
भागलपुर के जेएलएनएमसी मायागंज अस्पताल में भारत रत्न की जयंती के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर पैथोलॉजी विभाग के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
डॉक्टरों ने पेश की मिसाल
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र कुमार और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर प्रियदर्शी ने स्वयं रक्तदान कर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
डॉ. सत्येंद्र कुमार ने बताया कि रक्तदान महादान है और यह किसी फैक्ट्री में नहीं बनता, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को केवल इंसान ही दे सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह उनका 19वां रक्तदान है और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि स्वास्थ्य लाभ भी होता है।
थैलेसीमिया मरीजों के लिए जीवनदान
डॉ. अंकुर प्रियदर्शी ने कहा कि रक्तदान खास तौर पर उन बच्चों के लिए बेहद जरूरी है, जो थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। समय पर रक्त मिलने से उनकी जिंदगी को बढ़ाया जा सकता है।
फीता काटकर हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. (प्रो.) अशोक भगत ने फीता काटकर किया। इसके बाद बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
डॉ. भगत ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहेब के संदेश—“शिक्षित बनो, संगठित हो और संघर्ष करो”—आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
51 लोगों ने किया रक्तदान
इस शिविर में कुल 51 छात्रों, चिकित्सकों और शिक्षकों ने रक्तदान किया। रक्त अधिकोष के प्रभारी डॉ. अजय प्रताप ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम में डॉ. राकेश कुमार, डॉ. पम्मी रे और डॉ. धर्मेंद्र कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सामाजिक संदेश के साथ आयोजन
यह आयोजन न केवल अंबेडकर जयंती को समर्पित था, बल्कि समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।
कुल मिलाकर, इस पहल ने यह संदेश दिया कि एक छोटा सा कदम किसी की जिंदगी बचाने में बड़ा योगदान दे सकता है।


