के लिए अपना सहयोग जारी रखें, क्योंकि शीर्ष पर पहुँचना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन वहां टिके रहना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है।

भविष्य की राह: लक्ष्य अब राष्ट्रीय स्तर पर अव्वल रहना

​पूर्वी भारत में नंबर-1 बनने के बाद अब भागलपुर जिला प्रशासन की नजर राष्ट्रीय रैंकिंग के अगले पड़ाव पर है। एसएसजी-2025 के परिणाम यह स्पष्ट करते हैं कि भागलपुर सही दिशा में अग्रसर है। इस सफलता से जिले के स्वच्छता मिशन से जुड़े स्वच्छाग्रहियों, प्रखंड समन्वयकों और तकनीकी सहायकों को एक नई पहचान मिली है।

​आने वाले समय में प्रशासन का ध्यान उन क्षेत्रों पर होगा जहाँ अभी भी सुधार की गुंजाइश है। मल जल प्रबंधन और औद्योगिक कचरे के निपटान की नई तकनीकों को अब दूरदराज के गाँवों तक पहुँचाया जाएगा। भागलपुर की इस जीत ने बिहार सरकार के ‘सात निश्चय-2’ कार्यक्रम के तहत ‘स्वच्छ गांव-समृद्ध गांव’ के लक्ष्य को भी मजबूती दी है। पूर्वी भारत का स्वच्छता चैंपियन बनने के बाद भागलपुर अब न केवल बिहार के लिए बल्कि पूरे देश के लिए ग्रामीण स्वच्छता का एक ‘रोल मॉडल’ बनने की ओर मजबूती से कदम बढ़ा चुका है। स्वच्छता की यह चमक आने वाले वर्षों में भागलपुर के विकास और नागरिकों के स्वास्थ्य को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

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