
भागलपुर। बिहार के पूर्वी हिस्से और सीमांचल की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु पर छाया संकट अब छंटने लगा है। गंगा की लहरों के ऊपर खड़े इस महासेतु के जख्मों को भरने के लिए ‘देश के रक्षकों’ यानी बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने मोर्चा संभाल लिया है। गुरुवार को भागलपुर के लिए यह एक बड़ी राहत वाली खबर रही जब सैन्य स्तर पर काम करने वाली बीआरओ की 100 सदस्यीय टीम अपने साजो-सामान के साथ सेतु पर उतरी। अधीक्षण अभियंता विपिन कुमार चांद के नेतृत्व में इस दक्ष टीम ने उन हिस्सों की घेराबंदी शुरू कर दी है, जहाँ स्लैब गिरने से संपर्क टूट गया था। प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों का साझा लक्ष्य है कि मई 2026 के समाप्त होने से पहले इस सेतु पर कम से कम हल्के वाहनों की आवाजाही को फिर से बहाल कर दिया जाए, ताकि पिछले कई दिनों से जारी नावों का जोखिम भरा सफर और आवश्यक वस्तुओं की किल्लत को खत्म किया जा सके।
तीन स्पैन का सुरक्षा चक्र: बीआरओ की अभेद्य रणनीति
विक्रमशिला सेतु की मरम्मत कोई साधारण कार्य नहीं है, क्योंकि यहाँ गंगा का प्रवाह और संरचना की जटिलता बड़ी चुनौती पेश करती है। बीआरओ के अधीक्षण अभियंता विपिन कुमार चांद ने मीडिया को तकनीकी बारीकियों से अवगत कराते हुए बताया कि मरम्मत का कार्य केवल उस हिस्से तक सीमित नहीं है जहाँ स्लैब गिरा है। टीम ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक विस्तृत सुरक्षा कवच (Safety Grid) तैयार किया है।
योजना के अनुसार, सेतु के जिस 34 मीटर लंबे हिस्से का स्लैब पूरी तरह गिर चुका है, वहां सबसे पहले मुख्य बेली ब्रिज का ढांचा खड़ा किया जाएगा। इसके अलावा, तकनीकी जांच में यह पाया गया कि गिरे हुए हिस्से के उत्तर दिशा में 12 मीटर और दक्षिण दिशा में 24 मीटर का स्लैब भी काफी कमजोर हो चुका है और भविष्य में बड़ा खतरा बन सकता है। इसी जोखिम को टालने के लिए बीआरओ ने कुल तीन स्पैन पर बेली ब्रिज बिछाने का निर्णय लिया है। यानी कुल मिलाकर लगभग 70 मीटर की लंबाई में लोहे का यह मजबूत सैन्य ढांचा सेतु को सहारा देगा। इससे न केवल गिरे हुए हिस्से की भरपाई होगी, बल्कि आसपास के कमजोर हिस्सों को भी अतिरिक्त मजबूती मिलेगी।
कोलकाता से पहुँचा स्टील का ढांचा: ‘मिलिट्री ग्रीन’ में दिखी उम्मीद
मरम्मत कार्य को गति देने के लिए आवश्यक भारी-भरकम मशीनरी और सैन्य ग्रेड का स्टील भागलपुर पहुँच चुका है। गुरुवार को कोलकाता से आए चार बड़े ट्रकों ने सेतु के करीब दस्तक दी, जिनमें खास ‘मिलिट्री कलर’ के लोहे के भारी स्ट्रक्चर और स्टील फ्रेम लदे थे। ये वही स्ट्रक्चर हैं जिनका उपयोग भारतीय सेना दुर्गम क्षेत्रों और युद्ध जैसी स्थितियों में बहुत कम समय में पुल बनाने के लिए करती है।
प्रशासन के मुताबिक, इन स्टील फ्रेम्स की असेंबलिंग का काम युद्धस्तर पर शुरू किया जा चुका है। क्रेन और हाइड्रा मशीनों की मदद से इन भारी गाडर्स को सेतु के पिलर्स पर सेट किया जा रहा है। बीआरओ की कार्यप्रणाली अपनी गति और सटीकता के लिए जानी जाती है, और यहाँ भी वही नजारा दिख रहा है। 100 सदस्यीय टीम ने पुल पर ही अपना अस्थायी बेस कैंप बना लिया है ताकि काम में एक मिनट की भी देरी न हो। जैसे-जैसे लोहे के ये फ्रेम आपस में जुड़ेंगे, विक्रमशिला सेतु की टूटी हुई कड़ी फिर से जुड़ती जाएगी।
मंत्री का मुआयना और सुशासन का संकल्प
पथ निर्माण विभाग के मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने विभागीय अधिकारियों के साथ सेतु का सघन मुआयना किया। उन्होंने क्षतिग्रस्त हिस्से तक पैदल जाकर स्थिति को देखा और बीआरओ के अधिकारियों से निर्माण की समयसीमा पर विस्तार से चर्चा की। मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के लिए विक्रमशिला सेतु का सुचारू होना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अधीक्षण अभियंता विपिन कुमार चांद से बातचीत के बाद मंत्री कुमार शैलेंद्र ने संवाददाताओं को आश्वस्त किया कि मई 2026 के अंत तक हर हाल में सेतु को यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह काम दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में बेली ब्रिज के माध्यम से तत्काल राहत दी जाएगी, जबकि दूसरे चरण में ‘ट्रस तकनीक’ का उपयोग कर पुल का स्थायी समाधान किया जाएगा। मंत्री ने मौके पर मौजूद उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम और संयुक्त निदेशक जनसंपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता को निर्देश दिया कि बीआरओ की टीम को स्थानीय स्तर पर किसी भी संसाधन या सहयोग की कमी न होने दी जाए।
नावों के सफर से मुक्ति और आर्थिक राहत
विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बाधित होने का सीधा असर भागलपुर की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर पड़ा है। वर्तमान में लोगों को गंगा पार करने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो न केवल समय की बर्बादी है बल्कि बेहद जोखिम भरा भी है। आवश्यक वस्तुओं, फल, सब्जी और दूध की आपूर्ति प्रभावित होने से शहर में महंगाई बढ़ गई है।
बेली ब्रिज तैयार होने के बाद करीब 3.25 मीटर चौड़ा रास्ता हल्के वाहनों जैसे कार, एम्बुलेंस और बाइक के लिए उपलब्ध होगा। इससे आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति फिर से पटरी पर लौट आएगी। जिला प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि बेली ब्रिज चालू होने के बाद सुरक्षा और भार संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष यातायात प्रबंधन किया जाएगा। पुल के दोनों किनारों पर पुलिस बल की मुस्तैदी होगी और वन-वे ट्रैफिक के जरिए वाहनों को गुजारा जाएगा।
युद्धस्तर पर जारी है चौबीसों घंटे काम
बीआरओ की टीम ने पुल पर अपनी क्रेन और वेल्डिंग मशीनों के साथ डेरा डाल दिया है। मई की तपिश के बावजूद जवानों का उत्साह कम नहीं है। अधीक्षण अभियंता ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य लोगों की असुविधा को जल्द से जल्द समाप्त करना है। बीआरओ की यह सक्रियता भागलपुर के लोगों के लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण लेकर आई है।
पुल निर्माण की सामग्री पहुँचने और काम शुरू होने की खबर के बाद स्थानीय लोगों में भी खुशी देखी जा रही है। पिछले एक पखवाड़े से जो सन्नाटा सेतु पर पसरा था, अब वहां मशीनों की गड़गड़ाहट और मजदूरों की चहल-पहल है। प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे निर्माण कार्य के दौरान सेतु के करीब न जाएं ताकि सुरक्षा और काम की गति बनी रहे। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक चला, तो जून की शुरुआत भागलपुरवासी एक सुगम यात्रा के साथ करेंगे और विक्रमशिला सेतु का संकट इतिहास बन जाएगा।


