मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अपराधियों और सुस्त अफसरों को खुली चेतावनी: पुलिस को दी पूरी छूट, काम न करने वाले अधिकारी होंगे सस्पेंड

पटना, 18 मई 2026। बिहार की प्रशासनिक और विधिक व्यवस्था को पूरी तरह से चुस्त-दुरुस्त करने और राज्य के भीतर कानून का इकबाल कड़ाई से बहाल करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बेहद आक्रामक और रणनीतिक विन्यास अख्तियार कर लिया है। सोमवार को राजधानी पटना में आयोजित एक राजकीय विलेख के दौरान मुख्यमंत्री ने आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस 80 हाई-टेक फायर ब्रिगेड (अग्निशमन) गाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर विभिन्न प्रक्षेत्रों के लिए रवाना किया। इस बड़े उद्घाटन समारोह के मुख्य मंच से अधिकारियों और राज्य की जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कानून-व्यवस्था और नौकरशाही की कार्यशैली को लेकर कई कड़े और नीतिगत एलान किए।

​उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के दोटूक शब्दों में स्पष्ट किया कि सूबे के भीतर सुशासन की प्रविधि को संधारित करने के लिए पुलिस बल और विधिक एजेंसियों को अपराधियों के खिलाफ पूरी छूट (फ्री हैंड) दे दी गई है। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा और व्यावसायिक साख से खिलवाड़ करने वाले किसी भी कुख्यात तत्व को बख्शा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध दंडात्मक विलेखों के तहत कड़ी पुलिसिया कार्रवाई आगे भी इसी तरह निरंतर जारी रहेगी।

सीवान से पटना तक पुलिस मुठभेड़ों का विलेख और सुशासन का विन्यास

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस कड़े नीतिगत बयान के समानांतर यदि राज्य की कानून-व्यवस्था के हालिया परिदृश्य को देखा जाए, तो पुलिस प्रशासन अपराधियों को उनके वास्तविक विधिक अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूरी मुस्तैदी से धरातल पर काम कर रहा है। पिछले 24 घंटों के भीतर सूबे के दो अलग-अलग भौगोलिक प्रक्षेत्रों में कुख्यात अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ एनकाउंटर (पुलिस मुठभेड़) की प्रणालियां दर्ज की गई हैं। रविवार की देर रात सीवान जिले के सिसवन थाना क्षेत्र में 40 लाख रुपये की बड़ी स्वर्ण डकैती के मुख्य आरोपी अंकित कुमार सिंह को पुलिस की विशेष टीम ने आत्मरक्षार्थ की गई फायरिंग में दोनों घुटनों में गोली मारकर विधिक रूप से दबोच लिया था।

​इसके ठीक बाद, सोमवार की अहले सुबह राजधानी पटना के ट्रांसपोर्ट नगर प्रक्षेत्र के भगवत नगर में एक और बड़ी पुलिस मुठभेड़ दर्ज की गई, जिसमें बीते 13 मई को एक सम्मानित शिक्षक शंभू कुमार पर दिन-दहाड़े जानलेवा गोली चलाने वाले कुख्यात शूटर और लुटेरे संदीप उर्फ बादल के पैर में पुलिस की सटीक गोली लगी और वह अपनी मोटरसाइकिल व हथियारों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।

​इन दोनों ही हाई-प्रोफाइल एनकाउंटरों को मुख्यमंत्री ने पुलिस के बढ़े हुए मनोबल और प्रशासनिक स्वतंत्रता के प्रत्यक्ष साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने मंच से कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि बिहार के भीतर सुशासन का राज पूरी कड़ाई के साथ संधारित रहेगा और किसी भी बाहुबली, लुटेरे या असामाजिक तत्व को कानून को अपने हाथ में लेने की न्यूनतम विधिक अनुमति नहीं दी जा सकती। अगर कोई भी अपराधी विधिक सीमाओं को लांघकर लोक सेवकों या आम जनता पर गोलियां चलाएगा, तो पुलिस बल के हाथ पूरी तरह से खुले हुए हैं और उन्हें उसी की भाषा में करारा जवाब देने की पूरी छूट शासन की ओर से दी गई है।

सुस्त नौकरशाही के खिलाफ तीन नोटिसों का कड़ा चक्रव्यूह और तत्काल निलंबन

​अपराधियों के दमन के समानांतर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का दूसरा सबसे बड़ा और कड़क प्रशासनिक प्रहार राज्य की सुस्त और लापरवाह नौकरशाही पर हुआ है। सरकारी दफ्तरों में आम जनता की फाइलों को बेवजह अटकाने, विकास योजनाओं की प्रविष्टि में देरी करने और शासकीय विलेखों की उपेक्षा करने वाले अधिकारियों को पूरी तरह से टाइट करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक अभूतपूर्व समयबद्ध नोटिस प्रणाली का एलान किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ किया कि अब राज्य के भीतर किसी भी स्तर के अधिकारी की सांगठनिक लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी विभाग या जिला स्तर पर सरकारी योजनाओं में शिथिलता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से विधिक हंटर चलना तय है।

​मुख्यमंत्री ने इस विधा के तहत कड़े नियमों की घोषणा करते हुए कहा कि यदि किसी कार्य या विलेख में अकर्मण्यता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी को पहला प्रशासनिक नोटिस ठीक 10 दिनों की समय-सीमा के भीतर प्रेषित कर दिया जाएगा। इस शुरुआती चेतावनी के बाद भी यदि अधिकारी के आचरण और कार्य की भौतिक प्रगति में कोई सुधार दर्ज नहीं होता है, तो उन्हें दूसरा कारण बताओ नोटिस ठीक 20 दिनों के अंतराल पर थमाया जाएगा। इसके बाद, अंतिम चेतावनी के रूप में तीसरा और निर्णायक नोटिस 25वें दिन अधिकारी के पटल पर पहुंच जाएगा।

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि इन तीन कड़े नोटिसों की विधिक अवधि बीत जाने के बाद भी संबंधित अधिकारी द्वारा कार्य को पूरा नहीं किया जाता है या उसकी लापरवाही बरकरार रहती है, तो मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा बिना किसी व्यावहारिक पैरवी या रियायत के उन्हें सीधे पद से निलंबित (सस्पेंड) करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया जाएगा।

‘सहयोग पोर्टल’ पर दर्ज शिकायतों का 30 दिनों में पूर्ण निष्पादन और सेवा समाप्ति

​जनता की समस्याओं के समाधान में पारदर्शिता और गति लाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने अपने महत्वाकांक्षी डिजिटल सर्विलांस विन्यास ‘सहयोग पोर्टल’ की कार्यप्रणाली को लेकर भी अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पोर्टल केवल आंकड़ों के प्रदर्शन के लिए नहीं है, बल्कि यह आम जनता के विधिक अधिकारों की रक्षा का एक मुख्य प्रशासनिक हथियार है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कड़े विलेख जारी करते हुए कहा कि सहयोग पोर्टल पर राज्य के किसी भी नागरिक द्वारा दर्ज की जाने वाली प्रत्येक वैधानिक शिकायत या जन-विलाप का पूर्ण और संतोषजनक निपटारा संबंधित विभाग को हर हाल में अधिकतम 30 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित करना होगा।

मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी कड़ा विधिक निर्देश:

“सहयोग पोर्टल पर दर्ज हर एक जन-शिकायत का निपटारा 30 दिनों के भीतर धरातल पर दिखना चाहिए। तय समय के बाद लंबित रहने वाली फाइलों के लिए सीधे तौर पर पटल सहायक और विभाग के मुख्य प्रभारी जिम्मेदार होंगे। लापरवाही की विसंगति पाए जाने पर पहले निलंबन और यदि आवश्यक हुआ तो सेवा समाप्ति तक का विलेख तैयार किया जाएगा।”

 

​अगर किसी शिकायत का समाधान तय 30 दिनों के भीतर धरातल पर नहीं होता है, तो उस विसंगति के लिए सीधे तौर पर उस पटल से जुड़े कर्मचारी, लिपिक और प्रभारी अधिकारी को विधिक रूप से उत्तरदायी माना जाएगा। सरकार ने यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि जनसमस्याओं को लेकर दिखाई जाने वाली किसी भी प्रकार की मानवीय या तकनीकी लापरवाही मिलने पर शुरुआत में निलंबन की दंडात्मक कार्रवाई होगी और यदि लापरवाही का विलेख अत्यधिक गंभीर पाया गया, तो संबंधित कर्मचारी की सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) तक की विधिक कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है। इस संपूर्ण शिकायत निवारण और फाइल ट्रैकिंग व्यवस्था की चौबीसों घंटे लाइव मॉनिटरिंग और डिजिटल सर्विलांस खुद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशकों द्वारा की जाएगी ताकि आम जनता को न्याय पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने से विधिक मुक्ति मिल सके।

अग्निशमन इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण और नागरिक सुरक्षा का नया विन्यास

​सोमवार को मुख्यमंत्री ने जिन 80 अत्याधुनिक हाई-टेक अग्निशमन (फायर ब्रिगेड) गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई, वे राज्य के विभिन्न शहरी और ग्रामीण प्रक्षेत्रों में आगजनी की आपातकालीन विभीषिकाओं से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकी विन्यासों से लैस हैं। ग्रीष्म ऋतु के इस प्रचंड दौर में जब सुदूर देहातों में फसलों और रिहायशी संपत्तियों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, तब इन वाहनों का जिला स्तर पर प्रतिनियोजन एक बड़ा सुरक्षात्मक संबल साबित होगा।

​इसी विकासात्मक मंच का उपयोग करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता को यह भरोसा दिलाया कि सुशासन का मतलब केवल भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास नहीं है, बल्कि अपराधियों के भीतर कानून का भय पैदा करना और सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता बहाल करना भी इसका मुख्य अंग है। नौकरशाही की प्रवृत्तियों में बदलाव लाने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा तैयार किया गया यह नया तीन-स्तरीय नोटिस सिस्टम बिहार के प्रशासनिक इतिहास में एक अत्यंत कड़ा और अनूठा कदम माना जा रहा है। आमतौर पर विभागीय जांचों और फाइलों के विलेखों में महीनों का समय बीत जाता है, जिससे आम फरियादी मानसिक अवसाद का शिकार होते हैं। इस विसंगति को पूरी तरह से ब्लॉक करने के लिए 10, 20 और 25 दिनों की यह कड़क समय-सारणी बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जो अधिकारी जनता की सेवा के विलेखों को समय पर संधारित नहीं कर सकते, उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर बने रहने का कोई विधिक अधिकार नहीं है।

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