भागलपुर: “अंगिका ही अंगवासियों की मौलिक पहचान”; विश्व मातृभाषा दिवस पर विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां ‘कर्ण राष्ट्रीय सम्मान’ से सम्मानित

भागलपुर | 23 फरवरी, 2026: अपनी माटी और अपनी भाषा के सम्मान में आज भागलपुर का गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र एक ऐतिहासिक चर्चा का गवाह बना। अवसर था विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘अंग अंगिका साहित्य महोत्सव सह दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान समारोह’ का। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन युग चेतना फाउंडेशन, अंग-जन-गण, अंग मदद फाउंडेशन और अंगिका सभा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया.

अंगिका के बिना अंग प्रदेश की पीड़ा समझना असंभव: डॉ. डी.पी. सिंह

​कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और शहर के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. डी.पी. सिंह ने अंगिका की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल एक बोली नहीं, बल्कि अंगवासियों की मौलिक भाषा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा:

  • पहचान: “अंगवासियों की पीड़ा केवल अंगिकाभाषी ही समझ सकते हैं”।
  • सम्मान का मंत्र: उन्होंने अपील की कि जहाँ भी संभव हो, अपनी मातृभाषा अंगिका में ही बात करें। तभी इस भाषा को वास्तविक सम्मान मिल सकेगा।
  • कर्ण का प्रतीक: दानवीर कर्ण को ज्ञान और गौरव का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि सम्मान जाति से नहीं, गुणों से मिलता है।

अंगिका के अस्तित्व और जनगणना पर गहरी चिंता

​वरिष्ठ साहित्यकार रंजन कुमार ने एक गंभीर विषय की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने चिंता जताई कि लोग अक्सर अंगिका को अपनी मातृभाषा के रूप में दर्ज कराने में संकोच करते हैं।

  • भाषायी कोड: उन्होंने आह्वान किया कि आगामी जनगणना में अपनी मातृभाषा ‘अंगिका’ ही लिखाएं, ताकि सरकारी आंकड़ों में संख्या बढ़े और इसे आधिकारिक ‘भाषायी कोड’ मिल सके।
  • अकादमिक विकास: समाजसेवी डॉ. शंभू दयाल खेतान ने संतोष जताया कि विश्वविद्यालयों में अब अंगिका पर शोध और पढ़ाई हो रही है, जिससे इसके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद जगी है।
  • राजनीतिक अपील: प्रो. डॉ. रतन कुमार मंडल ने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे संसद और विधानसभाओं में अंगिका को संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए आवाज उठाएं।

इन्हें मिला ‘दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान’

​विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाली हस्तियों को इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। प्रमुख सम्मान पाने वालों में शामिल हैं:

  • डॉ. चैतन्य प्रकाश (रंगकर्मी)
  • सत्य नारायण मंडल (नाटककार व साहित्यकार)
  • प्रीतम विश्वकर्मा, प्रकाश चंद्र, आभा पूर्वे
  • डॉ. शोभा कुमारी, सरयुग पंडित सौम्य, अजय साहू
  • विशेष आकर्षण: कर्ण की भूमिका में आए अभिनेता राजन कुमार पूरे कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र रहे।

साहित्यिक संगम: पत्रिकाओं और पुस्तकों का लोकार्पण

​कार्यक्रम के दौरान अंगिका और गांधीवादी विचारों पर आधारित महत्वपूर्ण कृतियों का लोकार्पण किया गया:

  1. “आंगी” पत्रिका: डॉ. अमरेंद्र द्वारा संपादित।
  2. “गांधी दर्शन और विचार”: डॉ. सुधीर मंडल और डॉ. माखन प्रसाद शर्मा द्वारा लिखित।
  3. “गांधी जी का ग्राम स्वराज”: प्रदीप राय द्वारा रचित।
  4. स्मारिका: कर्ण पुरस्कार से संबंधित विशेष अंक।

काव्य रस से सजी शाम

​दूसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन में राजकुमार के संचालन में कवियों ने समां बांध दिया। मनीष कुमार गूंज, डॉ. श्वेता भारती, अभय कुमार भारती और डॉ. विकास सोलंकी सहित दर्जनों कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए अंगिका की मिठास और सामाजिक सरोकारों को मंच पर उतारा।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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