भागलपुर : आईजी विवेक कुमार का एक्शन, झूठे केस में पटना के डॉक्टर को फंसाने वाले चार पुलिसकर्मी कार्रवाई के दायरे में

भागलपुर, 13 अक्टूबर — बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। झूठे गवाहों और फर्जी बयानों के आधार पर पटना के एक वरीय डॉक्टर को फंसाने की साजिश में शामिल भागलपुर पुलिस के चार अधिकारियों पर रेंज आईजी विवेक कुमार ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में दोषी पाए जाने के बाद दो इंस्पेक्टर और दो दरोगाओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया गया है।

मामला क्या है

पटना के इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के वरीय चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नवल किशोर सिंह ने शिकायत दी थी कि भागलपुर पुलिस ने उन्हें झूठे केस में फंसाने की साजिश रची। उनका आरोप था कि जांच अधिकारी और थाना स्तर के पुलिसकर्मियों ने जानबूझकर गलत रिपोर्ट दर्ज कराई और फर्जी गवाहों के बयान तैयार कर केस को असत्य श्रेणी में डाल दिया

डॉ. सिंह ने 21 दिसंबर 2024 को कहलगांव निवासी शंकर पाल सहित 15–20 लोगों पर मकान की दीवार तोड़ने, जमीन में जबरन प्रवेश करने और खिड़की उखाड़ने का आरोप लगाते हुए जोगसर थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन पुलिस ने मामले को भूमि विवाद बताकर असत्य घोषित कर दिया और वादी को ही आरोपी बना दिया।

जांच में सामने आया सच

रेंज आईजी विवेक कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र जांच टीम गठित की। जांच में यह सामने आया कि दो स्वतंत्र गवाहों — बासू कुमार और विभाष कुमार — के बयान हूबहू एक जैसे थे, जिससे स्पष्ट हुआ कि बयान बनावटी हैं।
आईजी की समीक्षा में यह भी सामने आया कि गवाह दीपक कुमार ने अपनी गवाही में स्वीकार किया कि वादी (डॉ. सिंह) पटना के निवासी हैं, जबकि आरोपित कहलगांव के, और दोनों में कभी सीधा विवाद नहीं हुआ। इससे पुलिस द्वारा झूठे गवाह तैयार करने की साजिश स्पष्ट हो गई।

दोषी अफसरों पर गिरी गाज

जांच रिपोर्ट आने के बाद आईजी ने चार पुलिस अधिकारियों को दोषी पाया —

  • तत्कालीन विधि-व्यवस्था अंचल इंस्पेक्टर शांता सुमन
  • जोगसर थानाध्यक्ष कृष्णनंदन कुमार सिंह
  • दारोगा राजेश कुमार महतो
  • दारोगा हरिशंकर कश्यप

आईजी ने चारों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने, निलंबन की प्रक्रिया प्रारंभ करने और सेवा अभिलेख में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही एसएसपी को आगे का अनुसंधान पूरा कर केस निष्पादित करने को कहा गया है।

न्यायालय में लंबित मामला

इस बीच, जोगसर थाने द्वारा प्रस्तुत फाइनल रिपोर्ट और अभियोजन की अर्जी पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रकाश कुमार राय ने 25 जून 2025 को डॉ. सिंह के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाने का आदेश दिया था। हालांकि, आईजी की जांच रिपोर्ट आने के बाद अब इस केस में नया मोड़ आ गया है, जिससे डॉ. सिंह को राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।


 

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