आरपीएफ जवान धर्मेंद्र हत्याकांड: कहलगांव इंस्पेक्टर के बयान पर प्राथमिकी दर्ज, 24 मई की झड़प और प्रतिशोध के कोण पर घूम रही पुलिसिया जांच

भागलपुर प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लैलख रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा ग्रिड में तैनात रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार की संदिग्ध व नृशंस हत्या के मामले में पुलिस प्रशासन और रेल सुरक्षा संभाग ने कई चरणों में प्रखर जांच प्रक्रिया लाइव मोड पर शुरू कर दी है। इस सनसनीखेज हत्याकांड के पटल पर आते ही रेल पुलिस और स्थानीय थानों के भीतरी गलियारों में भारी प्रशासनिक मुस्तैदी सक्रिय हो गई है। जवान का शव लैलख रेलवे स्टेशन के मुख्य परिसर से दूर बरामद होने के बाद से ही वरिष्ठ कप्तानों ने ग्राउंड जीरो पर प्रविष्ट होकर साक्ष्यों के संकलन का अभियांत्रिक प्रक्रम तेज कर दिया है।

सीनियर कमांडेंट बरुण कुमार बेहरा की ऑन-स्पॉट प्रविष्टि: सहकर्मियों से पूछताछ

​मामले की विधिक गंभीरता और सुरक्षा मापदंडों को संज्ञान में लेते हुए बुधवार को आरपीएफ के सीनियर कमांडेंट बरुण कुमार बेहरा ने लैलख रेलवे स्टेशन के घटना स्थल का भौतिक मुआयना किया और सुरक्षा व्यवस्था का फॉरेंसिक जायजा लिया। सीनियर कमांडेंट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वारदात की समय सारणी के दौरान कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार के साथ ड्यूटी पर तैनात कनिष्ठ कर्मियों और अन्य चश्मदीदों को मुख्य केबिन में तलब कर सघन पूछताछ संधारित की।

​कमांडेंट ने आधिकारिक विलेख साझा करते हुए बताया कि इस नृशंस हत्याकांड को लेकर सबौर थाना के भीतरी लेज़र बुक में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ हत्या की सुसंगत और कड़क धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी गई है। इसके समानांतर, मामले की फॉरेंसिक और बारीक जांच के वास्ते जिला पुलिस अधीक्षक से मिलकर एक संयुक्त खोजी दस्ता सक्रिय करने की विधिक मांग लॉक की गई है।

जमालपुर रेल एसपी विद्यासागर का विनिर्देश: शरीर पर मिले गहरे आघात के निशान

​इस वारदात की खुफिया इनपुट मिलते ही जमालपुर रेल पुलिस अधीक्षक विद्यासागर भी सायरन मोड पर तुरंत घटना स्थल पर प्रविष्ट हुए और लैलख स्टेशन प्रक्षेत्र का सघन मुआयना कर कनिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक कूटनीतिक दिशा-निर्देश जारी किए। रेल पुलिस अधीक्षक ने प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर रेखांकित किया कि प्रथम दृष्टया देखने से यह स्पष्ट परिलक्षित होता है कि आरपीएफ जवान को अज्ञात अपराधियों के सिंडिकेट ने किसी गुप्त स्थान पर बंधक विनिर्मित कर गंभीर रूप से घायल किया और फिर उसकी नृशंस हत्या कर दी।

​जवान के निर्जीव शरीर की स्क्रूटनी करने पर उसकी छाती, पेट और प्राइवेट पार्ट पर गहरे व गंभीर चोट के निशान दर्ज किए गए हैं, जो अपराधियों की पाशविक बर्बरता को लाउड मोड पर प्रदर्शित करते हैं।

लैलख स्टेशन से ढाई किलोमीटर दूर गंगा के कछार में डंप था शव

​इस पूरे आपराधिक घटनाक्रम का सबसे क्रिटिकल कोण शव की बरामदगी का भौगोलिक विन्यास संधारित है। अपराधियों ने विधिक साक्ष्यों को म्यूट करने और पुलिसिया नाकेबंदी को चकमा देने के उद्देश्य से कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार के शव को लैलख रेलवे स्टेशन से करीब ढाई किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित गंगा के कछार (नदी तट के भीतरी रेतीले प्रक्षेप) में ले जाकर डंप कर दिया था। स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने शव को कस्टडी में लेकर पोस्टमार्टम संभाग के लिए प्रेषित कर दिया है।

​जमालपुर रेल पुलिस और सबौर थाना की संयुक्त जासूसी टीमें अब लैलख स्टेशन के पिछले डिजिटल लॉग्स, मोबाइल टावर डेटा डंप और कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) की गहन स्क्रूटनी कर रही हैं ताकि यह लोकेट किया जा सके कि वारदात की रात धर्मेंद्र कुमार को किन तत्वों ने धोखे से स्टेशन परिसर से बाहर डाइवर्ट किया था। अपराधियों की त्वरित गिरफ्तारी के वास्ते प्रक्षेत्र में छापेमारी ग्रिड को पूरी कड़ाई से सक्रिय लॉक कर दिया गया है।

भागलपुर प्रक्षेत्र के सबौर थाना इलाके के भीतर सुरक्षा ग्रिड में तैनात रेलवे सुरक्षा बल के सिपाही धर्मेंद्र कुमार की संदिग्ध और नृशंस हत्या के मामले में प्रशासनिक और कानूनी संचिकाओं को लाउड मोड पर सक्रिय कर दिया गया है। बुधवार की अलसुबह शंकरपुर पुल के निकट नदी के जलग्रहण क्षेत्र से जवान का शव बरामद होने के बाद से ही प्रक्षेत्र के भीतर सुरक्षा प्रणालियों को पूरी कड़ाई के साथ अलर्ट मोड पर डाल दिया गया था। इस खौफनाक वारदात के बीत जाने के 48 घंटे के लंबे समयांतराल के बाद भी पुलिस के खोजी दस्तों के हाथ वर्तमान समय सीमा तक कोई बहुत ठोस या निर्णायक सुराग हाथ नहीं लगा है, जिससे हत्या के विधिक कारणों को लेकर संशय का लेआउट बना हुआ है। हालांकि, रेल सुरक्षा बल और स्थानीय जिला पुलिस की संयुक्त जासूसी इकाइयां इस पूरे मामले को महज एक सामान्य आपराधिक कृत्य मानने के बजाय इसके पीछे छिपे गहरे सिंडिकेट और कूटनीतिक रंजिशों के विलोपकों को क्रैक करने के वास्ते धरातल पर लगातार मुस्तैद संधारित हैं।

​इस जघन्य हत्याकांड के विधिक विन्यास को आधिकारिक लेज़र बुक में दर्ज करने के वास्ते कहलगांव रेलवे स्टेशन पर पदस्थापित आरपीएफ इंस्पेक्टर विपिन कुमार के लिखित प्रतिवेदन को मुख्य आधार विनिर्मित किया गया है। आरपीएफ इंस्पेक्टर विपिन कुमार के विस्तृत बयान के आलोक में सबौर थाना के भीतर अज्ञात घातकों और अपराधियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कड़क व गैर-जमानती धाराओं के तहत हत्या का विधिक मुकदमा दर्ज कर संचिका को पूरी कड़ाई से लॉक कर दिया गया है। मामले में नामजदगी न होने के कारण पुलिस का पूरा अनुसंधान वर्तमान में वैज्ञानिक और लोकेशनल डेटा डंप के विश्लेषण पर संधारित हो रहा है। प्राथमिकी पंजीकृत होने के तुरंत बाद सबौर थाना की पुलिस टीम ने त्वरित रिस्पॉन्स ग्रिड सक्रिय करते हुए घटना स्थल यानी शंकरपुर पुल के भीतरी और बाहरी मुहानों सहित उसके आसपास के तमाम संदिग्ध ग्रामीण क्लस्टर्स की नाकेबंदी कर सघन भौतिक छानबीन प्रारंभ कर दी है।

​सबौर थाना के मुख्य कमान कप्तान यानी थानाध्यक्ष सह सबौर थानेदार सब-इंस्पेक्टर (SI) बिट्टू कुमार कमल ने इस हाई-प्रोफाइल मामले के प्रशासनिक स्टेटस पर आधिकारिक प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रथमदृष्टया पूरा मामला सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई नृशंस हत्या का ही परिलक्षित हो रहा है। अपराधियों ने कानून के इकबाल को चुनौती देने के उद्देश्य से इस वारदात को लॉक किया है। कहलगांव आरपीएफ कमान टीम के आधिकारिक बयान पर हत्या की सुसंगत धाराओं में केस दर्ज करने के उपरांत पुलिस के दो विशेष खोजी दस्ते लगातार तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट्स के आधार पर अग्रेतर छानबीन की कड़ियों को गति प्रदान कर रहे हैं। गौरतलब हो कि बीते बुधवार की सुबह जब अंचल के नागरिक अपने दैनिक प्रक्रमों में म्यूट थे, ठीक उसी समय शंकरपुर पुल के पास नदी के भीतरी किनारे पर आरपीएफ जवान धर्मेंद्र कुमार का निर्जीव शरीर तैरता हुआ पाया गया था।

​अपराधियों की क्रूरता का अंदाज़ा इस प्रामाणिक विलेख से लगाया जा सकता है कि जब जवान का शव नदी के पानी से बाहर निकाला गया, तो उनके पूरे शरीर पर एक भी वस्त्र या कपड़ा संधारित नहीं था। शव को पूरी तरह नग्न अवस्थिति में छोड़ना अपराधियों की किसी गहरी विकृत मानसिकता या साक्ष्यों को पूरी तरह म्यूट करने के कूटनीतिक प्रयास को रेखांकित करता है। बुधवार की देर रात भागलपुर के मुख्य चिकित्सालय के डॉक्टरों के विशेष पैनल द्वारा शव का सघन पोस्टमार्टम मुकम्मत किए जाने के बाद, कानूनी संचिकाओं को पूरा कर शव परिजनों के केबिन में सुपुर्द किया गया था। बिलखते और गहरे मानसिक आघात से टूटे परिजन जवान धर्मेंद्र कुमार के पार्थिव शरीर को लेकर उनके पैतृक गृह जिले मुंगेर के अंतर्गत आने वाले नया राम नगर थाना क्षेत्र स्थित महमदा गांव के वास्ते प्रस्थान कर गए, जहां गुरुवार को अत्यंत गमगीन और लाउड माहौल के बीच उनका अंतिम संस्कार मुकम्मत हुआ।

​इस पूरे हत्याकांड के भीतरी कूटनीतिक चक्रव्यूह और मोटिव (कारण) से पर्दा उठाने की दिशा में मृतक जवान धर्मेंद्र कुमार के साले मणिकांत कुमार ने एक अत्यंत सनसनीखेज और प्रामाणिक विलेख पुलिसिया जांच के डेस्क पर साझा किया है। मणिकांत कुमार के बयानों के आधार पर पुलिस अब इस पूरे कत्ल के पीछे एक सोची-समझी बदले की भावना और प्रतिशोध के कोण को सर्वोपरि मानकर अनुसंधान की कड़ियों को आपस में जोड़ रही है। मृतक के साले मणिकांत कुमार ने विस्तार से खुलासा करते हुए बताया कि बीते 24 मई के टाइम-स्टैम्प के भीतर लैलख रेलवे स्टेशन के मुख्य मुहाने के पास राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और अंचल के कतिपय कुख्यात असामाजिक तत्वों व अपराधियों के सिंडिकेट के बीच एक प्रखर और हिंसक झड़प लाइव मोड पर सक्रिय हुई थी।

​उस 24 मई की हिंसक झड़प के उपरांत रेल पुलिस और सुरक्षा बलों ने त्वरित आक्रामक रुख अपनाते हुए लैलख स्टेशन के भीतरी और बाहरी प्रक्षेपों से कुल छह शातिर आरोपियों को घेराबंदी कर विधिक रूप से गिरफ्तार कर लिया था। पकड़े गए उन छह आरोपियों की जब फिजिकल फ्रिस्किंग और तलाशी मुकम्मत की गई थी, तो उनके पास से अवैध कट्टा, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस, मारक चाकू और कतिपय अन्य धारदार लोहे के हथियारों का बड़ा डेटा डंप बरामद कर सीज़र लिस्ट के भीतर लॉक किया गया था। पुलिस रिकॉर्ड्स के अनुसार, पकड़े गए वे सभी छह आरोपी सबौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लैलख गांव के ही मूल निवासी संधारित हैं और उन सभी का पिछले लंबे समय से अंचल के भीतर एक संगठित आपराधिक रिकॉर्ड (क्रिमिनल हिस्ट्री) भी सक्रिय मोड पर दर्ज रहा है।

​परिजनों और मणिकांत कुमार का यह कड़ा स्टैंड है कि अपने गुर्गों की इस प्रखर गिरफ्तारी और हथियारों की जब्ती से बौखलाए लैलख के इस आपराधिक सिंडिकेट के बचे हुए बाहरी सदस्यों ने खाकी के खिलाफ प्रतिशोध की एक गुप्त खूनी पटकथा विनिर्मित की। आशंका जताई जा रही है कि उस घटना के ठीक दो दिन बाद, जब जवान धर्मेंद्र कुमार अपनी ड्यूटी या व्यक्तिगत संचरण के विन्यास में स्टेशन परिसर से आंशिक दूरी पर डाइवर्ट हुए होंगे, तभी घात लगाकर मुस्तैद अपराधियों ने कूटनीतिक रूप से उन्हें अगवा (किडनैप) कर लिया होगा। किसी गुप्त हीटिंग चैंबर या एकांत ठिकाने पर ले जाकर उनके साथ पाशविक मारपीट की गई, उनके वस्त्रों को साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से नष्ट किया गया और अंततः उनकी नृशंस हत्या कर शव को शंकरपुर पुल के पास नदी के गहरे जल प्रवाह में डंप कर अपराधी भूमिगत हो गए।

​इस इनपुट के पुलिस डायरी का हिस्सा बनते ही सबौर थाना पुलिस और कहलगांव आरपीएफ की संयुक्त जासूसी विंग ने लैलख गांव के उन छह गिरफ्तार आरोपियों के पिछले कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR), उनके मोबाइल सिग्नल्स और उनके कनिष्ठ सहयोगियों के भीतरी नेटवर्क को खंगालना लाउड मोड पर शुरू कर दिया है। तकनीकी सेल के अभियंता अब लैलख स्टेशन और शंकरपुर पुल के बीच अवस्थित तमाम मोबाइल टावरों के पिछले 48 घंटों के डेटा डंप और डाइवर्टेड सिग्नल्स का फॉरेंसिक ऑडिट संधारित कर रहे हैं ताकि यह लोकेट किया जा सके कि वारदात की रात किन संदिग्ध मोबाइल नंबरों की मुस्तैदी उस नदी तटीय प्रक्षेप के भीतरी घेरे में लाइव दर्ज की गई थी। हालांकि, पुलिस कप्तानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक फॉरेंसिक नमूनों की अंतिम रिपोर्ट और संदिग्धों के इकबालिया बयान विधिक रूप से सीलबंद संचिका में लॉक नहीं हो जाते, तब तक किसी एक निष्कर्ष पर मुहर लगाना जल्दबाजी होगी। समूचे प्रक्षेत्र के भीतरी मुहानों पर एहतियातन पुलिस की विशेष सशस्त्र गश्ती को चौबीसों घंटे के वास्ते सक्रिय संधारित कर दिया गया है।

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