
भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद पिछले कुछ दिनों से गंगा पार करने के लिए मिल रही निःशुल्क स्टीमर सेवा अब समाप्त होने जा रही है। जिला प्रशासन ने अब इस जिम्मेदारी से हाथ खींच लिया है, जिसके बाद गुरुवार (14 मई 2026) से यात्रियों और वाहन मालिकों को अपनी जेब ढीली करनी होगी। अब तक प्रशासन द्वारा संचालित स्टीमर मुफ्त थे, लेकिन अब निजी एजेंसियों को कमान सौंपे जाने के बाद बाकायदा टिकट कटानी होगी। हालांकि, मानवीय आधार पर एम्बुलेंस के लिए यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क रहेगी। बुधवार का पूरा दिन एजेंसियों द्वारा जेटी (Ghat Infrastructure) तैयार करने और टिकटों की छपाई में लगा है, जिससे गुरुवार सुबह से विधिवत परिचालन शुरू हो जाएगा।
तीन रूटों पर तीन एजेंसियों का साम्राज्य
जिलाधिकारी ने गंगा की लहरों पर सुचारू यातायात सुनिश्चित करने के लिए तीन अलग-अलग एजेंसियों को मार्ग आवंटित कर दिए हैं:
- जिरिया प्राइवेट लिमिटेड (कटिहार): यह एजेंसी बरारी घाट से जाह्नवी चौक घाट के बीच सेवा देगी। इसके पास 2 फेरी और 4 कार्गो जहाजों का बेड़ा होगा。
- शार्क शिपिंग (भागलपुर): इन्हें कहलगांव घाट से तीनटंगा घाट के बीच परिचालन की जिम्मेदारी मिली है। यहाँ 4 फेरी और 4 कार्गो जहाज चलेंगे。
- कन्हैया लॉजिस्टीक (झारखंड): यह एजेंसी बाबूपुर घाट (सबौर) से महादेवपुर घाट के बीच 2 फेरी और 6 कार्गो जलयान चलाएगी。
नया किराया चार्ट: ₹25 से लेकर ₹5000 तक का सफर
प्रशासन ने मनमानी वसूली को रोकने के लिए एक विस्तृत किराया सूची (Rate Chart) जारी की है। यात्रियों से लेकर भारी ट्रकों तक के लिए दरें तय कर दी गई हैं:
श्रेणी | किराया (रुपये में) |
|---|---|
यात्री (12 वर्ष से ऊपर) | ₹50 |
यात्री (12 वर्ष से नीचे) | ₹25 |
साइकिल (लोडेड) | ₹50 |
मोटर साइकिल | ₹50 |
तीन पहिया टोटो/ऑटो | ₹150 |
जीप / कार / टैक्सी | ₹700 |
10 चक्का ट्रक (लोडेड) | ₹3800 |
18 चक्का ट्रक (लोडेड) | ₹5000 |
एम्बुलेंस | निःशुल्क (FREE) |
नियमों की लक्ष्मण रेखा: उल्लंघन पर जेल की तैयारी
जिलाधिकारी ने जहाज संचालकों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन न करने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी:
- समय सीमा: स्टीमर का परिचालन केवल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच होगा। अंधेरे में गंगा पार करना प्रतिबंधित है。
- क्षमता: बैठने की क्षमता से एक भी अधिक यात्री या वाहन नहीं चढ़ाया जा सकेगा。
- सुरक्षा: प्रत्येक जलयान पर लाइफ जैकेट, हवा वाली ट्यूब और पर्याप्त रस्सियाँ होना अनिवार्य है。
- पारदर्शिता: सभी घाटों और टिकट काउंटरों पर सीमेंटेड बोर्ड या फ्लेक्स पर किराया सूची पेन्ट कराना होगा ताकि यात्रियों से अधिक वसूली न हो सके。
- राजस्व: वसूल की गई कुल राशि का 30 प्रतिशत हिस्सा प्रतिदिन शाम 6:30 बजे तक सरकारी खजाने में जमा करना होगा。
आम जनता पर असर
विक्रमशिला सेतु बंद होने से वैसे ही व्यापार और आवागमन प्रभावित है, ऐसे में अब ₹50 प्रति व्यक्ति का किराया आम लोगों, विशेषकर दैनिक कामगारों और छोटे व्यापारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित होगा। हालांकि, प्रशासन का तर्क है कि निजी निवेश के बिना भारी वाहनों (कार्गो) को पार करना संभव नहीं था। अब यह देखना होगा कि कल से शुरू होने वाली इस सशुल्क सेवा में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा का कितना ध्यान रखा जाता है।


