
पटना। बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से लैस करने और बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में बुधवार को सम्राट चौधरी सरकार ने कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। मुख्य सचिवालय के मंत्रिपरिषद कक्ष में आयोजित कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में कुल 20 एजेंडों पर अपनी अंतिम मुहर लगाई गई। इस बैठक का सबसे प्रमुख आकर्षण बिहार को ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प रहा। सरकार ने न केवल प्रशासन बल्कि जन-प्रतिनिधियों को भी इस आधुनिक तकनीक से जोड़ने का फैसला किया है। इसके साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का सम्मान करते हुए सीतामढ़ी मेडिकल कॉलेज के नामकरण में बदलाव और राज्य के प्रमुख शहरों में इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन जैसे फैसलों ने विकास के नए आयाम तय किए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विकास, तकनीक, स्वास्थ्य और परिवहन के क्षेत्र में संतुलन बनाने की कोशिश साफ नजर आई।
विधायकों और अधिकारियों को मिलेगा AI का प्रशिक्षण
बिहार अब तकनीक के क्षेत्र में पिछड़ने के बजाय नेतृत्व करने की तैयारी में है। कैबिनेट ने राज्य के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) के सदस्यों के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उच्च गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए बाकायदा ‘बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन’ का गठन किया गया है।
कैबिनेट सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि इस प्रशिक्षण के लिए एनयूएस, सी-डैक पटना, आईआईटी पटना, नाइलिट पटना और सीआईएमपी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग किया जाएगा। एआई तकनीक का उपयोग प्रशासनिक कार्यक्षमता बढ़ाने, वित्तीय प्रबंधन, मानव संसाधन के बेहतर उपयोग, कृषि, स्वास्थ्य और पर्यटन विकास में किया जाएगा। इससे सरकारी सेवाएं अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और डेटा पर आधारित हो सकेंगी। यह कदम बिहार को डिजिटल गवर्नेंस के मामले में एक ‘टेक-हब’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
पर्यावरण सुरक्षा: बिहार के 6 शहरों में दौड़ेंगी 400 इलेक्ट्रिक बसें
परिवहन क्षेत्र में सुधार और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने ‘पीएम ई-बस सेवा योजना’ के तहत 400 इलेक्ट्रिक एसी बसों की खरीद को हरी झंडी दी है। यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से अगले 12 वर्षों तक प्रभावी रहेगी। इन बसों का वितरण राज्य के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों के बीच इस प्रकार किया गया है:
- पटना: 150 इलेक्ट्रिक बसें।
- भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा और पूर्णिया: प्रत्येक शहर को 50-50 बसें आवंटित की गई हैं।
सरकार ने इन बसों के अगले 12 वर्षों तक परिचालन और रखरखाव के लिए ‘कैश गैप सब्सिडी’ के रूप में 517.16 करोड़ रुपये की संशोधित राशि स्वीकृत की है। इस फैसले से न केवल यात्रियों को सस्ती और आरामदायक यात्रा की सुविधा मिलेगी, बल्कि शहरों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी।
सीतामढ़ी मेडिकल कॉलेज का नामकरण ‘माता सीता’ के नाम पर
धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए कैबिनेट ने सीतामढ़ी में बन रहे राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (Medical College and Hospital) का नाम बदलने का निर्णय लिया है। अब इस संस्थान को आधिकारिक रूप से ‘माता सीता चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल’ के नाम से जाना जाएगा। सीतामढ़ी माता जानकी की जन्मस्थली है, ऐसे में यह फैसला न केवल स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करता है, बल्कि जिले को एक नई आध्यात्मिक पहचान भी देता है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है ताकि निर्माण कार्य पूरा होने के साथ ही इसे नई पहचान के साथ संचालित किया जा सके।
शहरी विकास के लिए वर्ल्ड बैंक से 500 मिलियन डॉलर का कर्ज
बिहार के शहरी क्षेत्रों को आर्थिक रूप से सशक्त और उत्पादक बनाने के लिए राज्य सरकार ने विश्व बैंक (World Bank) से 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस सहायता राशि का उपयोग एकीकृत शहरी आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिए किया जाएगा। इससे बिहार के शहरों में बुनियादी ढांचे, जल निकासी, अपशिष्ट प्रबंधन और आधुनिक परिवहन तंत्र को विकसित करने में मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के शहर केवल रिहाइशी इलाके न रहें, बल्कि वे आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरें।
पटना एयरपोर्ट का विस्तार और बुनियादी ढांचा
राजधानी पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार और वहां बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। पटना हवाई अड्डे के परिसर से सटी औद्योगिक क्षेत्र की 1.85 एकड़ भूमि (रास्ते सहित) को ‘भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण’ (AAI) को निःशुल्क हस्तांतरित करने की मंजूरी दी गई है। इस भूमि का उपयोग भविष्य में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए किया जा सकेगा, जिससे हवाई यात्रियों को अधिक सुविधाएं और सुरक्षा मिल सकेगी।
सड़कों के रखरखाव के लिए 15,967 करोड़ का मेगा प्लान
बिहार की सड़कों को गड्ढा मुक्त और सुरक्षित बनाए रखने के लिए सरकार ने अगले सात वर्षों के लिए 15,967.03 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। इस योजना के तहत राज्य की कुल 19,305.58 किलोमीटर लंबी सड़कों का संधारण (Maintenance) किया जाएगा। इसमें केवल मरम्मत ही नहीं, बल्कि सड़कों की नियमित निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, पथ निर्माण विभाग के अधीन आने वाले महत्वपूर्ण पुलों और राजकीय राजमार्गों (State Highways) पर सड़क उपयोगकर्ता शुल्क (Road User Fee) भी वसूला जाएगा ताकि सड़कों के रख-रखाव के लिए वित्तीय व्यवस्था बनी रहे।
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए ‘ई-वोटिंग’ की सुविधा
लोकतंत्र में सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 2026 के नगर निकाय चुनावों में एक क्रांतिकारी कदम उठाने का फैसला किया है। वरिष्ठ नागरिकों, शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों और असाध्य रोगों से ग्रसित मतदाताओं के लिए ‘ई-वोटिंग सिस्टम’ लागू किया जाएगा। इसके माध्यम से वे अपने घर या स्थान से ही मतदान कर सकेंगे। इस तकनीक के कार्यान्वयन के लिए हैदराबाद स्थित एजेंसी सी-डैक (C-DAC) को नामित किया गया है और इसके लिए 31.4588 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय
- औद्योगिक निवेश: निवेशकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए ‘बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज’ (BIIPP) 2025 की अवधि को 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पहले यह 31 मार्च 2026 तक ही प्रभावी थी।
- भवन उपविधि 2026: बिहार भवन (संशोधन) उपविधि, 2026 को मंजूरी दी गई है। इससे व्यावसायिक भूमि के नुकसान को कम करने और शहरीकरण के बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही निर्माण अनुमति की प्रक्रिया को डिजिटल और आसान बनाया जाएगा।
- वित्त आयोग: सप्तम राज्य वित्त आयोग के कार्यकाल को 30 सितंबर 2026 तक विस्तारित कर दिया गया है।
- अग्रिम वेतन: राज्य सरकार के कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों के लिए बैंकों के माध्यम से अग्रिम वेतन या पेंशन तथा ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।
कैबिनेट के ये 20 फैसले यह स्पष्ट करते हैं कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार बिहार को एक प्रगतिशील और तकनीक-आधारित राज्य के रूप में विकसित करना चाहती है। एआई मिशन और ई-वोटिंग जैसे निर्णय जहां आधुनिक बिहार की झलक दिखाते हैं, वहीं माता सीता के नाम पर मेडिकल कॉलेज का नामकरण परंपराओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है।


