
भागलपुर। बिहार के कारा एवं सुधार सेवाओं में व्यापक बदलाव और जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने की दिशा में भागलपुर एक नया केंद्र बनने जा रहा है। जिले में उच्च सुरक्षा कारागार (हाई सिक्योरिटी जेल) और मुक्त कारागार (ओपन जेल) के निर्माण की वर्षों पुरानी प्रतीक्षा अब समाप्त होने वाली है। आगामी 6 मई 2026 को होने वाली एक उच्चस्तरीय विभागीय बैठक में इन योजनाओं के भविष्य का अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस बैठक में भागलपुर के तीन प्रमुख जेल परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा होनी है, जिसमें शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा के भीतर प्रस्तावित नई जेलें और कहलगांव अनुमंडल की उपकारा शामिल हैं। भवन निर्माण विभाग और गृह विभाग (कारा) के अधिकारियों के बीच होने वाली यह वार्ता न केवल बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित होगी, बल्कि बंदियों के सुधार और न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
6 मई की बैठक: रणनीतिक फैसलों का दिन
भागलपुर में कारा सुधार की दिशा में 6 मई का दिन मील का पत्थर साबित हो सकता है। भवन निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख और जेल आईजी इस दिन एक विशेष समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा भागलपुर के परिसर में ‘मुक्त कारागार’ और ‘उच्च सुरक्षा कारागार’ के समेकित प्राक्कलन (एस्टीमेट) को अंतिम रूप देना है। गौरतलब है कि इन दोनों परियोजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति लंबे समय से लंबित थी, जिसके कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था।
अब जेल आईजी और भवन निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख इन प्रस्तावित योजनाओं के प्राक्कलन पर अपनी अंतिम मुहर लगाएंगे। सहायक कारा महानिरीक्षक (मुख्यालय) ने इस संबंध में 14 लंबित एजेंडों की सूची भवन निर्माण विभाग को सौंपी थी, जिस पर प्राथमिकता के आधार पर निर्णय लिया जाना है। अभियंता प्रमुख ने बैठक से पूर्व ही संबंधित कार्यपालक अभियंताओं से प्रगति प्रतिवेदन (प्रोग्रेस रिपोर्ट) तलब कर ली है ताकि 6 मई को किसी भी तकनीकी अड़चन के बिना योजना को हरी झंडी दी जा सके।
शहीद जुब्बा सहनी जेल का नया स्वरूप: ओपन और हाई सिक्योरिटी सेल
भागलपुर की शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा में दो क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहे हैं। पहला है ‘हाई सिक्योरिटी जेल’ का निर्माण, जो विशेष रूप से कुख्यात अपराधियों और आतंकी गतिविधियों में संलिप्त बंदियों को रखने के लिए बनाया जाएगा। यहाँ सुरक्षा के ऐसे आधुनिक मानक अपनाए जाएंगे जो परिंदा भी पर न मार सके की उक्ति को चरितार्थ करेंगे। दूसरा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट ‘ओपन जेल’ यानी मुक्त कारागार का है। ओपन जेल का विचार उन बंदियों के लिए है जिनका आचरण जेल में बहुत अच्छा रहा है और जो समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हैं। यहाँ बंदियों को एक सीमित दायरे में काम करने और परिवार के साथ रहने जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं, जो उनके मानसिक सुधार में सहायक होंगी। इन दोनों जेलों के निर्माण से भागलपुर जेल परिसर की क्षमता और महत्ता दोनों में भारी इजाफा होगा।
कहलगांव उपकारा: हैंडओवर का इंतजार और न्यायिक संकट
बैठक में कहलगांव अनुमंडल में नवनिर्मित उपकारा की स्थिति पर भी गंभीर विमर्श होना है। कहलगांव में उपकारा का निर्माण कार्य तकनीकी रूप से पूरा हो चुका है, लेकिन इसका ‘हैंडओवर’ अभी तक जेल विभाग को नहीं मिल पाया है। इस विभागीय खींचतान का सीधा असर न्याय व्यवस्था और बंदियों की शिफ्टिंग पर पड़ रहा है। उपकारा के शुरू न होने के कारण कहलगांव में बंदियों को शिफ्ट नहीं किया जा पा रहा है, जिसकी वजह से वहां प्रस्तावित ‘सेशन कोर्ट’ (सत्र न्यायालय) भी अभी तक पूरी तरह काम करना शुरू नहीं कर पाया है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि जैसे ही उपकारा जेल विभाग को सुपुर्द कर दी जाएगी, कहलगांव के बंदियों को भागलपुर केंद्रीय कारा से वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। इसके साथ ही कहलगांव में न्यायिक प्रक्रियाएं तेज हो जाएंगी और स्थानीय स्तर पर सेशन ट्रायल शुरू होने से आम जनता और कैदियों दोनों को सहूलियत होगी। 6 मई की बैठक में इस हैंडओवर की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए कड़े निर्देश दिए जा सकते हैं।
प्रदेश स्तर पर जेल सुधार: बक्सर, बेतिया और पोटा केबिन
6 मई की इस बैठक का दायरा केवल भागलपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्य की कई अन्य जेलों के आधुनिकीकरण पर भी चर्चा होगी। बैठक के एजेंडे में बक्सर केंद्रीय कारा के मुख्य गेट के बाहर संसीमन केंद्र (Detention Center) का निर्माण कार्य शामिल है। इसके अलावा, बेतिया मंडल कारा में महिला बंदियों के लिए 132 बेड वाले विशेष बैरक के निर्माण की प्रगति पर भी चर्चा की जाएगी।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से राज्य की 41 अलग-अलग जेलों में ‘प्री-फैब्रिकेटेड पोटा केबिन’ का निर्माण किया जाना है। ये केबिन त्वरित सुरक्षा समाधान और अतिरिक्त निगरानी कक्ष के रूप में उपयोग किए जाएंगे। विभाग इन केबिनों के निर्माण और अन्य सुरक्षात्मक उपकरणों से संबंधित उपयोगिता प्रमाणपत्र (UC) की भी समीक्षा करेगा ताकि भविष्य के बजट आवंटन में कोई बाधा न आए।
कक्षपालों की सुविधा और जर्जर भवनों का निस्तारीकरण
जेल प्रशासन केवल बंदियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां तैनात कर्मियों की कार्यदशा सुधारना भी विभाग की प्राथमिकताओं में है। बैठक में जिलों की जेलों में पुरुष एवं महिला कक्षपालों (Warder) के लिए नए बैरक निर्माण की योजना पर चर्चा होगी। कई जिलों में कक्षपाल जर्जर भवनों या अस्थायी व्यवस्थाओं में रहने को मजबूर हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
इसके साथ ही, राज्य भर की जेलों में स्थित उन पुराने और जर्जर भवनों के निस्तारीकरण (ध्वस्तीकरण) की प्रक्रिया पर भी बात होगी जो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक साबित हो सकते हैं। जिलों को पहले ही इससे संबंधित एजेंडा उपलब्ध करा दिया गया है ताकि वे अपनी जरूरतें स्पष्ट रूप से बता सकें। जेलों के भीतर खाली पड़ी जमीन का बेहतर उपयोग और नए कक्षों का निर्माण भी इस व्यापक योजना का हिस्सा है।
विभागीय पक्ष: कार्यपालक अभियंता का बयान
भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता राकेश रंजन ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि भागलपुर की तीन प्रमुख योजनाओं—ओपन जेल, हाई सिक्योरिटी जेल और कहलगांव उपकारा—पर 6 मई की बैठक में गहन मंथन होगा। उन्होंने बताया कि प्राक्कलन फाइनल होते ही निर्माण की बाधाएं दूर हो जाएंगी। विभाग का लक्ष्य इन योजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करना है ताकि राज्य की जेलों को आधुनिक और सुरक्षित बनाया जा सके।
भागलपुर में इन दो नई जेलों के अस्तित्व में आने से न केवल सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होंगे, बल्कि यह बिहार के कारा इतिहास में एक बड़े सुधारवादी कदम के रूप में भी दर्ज होगा। अब सबकी निगाहें 6 मई की बैठक पर टिकी हैं, जहाँ से इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए ‘ग्रीन सिग्नल’ मिलने की पूरी उम्मीद है।


