
भागलपुर। रेशमी शहर भागलपुर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान में गुरुवार को एक नया सुनहरा अध्याय जुड़ गया। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित भागलपुर संग्रहालय परिसर में नवनिर्मित पुस्तकालय का भव्य उद्घाटन और लोकार्पण किया गया। यह केवल एक पुस्तकालय का उद्घाटन नहीं था, बल्कि अंग जनपद की लुप्त होती ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने की एक सशक्त मुहिम की शुरुआत थी। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-संग्रहालय अध्यक्ष अंकित रंजन ने उपस्थित अतिथियों के साथ संयुक्त रूप से फीता काटकर इस ज्ञान केंद्र को जनता को समर्पित किया। इस अवसर पर पूरा संग्रहालय परिसर उत्सव के रंग में डूबा नजर आया, जहाँ साहित्य, कला और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। भागलपुर की इस नई बौद्धिक धरोहर में अब शोधार्थियों और पुस्तक प्रेमियों के लिए दुर्लभ संसाधनों का एक विशाल द्वार खुल गया है।
3500 पुस्तकों का संकलन और प्राचीन पांडुलिपियों का खजाना
संग्रहालय अध्यक्ष अंकित रंजन ने इस नवनिर्मित पुस्तकालय की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि यहाँ ज्ञान का एक ऐसा संसार बसाया गया है जो इतिहास और दर्शन के प्रेमियों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है। वर्तमान में पुस्तकालय में 3500 से अधिक अत्यंत महत्वपूर्ण पुस्तकों का संकलन किया गया है। इन पुस्तकों में कला, संस्कृति, इतिहास, दर्शन और साहित्य की विविध विधाओं का समावेश है। विशेष रूप से गांधी दर्शन से संबंधित पुस्तकों का एक बड़ा खंड बनाया गया है, जो नई पीढ़ी को राष्ट्रपिता के विचारों से जोड़ने का कार्य करेगा। रंजन ने स्पष्ट किया कि पुस्तकों की यह संख्या केवल शुरुआत है, आने वाले समय में इनकी संख्या और गुणवत्ता में निरंतर बढ़ोतरी की जाएगी ताकि यह बिहार के प्रमुख शोध केंद्रों में से एक बन सके।
पुस्तकालय का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण हिस्सा वहां प्रदर्शित 30 से अधिक अतिप्राचीन पांडुलिपियां हैं। इन पांडुलिपियों में अंग क्षेत्र की सदियों पुरानी मेधा सुरक्षित है। पुस्तकालय में ताड़ पत्र पर लिखे गए प्राचीन ग्रंथ, लकड़ी के आवरण वाले हस्तलिखित दस्तावेज और विभिन्न धर्मों के दार्शनिक आधारों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें ब्राह्मण, जैन, बौद्ध और सिख धर्म से संबंधित दुर्लभ ग्रंथों के साथ-साथ फारसी भाषा में लिखे गए कई ऐतिहासिक दस्तावेज भी शामिल हैं। ये दस्तावेज न केवल भागलपुर बल्कि संपूर्ण पूर्वी भारत के इतिहास को समझने में मील का पत्थर साबित होंगे। प्राचीन लिपियों और ऐतिहासिक लेखन शैलियों में रुचि रखने वाले शोधार्थियों के लिए यह पुस्तकालय एक अनमोल प्रयोगशाला की तरह कार्य करेगा।
साहित्यिक हलचल और अंग क्षेत्र का सांस्कृतिक उत्थान
लोकार्पण समारोह के दौरान आयोजित साहित्यिक चर्चा कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रबुद्ध शिक्षाविदों और विचारकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वरिष्ठ शिक्षाविद राजीवकान्त मिश्रा ने अपने संबोधन में कला एवं संस्कृति विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए एक महत्वपूर्ण पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से भागलपुर में कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक सकारात्मक हलचल और जीवंतता देखने को मिल रही है। विभाग के सक्रिय प्रयासों के कारण वे लोग जो कला, साहित्य और इतिहास के क्षेत्रों से जुड़कर भी अलग-थलग पड़े थे, वे अब एक मंच पर आने लगे हैं। मिश्रा के अनुसार, इस प्रकार के मिलन और वैचारिक आदान-प्रदान से निश्चित रूप से अंग क्षेत्र की कला और साहित्य का उतरोत्तर विकास होगा।
साहित्यिक चर्चा में शामिल मनोज मीता, डॉक्टर मनोज, डॉक्टर दिनेश कुमार और डॉक्टर ऋचा कुमारी ने कला, इतिहास और पुरातत्व के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भागलपुर संग्रहालय को अब केवल पुरानी वस्तुओं को रखने की जगह नहीं, बल्कि एक सक्रिय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक पुस्तकालय का संग्रहालय के भीतर होना छात्रों को इतिहास को न केवल देखने बल्कि उसे पढ़ने और समझने का भी अवसर प्रदान करेगा। चर्चा के दौरान अंगिका साहित्य की समृद्धि और इसे वैश्विक पटल पर ले जाने की संभावनाओं पर भी गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
‘अड़िए और पढ़िये’ के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भरा उत्साह
पुस्तकालय के उद्घाटन अवसर पर संग्रहालय में कई अनूठी शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसमें सबसे प्रभावी ‘अड़िए और पढ़िये’ कार्यक्रम रहा। इस नवाचार के तहत पुस्तकालय में उपस्थित सभी पुस्तक प्रेमियों ने अपनी-अपनी पसंद की पुस्तकें एक साथ बैठकर पढ़ीं। पढ़ने के बाद सभी ने उन पुस्तकों की सामग्री पर अपनी प्रतिक्रिया दी और आयोजित परिचर्चा में भाग लिया। यह एक ऐसा दृश्य था जहाँ उम्र की सीमाएं टूट गई थीं और हर कोई ज्ञान के आदान-प्रदान में व्यस्त था। उपस्थित लोगों ने अपनी स्वरचित रचनाएं भी लिखीं, जिन्हें अन्य लोगों के अवलोकन हेतु संग्रहालय के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किया गया।
सांस्कृतिक पक्ष को जीवंत बनाने के लिए युवा कवि मनजीत सिंह किनवार ने समसामयिक विषयों पर ओजस्वी कविता पाठ किया, जिससे उपस्थित जनसमूह में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। इसके पश्चात संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर लोक संगीत की तान छेड़ी गई। युवा लोक गायक समरोज अली ने अपनी मधुर आवाज में अंगिका के कई लोकप्रिय गीत सुनाकर अंग क्षेत्र की महिमा का बखान किया। लोक गीतों के माध्यम से उन्होंने भागलपुर की माटी, गंगा की लहरों और यहाँ की गौरवशाली परंपराओं को सुरों में पिरोकर पेश किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। यह आयोजन सिद्ध करता है कि ज्ञान और कला एक-दूसरे के पूरक हैं।
वॉलेंटीयर्स का सम्मान और समाज से ज्ञान-दान की अपील
पुस्तकालय के निर्माण और पुस्तकों के व्यवस्थित संकलन में कई युवाओं ने अपना निःस्वार्थ योगदान दिया है। अंकित रंजन के मार्गदर्शन में कड़ी मेहनत करने वाले चार वॉलेंटीयर्स को इस अवसर पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कला एवं संस्कृति पदाधिकारी द्वारा आयशा नसीम, सुमन कुमार आनंद, रितेश रंजन और फैसल करीम को अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र और मंजूषा मोमेंटों देकर सम्मानित किया गया। इन युवाओं ने पुस्तकालय को आकार देने में अपना श्रम और समय लगाया है। सम्मानित होने के बाद वॉलेंटीयर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि संग्रहालय के साथ जुड़कर उन्हें अपनी जड़ों को समझने का मौका मिला है और वे भविष्य में भी ऐसी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहना चाहते हैं।
ज्ञान की इस परंपरा को और अधिक विस्तृत बनाने के उद्देश्य से अंकित रंजन ने भागलपुर के नागरिकों और विद्वानों से एक भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि इतिहास, कला और संस्कृति से संबंधित कोई भी महत्वपूर्ण पुस्तक यदि किसी के पास व्यक्तिगत संग्रह में हो, तो वे उसे संग्रहालय पुस्तकालय को दान कर सकते हैं। यह एक शैक्षणिक यात्रा है जिसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। इस अपील का तुरंत असर भी देखने को मिला, जहाँ कई पुस्तक प्रेमियों ने अपनी निजी अलमारियों से निकालकर महत्वपूर्ण पुस्तकें संग्रहालय को भेंट कीं। पुस्तक भेंट करने वालों में साहिल राज, अणिमा सिन्हा, मनजीत सिंह, डॉक्टर मनोज, सच्चिदानन्द और रजीवकान्त शामिल रहे। इस पहल से आने वाले समय में पुस्तकालय का संग्रह और अधिक समृद्ध होने की उम्मीद है।
भविष्य की योजनाएं और शोधार्थियों के लिए नया केंद्र
भागलपुर संग्रहालय का यह पुस्तकालय आने वाले समय में केवल पुस्तकों के भंडारण तक सीमित नहीं रहेगा। विभाग की योजना है कि यहाँ नियमित रूप से व्याख्यान माला, पुस्तक समीक्षा कार्यक्रम और ऐतिहासिक कार्यशालाएं आयोजित की जाएं। पुस्तकालय को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ने का विचार है ताकि पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा सके और दुनिया भर के शोधार्थी अंग क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को ऑनलाइन भी पढ़ सकें। संग्रहालय परिसर में पुस्तकालय के खुल जाने से अब उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी जो संदर्भ पुस्तकों की तलाश में अन्य शहरों का रुख करते थे। यह केंद्र अब अंग क्षेत्र की मेधा का नया शक्ति केंद्र बनकर उभरेगा, जहाँ विरासत को सहेजने के साथ-साथ ज्ञान के नए आयाम तलाशे जाएंगे।


