भागलपुर में 28 दिन की मासूम बच्ची को छोड़कर महिला घर से गई, परिवार ने पुलिस से लगाई मदद की गुहार

मोजाहिदपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और भावुक मामला सामने आया है। सिकंदरपुर कोभी वाड़ी इलाके में 28 दिन की एक नवजात बच्ची को घर पर छोड़कर महिला के चले जाने की घटना ने इलाके में चर्चा और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। परिवार का आरोप है कि महिला बच्ची और परिवार को छोड़कर चली गई है और वापस आने से इनकार कर रही है। फिलहाल नवजात बच्ची अपने पिता और दादा-दादी के पास है, जबकि परिवार ने पुलिस प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

मिली जानकारी के अनुसार यह मामला सिकंदरपुर कोभी वाड़ी निवासी डॉ. अशोक मोदी के परिवार से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि उनके पुत्र पियूष राज की पत्नी घर छोड़कर चली गई है। परिवार का आरोप है कि महिला अपनी 28 दिन की दूधमुंही बच्ची को घर में छोड़कर बिना किसी सूचना के चली गई और अब वापस आने से भी मना कर रही है।

परिवार के अनुसार बच्ची लगातार रो रही है और उसे मां की जरूरत महसूस हो रही है। नवजात होने के कारण उसकी देखभाल को लेकर परिवार काफी परेशान है। बच्ची की हालत और उसकी जरूरतों को देखते हुए घर के लोग भावुक नजर आए। परिवार का कहना है कि इस उम्र में बच्चे को मां के स्नेह और देखभाल की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है।

बच्ची के पिता पियूष राज ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी पहले भी कई बार घर छोड़कर जा चुकी है और परिवार के साथ विवाद करती रही है। उन्होंने दावा किया कि कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उनके साथ मारपीट और नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

परिवार का कहना है कि पहले भी दोनों पक्षों के बीच विवाद को सुलझाने के लिए मोहल्ले के बुद्धिजीवियों और वार्ड पार्षद ने हस्तक्षेप किया था। स्थानीय स्तर पर समझौता कराकर महिला को दोबारा घर लाया गया था। बताया जा रहा है कि उस समय बॉन्ड पेपर पर समझौता भी कराया गया था ताकि परिवारिक जीवन सामान्य हो सके।

लेकिन परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ। अब महिला के अचानक घर छोड़ने और नवजात बच्ची को साथ न ले जाने से पूरा परिवार सदमे में है। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्होंने महिला से संपर्क कर घर लौटने की अपील की, लेकिन उसने साफ तौर पर आने से इनकार कर दिया।

बच्ची के पिता और दादा का आरोप है कि जब उन्होंने महिला से बच्ची के बारे में बात की तो उसने यह कहते हुए मना कर दिया कि बच्चा परिवार का है और वही लोग उसकी देखभाल करें। इस कथित बयान के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई है।

मामले को लेकर पियूष राज और उनके पिता अशोक मोदी पुलिस थाना भी पहुंचे। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अनुरोध किया कि किसी तरह महिला को समझाकर बच्ची के पास वापस भेजा जाए, ताकि नवजात को मां का साथ मिल सके। परिवार का कहना है कि फिलहाल उनकी सबसे बड़ी चिंता बच्ची की देखभाल और उसका स्वास्थ्य है।

हालांकि इस मामले में अभी तक पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है और दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे।

घटना के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे बच्चों से जुड़े मामलों में परिवार और समाज दोनों को संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत होती है। कई लोगों ने कहा कि नवजात बच्चे की देखभाल सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और परिवारिक विवाद का असर बच्चे पर नहीं पड़ना चाहिए।

सामाजिक जानकारों का मानना है कि पारिवारिक तनाव और वैवाहिक विवाद का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है, खासकर नवजात और छोटे बच्चों पर। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में परिवार, समाज और प्रशासन को मिलकर संवेदनशील तरीके से समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए।

बच्ची के दादा अशोक मोदी ने भावुक होते हुए कहा कि इस समय बच्ची को मां की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि परिवार केवल इतना चाहता है कि बच्ची को उसका अधिकार और देखभाल मिल सके। वहीं पिता पियूष राज ने कहा कि वे चाहते हैं कि बच्ची अपनी मां के साथ सुरक्षित माहौल में रहे।

स्थानीय वार्ड पार्षद और कुछ सामाजिक लोगों ने भी मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कही है। उनका कहना है कि परिवारिक विवाद बातचीत और समझदारी से सुलझाए जाने चाहिए ताकि बच्चे का भविष्य प्रभावित न हो।

विशेषज्ञों के अनुसार नवजात बच्चों को शुरुआती महीनों में विशेष देखभाल, पोषण और भावनात्मक सुरक्षा की जरूरत होती है। ऐसे समय में माता-पिता के बीच विवाद बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर असर डाल सकते हैं।

फिलहाल परिवार बच्ची की देखभाल में जुटा हुआ है और पुलिस प्रशासन से सहयोग की उम्मीद कर रहा है। वहीं स्थानीय लोगों की नजर भी इस मामले पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत या प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

भागलपुर में सामने आया यह मामला केवल एक परिवारिक विवाद नहीं, बल्कि नवजात बच्चों की सुरक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर समाज के सामने कई सवाल भी खड़े कर रहा है।

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