
भागलपुर, 27 मई 2026: भागलपुर में गंगा नदी संरक्षण, शहर की स्वच्छता व्यवस्था और पर्यावरणीय परियोजनाओं को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। समीक्षा भवन में आयोजित जिला गंगा संरक्षण समिति की महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न विकास और संरक्षण परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी ने की, जिसमें गंगा संरक्षण, तालाबों के जीर्णोद्धार, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, डंपिंग यार्ड, रिवर फ्रंट सफाई और पुल निर्माण जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों को विभिन्न परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने साफ कहा कि पर्यावरण संरक्षण और शहर की स्वच्छता से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान सबसे ज्यादा चिंता हाउसहोल्ड प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन में हो रही देरी को लेकर जताई गई। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के लिए भूमि से जुड़ी कोई समस्या नहीं है, लेकिन संबंधित संवेदक और एजेंसियों की धीमी कार्यशैली के कारण काम प्रभावित हो रहा है।
इस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अभियंताओं और ठेकेदारों को तत्काल तलब कर कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि गंगा संरक्षण और शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में एनटीपीसी के समीप स्थित तालाब क्षेत्र में प्रस्तावित निर्माण कार्य पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि वहां रैयती भूमि पर परियोजना से जुड़े कार्य शुरू किए जाने हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर जल्द निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।
समीक्षा के दौरान नदी और जलस्रोतों के आसपास बढ़ते अतिक्रमण का मुद्दा भी गंभीरता से उठाया गया। अधिकारियों ने बताया कि कई स्थानों पर लोगों द्वारा पानी के प्राकृतिक बहाव को रोककर रास्ते बनाए गए हैं और मिट्टी भराव कर नदी के स्वरूप को बदलने की कोशिश की गई है।
जिलाधिकारी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि गंगा और अन्य जलस्रोतों के प्राकृतिक स्वरूप से किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि पहले संबंधित क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि नदी की मूल धारा और जमीन का वास्तविक स्वरूप सुरक्षित रहे।
उन्होंने कहा कि जहां आवागमन की समस्या है वहां वैकल्पिक समाधान के रूप में पुल निर्माण की योजना तैयार की जाए, ताकि लोगों को सुविधा भी मिले और नदी के प्राकृतिक बहाव पर भी असर न पड़े।
बैठक में शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रणाली की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी और बायो-सीएनजी प्लांट से जुड़े कार्यों के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि शहर में जमा कचरे के वैज्ञानिक निपटारे की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि कचरे से उपयोगी सामग्री की रिकवरी और जैविक अपशिष्ट के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रणाली को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो इससे न केवल शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि पर्यावरण प्रदूषण को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
बैठक में शहर के सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट के लिए हाइब्रिड सिस्टम विकसित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली के तहत कचरे और गंदे पानी का आधुनिक तकनीक से निपटारा किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच आधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की आवश्यकता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। यदि समय रहते वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित नहीं की गई तो भविष्य में पर्यावरणीय चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं।
बैठक के दौरान रिवर फ्रंट की नियमित सफाई और सौंदर्यीकरण पर भी विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि गंगा तट भागलपुर की पहचान है और इसे स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घाटों और आसपास के क्षेत्रों में नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही लोगों को भी गंगा और अन्य जलस्रोतों को स्वच्छ रखने के लिए जागरूक किया जाए।
शहर के सौंदर्यीकरण से जुड़े कई प्रस्तावों पर भी बैठक में चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सार्वजनिक स्थलों, सड़क किनारों और नदी तट क्षेत्रों में हरियाली और साफ-सफाई को बढ़ावा दिया जाए।
बैठक में शेल्टर सुरक्षा और अन्य आधारभूत संरचनाओं से जुड़े प्रस्तावों को भी जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि शहर के विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर योजनाएं तैयार की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भागलपुर जैसे गंगा किनारे बसे शहरों में पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए तो शहर को स्वच्छ, हरित और टिकाऊ मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा और जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर प्रशासन की सक्रियता जरूरी है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में अतिक्रमण और प्रदूषण की समस्या बढ़ी है। लोगों ने उम्मीद जताई कि प्रशासनिक स्तर पर लिए गए निर्णयों का असर जल्द जमीन पर दिखाई देगा।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी, अभियंता और संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया गया।
जिला प्रशासन का कहना है कि गंगा संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरणीय विकास से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


