भागलपुर में दहेज की भेंट चढ़ती उम्मीदें: विवाहिता फरहा खातून संदिग्ध हालात में लापता; पिता ने पति और ससुराल वालों पर लगाया गंभीर आरोप

भागलपुर। जिले के सबौर थाना क्षेत्र से एक ऐसी मार्मिक और विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने एक बार फिर समाज में गहरे तक पैठ बना चुकी दहेज जैसी कुप्रथा और पुलिसिया कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहाँ सरकार और प्रशासन महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं दूसरी ओर भागलपुर की एक बेटी, फरहा खातून, पिछले कई दिनों से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता है। इस मामले में पीड़िता के पिता नासिर खान ने अपनी पुत्री की जान को खतरा बताते हुए ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न और प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला केवल एक विवाहिता के लापता होने का नहीं है, बल्कि यह एक पिता के संघर्ष और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ उसकी बेबसी की दास्तां भी है। नासिर खान का आरोप है कि पुलिस का सहयोग मिलना तो दूर, उन्हें थाने से डरा-धमका कर भगा दिया गया। अब पूरा परिवार किसी अनहोनी की आशंका में जी रहा है और इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।

2019 का वह निकाह और बदलता ससुराल का रंग

​इस दर्दनाक दास्तां की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी, जब नासिर खान ने अपनी बेटी फरहा खातून की शादी सनोखर थाना क्षेत्र के वंशीटिकर निवासी अनवर के पुत्र मुन्ना के साथ बड़े अरमानों के साथ की थी। निकाह पूरी तरह से मुस्लिम रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ था और पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दहेज भी दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि उनकी बेटी एक खुशहाल वैवाहिक जीवन बिताएगी, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल वालों का असली चेहरा सामने आने लगा।

​परिजनों का आरोप है कि शादी के कुछ ही महीनों बाद से मुन्ना और उसके परिवार वालों ने फरहा पर अतिरिक्त दहेज का दबाव बनाना शुरू कर दिया। मांग दो लाख रुपये नकद की थी। जब फरहा के गरीब पिता यह भारी-भरकम राशि देने में असमर्थता जताने लगे, तो फरहा का जीवन नर्क बना दिया गया। उसे न केवल शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि मानसिक रूप से भी इतना तोड़ दिया गया कि वह अपने ही घर में बेगानी हो गई। मारपीट और गाली-गलौज फरहा की नियति बन गई थी, जिसे वह अपने बच्चों के भविष्य की खातिर खामोशी से सहती रही।

7 अप्रैल का वह क्रूर फैसला: बच्चों से किया गया अलग

​नासिर खान ने अपने आवेदन में जो विवरण दिया है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। उनके अनुसार, उत्पीड़न की पराकाष्ठा 7 अप्रैल 2026 को तब पार हो गई, जब ससुराल वालों ने फरहा को उसके मासूम बच्चों से जबरन अलग कर दिया। एक मां के लिए उसके बच्चों से दूर होना सबसे बड़ी सजा होती है, और मुन्ना व उसके परिजनों ने यही किया। फरहा को अपमानित कर घर से बाहर निकाल दिया गया।

​इस घटना के बाद फरहा कहाँ गई और किस हाल में रही, इसका कोई सुराग नहीं मिला। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ससुराल पक्ष ने कई दिनों तक इस बात को छिपाए रखा। 15 अप्रैल 2026 को अचानक मुन्ना ने नासिर खान को फोन कर सूचना दी कि उनकी पत्नी यानी फरहा कहीं चली गई है और घर पर नहीं है। यह सुनकर पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। वे तुरंत अपनी बेटी की ससुराल पहुँचे, लेकिन वहां सहयोग के बजाय उन्हें अपमान और हिंसा का सामना करना पड़ा। नासिर खान का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी बेटी के बारे में पूछताछ की, तो ससुराल वालों ने उनके साथ गाली-गलौज की और मारपीट कर उन्हें वहां से भगा दिया।

पुलिसिया उदासीनता: जब रक्षक ही बन जाएं भक्षक

​इस पूरे मामले का सबसे दुखद पहलू सबौर पुलिस की कार्यशैली से जुड़ा है। पीड़ित पिता नासिर खान का कहना है कि जब वे अपनी बेटी की तलाश और न्याय की गुहार लेकर सबौर थाना पहुँचे, तो वहां मौजूद पुलिस कर्मियों का व्यवहार अत्यंत संदेहास्पद और संवेदनहीन था। आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करने या मामला दर्ज करने के बजाय उन्हें ही डराया और धमकाया।

​नासिर खान ने मर्माहत होकर बताया कि उन्हें थाने से यह कहकर भगा दिया गया कि वे यहाँ परेशान न करें। एक पिता, जिसकी जवान बेटी लापता है और जिसके साथ अनहोनी की पूरी आशंका है, उसे पुलिस द्वारा इस तरह दुत्कारना बिहार के ‘सुशासन’ के दावों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। पुलिस का यह रवैया न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी हत्या है। अगर पुलिस समय रहते सक्रिय होती और ससुराल वालों पर दबाव बनाती, तो शायद अब तक फरहा का सुराग मिल गया होता। पुलिस की इस खामोशी और टालमटोल ने अपराधियों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं।

अनहोनी की आशंका और न्याय की पुकार

​वर्तमान में फरहा खातून का कोई पता नहीं है। पिता नासिर खान को यह डर सता रहा है कि दहेज की मांग पूरी न होने के कारण उनकी बेटी के साथ कोई बड़ी अनहोनी कर दी गई है। ससुराल वालों का फरहा को घर से निकालना और फिर कई दिनों बाद उसके लापता होने की सूचना देना, इस पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बनाता है। परिवार का कहना है कि अगर वह अपनी मर्जी से गई होती, तो वह अपने बच्चों को कभी छोड़कर नहीं जाती।

​नासिर खान ने भागलपुर के वरीय पुलिस अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने मुन्ना, अनवर और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और अपनी बेटी को जल्द से जल्द बरामद करने की गुहार लगाई है। पूरे सबौर और सनोखर इलाके में इस घटना की चर्चा है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर एक विवाहिता दिनदहाड़े गायब कैसे हो जाती है और प्रशासन क्यों मूकदर्शक बना हुआ है?

​फरहा के बच्चे अपनी मां का इंतजार कर रहे हैं, और एक बूढ़ा पिता अपनी लाठी के सहारे न्याय की उम्मीद में सड़कों पर है। भागलपुर पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह इस रहस्यमयी गुमशुदगी की परतों को खोले और दोषियों को सलाखों के पीछे पहुँचाए। अगर जल्द ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो यह मामला समाज में पुलिस के प्रति अविश्वास को और बढ़ाएगा। फिलहाल, नासिर खान के घर में मातम जैसा सन्नाटा है और हर कोई बस यही दुआ कर रहा है कि फरहा सलामत हो। लेकिन समय बीतने के साथ-साथ यह उम्मीद भी धुंधली पड़ती जा रही है, और शक की सुई मुन्ना व उसके परिवार की ओर मजबूती से घूम रही है।

  • ये भी पढ़े..

    बिहार के महाधिवक्ता पीके शाही ने दिया इस्तीफा, सम्राट सरकार में नए एडवोकेट जनरल की तलाश शुरू

    Share Add as a preferred…

    टेंडर घोटाले और BPSC परीक्षा पर जन सुराज का हमला, न्यायिक निगरानी में जांच की मांग; कार्रवाई में देरी पर उठाए सवाल

    Share Add as a preferred…