
भागलपुर/सुल्तानगंज। भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में हुई खूनी वारदात ने केवल एक अधिकारी को नहीं छीना है, बल्कि बिहार ने एक ऐसे जांबाज लाल को खो दिया है जिसने गोलियों के सामने झुकने के बजाय सीना तानकर खड़ा होना बेहतर समझा। कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्ण भूषण कुमार की शहादत की कहानी अब हर जुबान पर है। सीसीटीवी फुटेज में कैद उनकी बहादुरी के अंतिम लम्हे यह गवाही दे रहे हैं कि वे केवल फाइलों के अफसर नहीं थे, बल्कि एक सच्चे योद्धा थे। बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को जब उनका पार्थिव शरीर पोस्टमार्टम के बाद अंतिम विदाई के लिए तैयार हुआ, तो सुल्तानगंज से लेकर मधुबनी तक हर आंख नम थी। अस्पताल परिसर में उमड़ी हजारों की भीड़ उनकी लोकप्रियता और उनके प्रति सम्मान का जीता-जागता सबूत थी।
जांबाजी के अंतिम पल: जब निहत्थे ही ‘काल’ से भिड़ गए कृष्ण भूषण
सीसीटीवी फुटेज में जो दृश्य सामने आया है, उसने हर किसी को झकझोर दिया है। जब तीन हथियारबंद नकाबपोश अपराधियों ने सभापति राज कुमार गुड्डू पर हमला किया, तो कृष्ण भूषण कुमार सुरक्षित स्थान की ओर भाग सकते थे या छिप सकते थे, लेकिन उन्होंने ‘कर्तव्य’ और ‘साथी’ को चुना।
- निहत्था मुकाबला: फुटेज में स्पष्ट दिख रहा है कि गोली चलते ही ईओ कृष्ण भूषण डरे नहीं, बल्कि अपराधियों से भिड़ गए。
- बहादुरी का परिचय: वे कभी एक हमलावर को रोकने की कोशिश करते तो कभी दूसरे का विरोध करते दिखे। उन्होंने निहत्थे होकर भी अपराधियों के हाथ से हथियार छीनने का प्रयास किया।
- अंतिम बलिदान: इसी छीना-झपटी और अपराधियों को दबोचने की कोशिश के दौरान एक शूटर ने उन पर बेहद करीब से गोली चला दी, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई。
अधूरा रह गया संसार: पीछे छोड़ गए मासूमों की फौज
कृष्ण भूषण कुमार अपने पीछे एक हंसता-खेलता लेकिन अब पूरी तरह उजड़ा हुआ परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन की खबर ने उनके घर-आंगन की खुशियां छीन ली हैं।
- मासूम बच्चे: वे अपने पीछे एक 3 साल का बेटा और महज 1 साल की मासूम बेटी छोड़ गए हैं。 इन मासूम बच्चों को शायद अभी यह अहसास भी नहीं है कि उनके पिता, जो उनके ‘सुपरहीरो’ थे, अब इस दुनिया में नहीं रहे।
- पत्नी: घटना के समय उनकी पत्नी बच्चों के साथ अपने मायके मोतिहारी में थीं。 जैसे ही उन्हें इस अनहोनी की सूचना मिली, वे बदहवास होकर भागलपुर के लिए रवाना हुईं।
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: वे मूल रूप से मधुबनी के निवासी थे और चार भाइयों में दूसरे स्थान पर थे। उनके बड़े भाई भारतीय नौसेना (Indian Navy) में सेवारत हैं, जबकि अन्य भाई शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं。 दुखद यह है कि उनके माता-पिता का साया पहले ही उनके सिर से उठ चुका था।
पढ़ाई में अव्वल, इंजीनियरिंग से BPSC तक का सफर
कृष्ण भूषण कुमार की मेधा की चर्चा केवल उनके प्रशासनिक कार्यों में नहीं, बल्कि उनके शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड में भी मिलती है। वे शुरू से ही मेधावी छात्र रहे थे।
- इंजीनियरिंग: उन्होंने प्रतिष्ठित संस्थान BIT सिंदरी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी。
- BPSC में परचम: उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रशासनिक सेवा में अपनी जगह बनाई थी。
- UGC NET: शैक्षणिक जगत में उनकी रुचि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2018 में उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ UGC NET की परीक्षा भी पास की थी。
दोषियों को सजा दिलाने की उठी मांग: आक्रोश में आम और खास
इस जघन्य हत्याकांड पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। भागलपुर के प्रबुद्ध नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
- डॉ. चक्रपाणि हिमांशु (पूर्व अध्यक्ष, बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग): उन्होंने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अब सरकारी अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं。
- विधायक ललित नारायण मंडल: सुल्तानगंज के स्थानीय विधायक ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि वे इस मामले को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई और साक्ष्य जुटाकर स्पीडी ट्रायल की मांग की है。
वॉयस ऑफ बिहार (VOB) का दृष्टिकोण
कृष्ण भूषण कुमार की शहादत ने यह साबित कर दिया है कि बिहार की प्रशासनिक सेवा में आज भी ऐसे जांबाज अधिकारी मौजूद हैं जो अपनी जान की परवाह किए बिना समाज के दुश्मनों से लोहा लेने का साहस रखते हैं। एक इंजीनियर, एक सफल बीपीएससी अधिकारी और उससे भी बढ़कर एक बहादुर इंसान का इस तरह जाना पूरे प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है। वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और मांग करता है कि जांबाज ईओ के बलिदान को न्याय के जरिए सम्मानित किया जाए।
वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की विशेष भावभीनी रिपोर्ट।


