भागलपुर में ‘दी केयर ऑफ ह्यूमैनिटी’ का भव्य सम्मान समारोह: दसवीं और बारहवीं के मेधावी छात्रों को मिला पदक, SDO विकास कुमार रहे मुख्य अतिथि

भागलपुर, 18 मई 2026। बिहार के अंग प्रक्षेत्र के मुख्य शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र भागलपुर में सामाजिक चेतना और मेधा संवर्द्धन के उद्देश्य से एक अत्यंत गरिमापूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। क्षेत्र की अग्रगण्य सामाजिक संस्था “दी केयर ऑफ ह्यूमैनिटी” की ओर से शहर के एक स्थानीय विन्यास में वार्षिक मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह का आयोजन पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस विशिष्ट समारोह का मुख्य ध्येय हाल ही में घोषित हुए माध्यमिक (दसवीं) और उच्च माध्यमिक (बारहवीं) बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर जिला स्तर पर अपनी साख स्थापित करने वाले प्रतिभावान विद्यार्थियों की हौसलाअफजाई करना था।

​कार्यक्रम के दौरान सफल छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक विधा और कठिन परिश्रम के विलेख के रूप में चमचमाते मेडल, स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) और आधिकारिक प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस गौरवशाली क्षण का विधिक गवाह बनने के लिए जिले के कई आला प्रशासनिक अधिकारी, प्रबुद्ध शिक्षाविद, समाजसेवी और बड़ी संख्या में छात्र व उनके अभिभावक उपस्थित रहे। इस प्रकार के सामाजिक आयोजनों से न केवल वर्तमान पीढ़ी के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि आगामी बैचों के बच्चों को भी कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौर में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिलती है।

सदर एसडीओ विकास कुमार का प्रशासनिक संदेश और विधिक मार्गदर्शन

​सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भागलपुर के सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) विकास कुमार विधिक रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। उपस्थित मेधावी छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए सदर एसडीओ विकास कुमार ने कहा कि शिक्षा ही एकमात्र ऐसा सशक्त माध्यम है जिसके बल पर समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे वंचित व्यक्ति का भी संपूर्ण और वास्तविक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, हमारे ग्रामीण और प्रमंडलीय क्षेत्रों के बच्चे अपनी मेधा के बल पर राष्ट्रीय पटल पर भागलपुर और बिहार का नाम रोशन कर रहे हैं।

​प्रशासनिक अधिकारी ने विद्यार्थियों को करियर प्रबंधन के कड़े गुर सिखाते हुए कहा कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं जीवन की वास्तविक कड़ियों का शुरुआती मील का पत्थर मात्र हैं। असली विधा और चुनौती इसके बाद शुरू होती है, जहां आपको अपने विषय चयन और तकनीकी कौशल के विकास पर ध्यान देना होता है। उन्होंने जिला प्रशासन की ओर से शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि मेधावी बच्चों को उच्च शिक्षा या सिविल सर्विसेज की तैयारियों में यदि किसी भी प्रकार के प्रशासनिक सहयोग या पुस्तकालय जैसी विधाओं की आवश्यकता होगी, तो उनका कार्यालय हमेशा मदद के लिए तत्पर रहेगा। उन्होंने संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि नागरिक समाज और प्रशासन के ऐसे सामूहिक प्रयास ही राष्ट्र निर्माण के मुख्य स्तंभ बनते हैं।

समाजसेवी विशाल आनंद और प्रबुद्ध वक्ताओं का वैचारिक दृष्टिकोण

​कार्यक्रम की अगली कड़ियों में विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित प्रमुख समाजसेवी विशाल आनंद ने अपने विचार साझा करते हुए संस्था “दी केयर ऑफ ह्यूमैनिटी” के मूल दर्शन को रेखांकित किया। समाजसेवी विशाल आनंद ने स्पष्ट किया कि उनकी संस्था का मुख्य उद्देश्य केवल शैक्षणिक रूप से समृद्ध बच्चों को सम्मानित करना नहीं है, बल्कि सुदूर देहातों और आर्थिक रूप से विपन्न परिवारों से आने वाले उन बच्चों की प्रतिभा को निखारना है, जो विपरीत परिस्थितियों के बीच भी हार नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज के प्रबुद्ध लोग इन बच्चों की पीठ थपथपाते हैं, तो उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर ये बच्चे न केवल अपने परिवार की आर्थिक विसंगतियों को दूर कर सकते हैं, बल्कि संपूर्ण समाज और भागलपुर जिले का नाम पूरे देश में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं।

​सम्मान समारोह के मंच को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि डा रूबी हेमरम ने महिला शिक्षा और जनजातीय क्षेत्रों में मेधा संवर्द्धन के विषय पर अपनी गहरी विधिक और सामाजिक राय रखी। डा रूबी हेमरम ने कहा कि आज की इस सम्मान सूची में बालिकाओं की एक बहुत बड़ी संख्या यह प्रमाणित करती है कि बेटियां अब किसी भी प्रक्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा की विधा से कभी दूर न करें, क्योंकि एक शिक्षित महिला पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों को संस्कारित करती है।

​इसी क्रम में स्वास्थ्य और शिक्षा के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए डा इमराना रहमान ने विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव (एग्जाम स्ट्रेस) से मुक्त रहने के वैज्ञानिक तरीके बताए। डा इमराना रहमान ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ बच्चों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी उतना ही अनिवार्य है, इसलिए खेलकूद और संतुलित जीवन शैली को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

पदक वितरण की विधा और मेधावियों व अभिभावकों का भावनात्मक विलास

​समारोह के मुख्य और अंतिम विलेख के तहत जब मंच से एक-एक कर दसवीं और बारहवीं के टॉपर छात्र-छात्राओं के नामों की आधिकारिक उद्घोषणा शुरू हुई, तो पूरा प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मुख्य अतिथि सदर एसडीओ विकास कुमार, समाजसेवी विशाल आनंद, डा रूबी हेमरम, मोहम्मद जीशान खान और डा इमराना रहमान ने संयुक्त रूप से सभी सफल विद्यार्थियों को मंच पर बुलाकर उनके गले में मेडल पहनाए और उन्हें सुंदर मोमेंटो व विधिक प्रशस्ति पत्र हस्तगत कराए।

​सम्मान पाकर छात्र-छात्राओं के चेहरे पर एक असीम आनंद और गौरव की अनुभूति साफ तौर पर देखने को मिली। कई छात्र जो ग्रामीण परिवेश से आकर भागलपुर शहर में रहकर कड़ा संघर्ष कर रहे थे, वे इस राजकीय और सामाजिक सम्मान को पाकर अत्यंत भावुक नजर आए।

​इस दौरान दर्शकों की दीर्घा में बैठे अभिभावकों की आंखों में भी अपने बच्चों की इस ऐतिहासिक सफलता को देखकर खुशी के आंसू छलक आए। अभिभावकों ने सामूहिक रूप से सामाजिक संस्था “दी केयर ऑफ ह्यूमैनिटी” के इस विधा की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि एक मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार के लिए उसके बच्चे का इस तरह के बड़े मंच पर जिला स्तर के आला अधिकारियों के हाथों सम्मानित होना किसी बड़े सपने के सच होने जैसा है। यह सम्मान न केवल उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक मजबूत प्रेरणादायक संबल साबित होगा, बल्कि पड़ोस के अन्य बच्चों के भीतर भी पढ़ाई के प्रति एक नया और सकारात्मक विभाव पैदा करेगा।

प्रतिभा संवर्द्धन और सामाजिक दायित्वों की सांगठनिक भूमिका

​कार्यक्रम के अंतिम चरण में संस्था के मुख्य समन्वयक मोहम्मद जीशान खान ने सभी उपस्थित अतिथियों, प्रशासनिक पदाधिकारियों, मीडिया कर्मियों और अभिभावकों के प्रति अपना विधिक आभार और धन्यवाद ज्ञापित किया। मोहम्मद जीशान खान ने बताया कि “दी केयर ऑफ ह्यूमैनिटी” आने वाले दिनों में भागलपुर जिले के विभिन्न प्रखंडों में निशुल्क करियर काउंसलिंग कैंपों का आयोजन करने जा रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को बारहवीं के बाद विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और तकनीकी शिक्षा के विभावों की सही व समयबद्ध जानकारी मिल सके।

​उन्होंने कहा कि मेधा किसी की जागीर नहीं होती और सही समय पर मिला उचित मार्गदर्शन किसी भी साधारण बच्चे को एक असाधारण नागरिक में तब्दील कर सकता है। कार्यक्रम के सफल संचालन में संस्था के दर्जनों वालंटियरों और तकनीकी सहायकों की मुख्य भूमिका रही, जिन्होंने पूरी व्यवस्था को कड़ाई और अनुशासन के साथ संधारित किया। इस सफल आयोजन के बाद भागलपुर के शैक्षणिक गलियारों में इस सम्मान समारोह की गूंज और इसके सकारात्मक प्रभावों की व्यापक चर्चा की जा रही है।

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