छह साल बाद फील्ड पुलिसिंग में लौटे विकास वैभव: मगध रेंज के आईजी बनते ही दागी पुलिसवालों को चेतावनी; कहा—’एफआईआर दर्ज करने में कोताही हुई तो नपेंगे थानेदार’

गया। बिहार के चर्चित और बेहद लोकप्रिय आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ने रविवार, 10 मई 2026 को मगध रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया। गया स्थित क्षेत्रीय मुख्यालय पहुँचते ही उन्होंने अपनी कार्यशैली और प्राथमिकताओं को लेकर जो खाका पेश किया है, उसने न केवल अपराधियों बल्कि महकमे के भीतर मौजूद लापरवाह अधिकारियों की भी धड़कनें बढ़ा दी हैं। लगभग छह साल के लंबे अंतराल के बाद ‘फील्ड पुलिसिंग’ में वापसी कर रहे विकास वैभव ने स्पष्ट कर दिया है कि मगध की धरती पर अब ‘कानून का राज’ शब्दों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखेगा। पदभार संभालते ही उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता और पुलिस बल को संबोधित करते हुए एक विस्तृत ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ साझा किया। इसमें उन्होंने पुलिस की निष्पक्षता, तटस्थता और संवेदनशीलता को अपनी शीर्ष प्राथमिकता बताया है। विकास वैभव ने अपने कार्यकाल के पहले दिन ही उन पांच ‘गुनाहों’ की सूची जारी कर दी है, जिस पर उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू रहेगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि किसी थानेदार या पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध पाई गई, तो बिना किसी रियायत के सीधे निलंबन और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

पांच सूत्रीय ‘डेडलाइन’: थानेदारों के लिए सख्त हिदायत

​विकास वैभव ने अपने करियर के अनुभवों का हवाला देते हुए पुलिस व्यवस्था की उन कमजोरियों पर चोट की है, जिससे आम जनता सबसे अधिक प्रताड़ित होती है। उन्होंने पांच ऐसे बिंदुओं को रेखांकित किया है, जहाँ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

इन पांच मामलों में मिलेगी सीधी सजा:

  • एफआईआर दर्ज न करना: यदि कोई पीड़ित थाने पहुँचता है और पुलिस उसकी प्राथमिकी दर्ज करने में आनाकानी करती है या जनता को गुमराह करती है, तो संबंधित थानेदार पर गाज गिरना तय है।
  • अपराध की गंभीरता कम करना (बर्किंग): अक्सर पुलिस आंकड़ों को कम दिखाने के लिए संगीन जुर्म को छोटी धाराओं में दर्ज करती है। आईजी ने साफ कहा है कि केस के ‘मिनिमाइजेशन’ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • सूचना छिपाना: किसी भी बड़ी घटना या विकासक्रम की जानकारी तुरंत एसपी या वरीय अधिकारियों को न देना अनुशासनहीनता मानी जाएगी।
  • पुलिस द्वारा अवैध वसूली: भ्रष्टाचार और वसूली की शिकायतों पर आईजी की पैनी नजर रहेगी।
  • तटस्थता का अभाव: शिकायतों के निपटारे में किसी भी पक्ष के प्रति झुकाव या पक्षपात पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

​विकास वैभव ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इन मामलों में थानेदार (Officer-in-Charge) की संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्थापित होती है, तो संबंधित एसपी या आईजी द्वारा उन्हें तत्काल निलंबित किया जाएगा और बिना किसी देरी के विभागीय कार्यवाही शुरू की जाएगी।

अपराध नियंत्रण और सामाजिक सुरक्षा: प्राथमिकताएं तय

​मगध रेंज के नए आईजी ने केवल चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि अपराध नियंत्रण के लिए एक ठोस कार्ययोजना भी पेश की है। उन्होंने संपत्ति संबंधी अपराधों (चोरी, लूट) पर विशेष ध्यान देने और रात्रि गश्त (Night Patrolling) को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया है। बिहार में भूमि विवाद हत्याओं और हिंसक झड़पों का बड़ा कारण बनते हैं, जिसे देखते हुए उन्होंने जमीन से जुड़े विवादों में कानूनसम्मत और निष्पक्ष कार्रवाई करने की बात कही है।

​इसके अतिरिक्त, अवैध शराब के व्यापार के खिलाफ ‘स्ट्रिंजेंट एक्शन’ और सड़कों पर होने वाले अवैध जाम (Road Blockade) को लेकर उन्होंने कड़ा रुख अख्तियार किया है। आईजी ने निर्देश दिया है कि किसी भी परिस्थिति में यदि कोई सड़क जाम कर कानून हाथ में लेता है, तो उस पर अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज की जाएगी। उनका मानना है कि सड़क जाम से आम नागरिकों और आपातकालीन सेवाओं को होने वाली असुविधा को किसी भी तर्क के आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता।

कम्युनिटी पुलिसिंग: ‘प्रथम शनिवार’ को जनता से सीधा संवाद

​पुलिस और जनता के बीच की दूरी को पाटने के लिए विकास वैभव ने एक नया और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब मगध रेंज के हर थाने में ‘लोक-पुलिस संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम हर महीने के पहले शनिवार को थाने के अधिकार क्षेत्र में किसी खुले सार्वजनिक स्थान पर आयोजित होगा। यहाँ पुलिस अधिकारी स्वयं जनता के बीच बैठेंगे और उनकी समस्याओं, शिकायतों और सुझावों को सुनेंगे। इसका उद्देश्य पुलिस के प्रति जनता का विश्वास बढ़ाना और सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करना है।

​साथ ही, बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा के लिए हर थाने में एक विशेष ‘सीनियर सिटीजन सेल’ गठित करने का निर्देश दिया गया है। यह सेल नियमित रूप से क्षेत्र के वृद्ध नागरिकों के संपर्क में रहेगा और उन्हें आवश्यकतानुसार त्वरित सहायता प्रदान करेगा। विकास वैभव का मानना है कि पुलिस को समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों के प्रति अधिक कोमल और उत्तरदायी होना चाहिए।

लॉकअप का औचक निरीक्षण: अवैध हिरासत पर लगाम

​महकमे के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए आईजी स्वयं रात के अंधेरे में थानों का सरप्राइज इंस्पेक्शन (औचक निरीक्षण) करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि थानों के लॉकअप की जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वहां कोई अवैध हिरासत या प्रताड़ना तो नहीं चल रही है। उन्होंने पुलिस बल की दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने के साथ-साथ पुलिस बुनियादी ढांचे में सुधार का भी वादा किया है।

​विकास वैभव ने जहाँ एक ओर अनुशासन का हंटर चलाया है, वहीं दूसरी ओर अपने अधीनस्थों के कल्याण और प्रेरणा (Motivation) की भी बात की है। उन्होंने कहा है कि ईमानदारी से काम करने वाले पुलिसकर्मियों के पेशेवर उत्थान और मनोबल को बढ़ाने के लिए वे हमेशा तत्पर रहेंगे। उन्होंने घोषणा की है कि वे नियमित कार्यालय समय के अलावा भी जनता की समस्याओं को सुनने के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे।

गया जी की धरती से नई शुरुआत: छह साल का वनवास खत्म

​ज्ञात हो कि विकास वैभव 2020 के बाद से फील्ड पोस्टिंग से दूर सचिवालय और अन्य भूमिकाओं में थे। मगध रेंज, जिसका मुख्यालय ‘गया जी’ जैसी पवित्र और ऐतिहासिक धरती पर है, वहां उनकी वापसी को स्थानीय लोग एक नई उम्मीद के रूप में देख रहे हैं। गया, नवादा, औरंगाबाद और जहानाबाद जैसे जिलों में नक्सलवाद के अवशेषों और बढ़ते संगठित अपराध पर लगाम लगाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

​अपने संबोधन के अंत में ‘जय हिंद’ के नारे के साथ उन्होंने क्षेत्र की जनता और अपने साथी अधिकारियों से सहयोग की अपील की है। विकास वैभव की यह ‘फील्ड वापसी’ बिहार पुलिस की कार्यसंस्कृति में एक बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है, जहाँ अब तकनीक, पारदर्शिता और निष्पक्षता ही पुलिसिंग का नया पैमाना होगी। मगध की जनता को अब उस ‘प्रथम शनिवार’ का इंतजार है जब पुलिस उनके मोहल्ले में बैठकर उनके दुख-दर्द को साझा करेगी।

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