भागलपुर में लोन ठगी के आरोपी की सरेआम चप्पलों से पिटाई, बीच सड़क पर आधे घंटे तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा, दोनों पक्षों पर केस दर्ज

भागलपुर, 18 मई 2026। बिहार के भागलपुर जिले में वित्तीय धोखाधड़ी और उसके प्रतिशोध में कानून को हाथ में लेने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। शहर के व्यस्ततम जोगसर थाना क्षेत्र अंतर्गत मोक्षदा स्कूल के समीप लोन दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने के आरोपी एक युवक की पीड़ित महिला और उसके बेटों द्वारा बीच सड़क पर सरेआम बेरहमी से पिटाई कर दी गई। वित्तीय विसंगतियों और आर्थिक नुकसान से उपजे इस आक्रोश के कारण करीब आधे घंटे तक मुख्य सड़क पर हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा, जिससे पूरे प्रक्षेत्र में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई और राहगीरों के बीच अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया।

​घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कानून को ताक पर रखकर महिला ने चप्पलों और हेलमेट से युवक पर अंधाधुंध प्रहार किए, जबकि उसके बेटों ने लात-घूंसों की बौछार कर उसे लहुलूहान कर अधमरा कर दिया। सूचना मिलने पर पहुंची जोगसर थाना पुलिस ने बीच-बचाव करते हुए जख्मी युवक को भीड़ के चंगुल से मुक्त कराया और हिंसक झड़प में शामिल महिला व उसके बेटों को विधिक रूप से हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों की लिखित शिकायतों के आधार पर काउंटर प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें एक तरफ लोन ठगी का संगीन मामला दर्ज हुआ है, वहीं दूसरी तरफ सरेआम मारपीट करने के आरोप में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एससी-एसटी एक्ट के तहत कड़ी विधिक कार्रवाई शुरू की गई है।

लोन पास कराने के नाम पर तीन लाख रुपये के गबन का विधिक आरोप

​इस पूरे हिंसक घटनाक्रम की पटकथा वित्तीय साख और दलाली के उस मकड़जाल से जुड़ी है, जिसमें अक्सर आम नागरिक अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं। जोगसर पुलिस को दिए गए अपने विधिक आवेदन में पीड़ित महिला प्रियंका देवी ने आरोप लगाया है कि आरोपी मुकेश ने उसे विभिन्न वित्तीय संस्थानों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से एक बड़ा व्यावसायिक लोन बेहद कम ब्याज दरों पर पास कराने का प्रलोभन दिया था। मुकेश ने प्रियंका देवी को विश्वास में लेने के लिए कतिपय कागजी कड़ियों और विलेखों का सहारा लिया, जिसके जाल में फंसकर महिला ने विभिन्न किश्तों में कुल तीन लाख रुपये की भारी-भरकम राशि मुकेश को नकद और डिजिटल माध्यमों से सौंप दी।

​पैसे प्राप्त कर लेने के बाद मुकेश के आचरण में अचानक बदलाव आ गया। कई सप्ताह और महीने बीत जाने के बाद भी जब प्रियंका देवी का लोन स्वीकृत नहीं हुआ, तो उसने अपने तीन लाख रुपये वापस मांगने की विधा शुरू की। आरोप है कि मुकेश लगातार बहानेबाजी करता रहा और पैसे लौटाने की तारीखें बदलता रहा। अंततः जब प्रियंका देवी को यह पूरी तरह आभास हो गया कि वह एक सुनियोजित वित्तीय ठगी का शिकार हो चुकी है और उसके तीन लाख रुपये डूबने की कगार पर हैं, तो उसका धैर्य पूरी तरह से जवाब दे गया। उसने विधिक अधिकारियों के पास जाने के बजाय सीधे तौर पर मुकेश से अपनी वित्तीय राशि वसूलने की एक आक्रामक और निजी योजना तैयार कर ली।

मोक्षदा स्कूल के पास जाल बिछाकर बुलाया, हेलमेट और चप्पलों से किया क्रूर प्रहार

​रुपये वापस न होने से अत्यधिक आक्रोशित प्रियंका देवी ने अपने बेटों के साथ मिलकर मुकेश को पकड़ने के लिए एक गुप्त जाल बिछाया। रणनीति के तहत महिला ने मुकेश को फोन कर पैसों के अंतिम निपटारे और एक समझौते के विलेख पर बात करने के उद्देश्य से जोगसर थाना क्षेत्र के मोक्षदा स्कूल के समीप स्थित चौराहे पर बुलाया। मुकेश बिना किसी सुरक्षात्मक पूर्वाभास के नियत समय पर वहां पहुंच गया। जैसे ही मुकेश चौराहे के पास आकर खड़ा हुआ, पहले से पूरी कड़ाई के साथ घात लगाकर बैठे प्रियंका देवी और उसके बेटों ने उसे चारों तरफ से विधिक रूप से घेर लिया।

​पैसों की मांग को लेकर शुरू हुई तीखी वैचारिक बहस देखते ही देखते हिंसक झड़प में तब्दील हो गई। प्रियंका देवी ने आव देखा न ताव, अपनी चप्पल निकाली और मुकेश के चेहरे व सिर पर ताबड़तोड़ प्रहार करना शुरू कर दिया। मां को हमलावर होते देख उसके बेटों ने भी मुकेश को जमीन पर गिरा दिया और लात-घूंसों से उसकी बेरहमी से पिटाई प्रारंभ कर दी। इस दौरान सड़क किनारे रखे एक भारी मोटरसाइकिल हेलमेट से भी मुकेश के सिर पर कड़े प्रहार किए गए, जिससे उसके शरीर से खून बहने लगा। बीच सड़क पर लगभग आधे घंटे तक यह हाई-वोल्टेज हिंसक तमाशा चलता रहा। इस दौरान व्यस्ततम मार्ग पर सैकड़ों लोग मूकदर्शक बने खड़े रहे, कई लोग अपने मोबाइल कैमरों से इस हिंसक कृत्य का वीडियो रिकॉर्ड करते रहे, परंतु सामाजिक उदासीनता के कारण भीड़ में मौजूद किसी भी व्यक्ति ने आगे बढ़कर कानून को हाथ में ले रहे मां-बेटों को रोकने या घायल युवक के बचाव की न्यूनतम कोशिश भी नहीं की।

जोगसर पुलिस की त्वरित दबिश, जख्मी युवक और हमलावर हिरासत में

​सड़क पर जारी इस भयंकर मारपीट और यातायात जाम की गुप्त सूचना किसी स्थानीय नागरिक द्वारा जोगसर थाना पुलिस के आधिकारिक नंबर पर फ्लैश की गई। मामले की संवेदनशीलता और वीआईपी रूट से जुड़े होने के कारण जोगसर थाना प्रभारी तुरंत पुलिस बल के जवानों और गश्ती वाहनों के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सबसे पहले आक्रोशित मां-बेटों के चंगुल से बुरी तरह जख्मी और कराह रहे मुकेश को विधिक रूप से रेस्क्यू (मुक्त) कराया।

​पुलिस टीम ने घटना स्थल की कड़ियों को सुरक्षित करते हुए हमलावर महिला प्रियंका देवी और उसके बेटों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया और सभी को सुरक्षात्मक घेरे में लेकर जोगसर थाने आ गई। मुकेश की शारीरिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक और लहुलूहान थी, जिसे देखते हुए पुलिस ने प्राथमिक विधिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे तुरंत चिकित्सीय जांच और इलाज के लिए नजदीकी सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भेजा, जहां डॉक्टरों द्वारा उसके सिर के जख्मों पर टांके लगाए गए और प्राथमिक उपचार की प्रविधि पूरी की गई।

काउंटर केस की विधिक कड़ियां: मां-बेटों समेत चार पर एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी

​थाने के भीतर इस पूरे विवाद ने एक नया और अत्यंत जटिल कानूनी मोड़ ले लिया जब अस्पताल से उपचार कराकर लौटे मुकेश ने अपने विधिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए हमलावरों के खिलाफ काउंटर केस दर्ज कराया। मुकेश ने पुलिस के समक्ष दिए गए अपने आधिकारिक बयान में आरोप लगाया है कि प्रियंका देवी और उसके बेटों ने न केवल उसके साथ जानलेवा मारपीट की और सार्वजनिक रूप से उसकी सामाजिक अस्मत को ठेस पहुंचाई, बल्कि जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उसे अपमानित और प्रताड़ित भी किया।

मुकेश के विधिक आवेदन पर दर्ज मामले का विवरण:

  • नामजद अभियुक्त: प्रियंका देवी, उनके दो बेटे सहित कुल चार व्यक्ति।
  • मुख्य विधिक धाराएं: भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत मारपीट, बलवा और जान से मारने की धमकी की धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC-ST Act) की संगीन धाराएं।

​दूसरी ओर, प्रियंका देवी के लिखित आवेदन को भी पुलिस ने नियमित विलेखों में शामिल करते हुए मुकेश के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और लोन दिलाने के नाम पर तीन लाख रुपये की जालसाजी करने के आरोपों के तहत एक पृथक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।

​जोगसर थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की प्राथमिकियों को दर्ज कर मामले की उच्चस्तरीय वैज्ञानिक और तकनीकी जांच शुरू कर दी है। पुलिस की एक विशेष टीम मोक्षदा स्कूल के पास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मारपीट के वीडियो विजुअल्स को साक्ष्य के रूप में संकलित कर रही है ताकि सरेआम हिंसा करने वाले चेहरों की पहचान विधिक रूप से पुख्ता की जा सके। थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया है कि लोन ठगी का मामला अपनी जगह वैधानिक जांच के दायरे में है, परंतु किसी भी नागरिक को सड़कों पर कानून अपने हाथ में लेकर सरेआम अदालत लगाने और हिंसा करने की विधिक अनुमति नहीं दी जा सकती। पुलिस जल्द ही जांच प्रतिवेदन तैयार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

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