भागलपुर में मछली पालन को लगेंगे पंख: 57 मत्स्यपालकों को मिले हाईटेक वाहन और उपकरण, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

भागलपुर। जिले के मत्स्यपालकों और मछुआरा समुदाय के जीवन में खुशहाली लाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। बुधवार को समीक्षा भवन परिसर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने ‘मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना’ और ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत चयनित 57 लाभार्थियों के बीच आधुनिक उपकरणों, वाहनों की चाबियां और प्रमाण पत्रों का वितरण किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना और मछुआरा समुदाय को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कर सीधे बाजार से जोड़ना है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मत्स्यजीवी, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने सरकार के इस कदम को ऐतिहासिक बताया।

मछुआरा समुदाय को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने का संकल्प

​जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार सरकार का विजन मछुआरा समुदाय और अनुसूचित जनजाति के मत्स्य कृषकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब वह समय बीत गया जब मछली पालन केवल एक पारंपरिक व्यवसाय था; अब इसे एक व्यवस्थित उद्योग के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार का पूरा ध्यान मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ उसके भंडारण, सुरक्षित परिवहन और बेहतर विपणन (मार्केटिंग) व्यवस्था पर है। जब तक मछुआरों के पास अपने उत्पाद को ताजा रखने के लिए आइस बॉक्स और तेज परिवहन के लिए वाहन नहीं होंगे, तब तक वे अपनी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त नहीं कर पाएंगे।

​उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि जरूरतमंद मछुआरों को निःशुल्क और भारी अनुदान पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि बाजार में उनके उत्पाद की मांग और कीमत दोनों में इजाफा होगा। नवल किशोर चौधरी ने लाभार्थियों से अपील की कि वे इन संसाधनों का सही उपयोग करें और स्वरोजगार के माध्यम से जिले के विकास में भागीदार बनें।

मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना: जलयानों और वाहनों का वितरण

​इस योजना के अंतर्गत मछुआरों को शिकारमाही और मछली बेचने के लिए विशेष किट प्रदान की गई। वितरण का मुख्य आकर्षण वे वाहन रहे जो आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं।

  • थ्री व्हीलर सह-आइस बॉक्स: कुल 16 लाभार्थियों को तिपहिया वाहन प्रदान किए गए, जिनमें पीछे आइस बॉक्स लगा हुआ है। इससे मछलियों को सड़ने से बचाया जा सकेगा और उन्हें हाईजेनिक स्थिति में दूर के बाजारों तक पहुँचाया जा सकेगा।
  • नाव एवं जाल पैकेज: जल क्षेत्रों में मछली पकड़ने की क्षमता बढ़ाने के लिए 5 लाभार्थियों को लकड़ी की नाव (फिशिंग उडेन बोट) का पैकेज दिया गया।
  • एफआरपी बोट: आधुनिक तकनीक से बनी 20 फिशिंग एफआरपी बोट का वितरण किया गया, जो टिकाऊ और हल्की हैं।
  • कास्ट जाल: 5 लाभार्थियों को उन्नत किस्म के कास्ट जाल पैकेज दिए गए, ताकि वे अपने शिकारमाही के अनुभव को और बेहतर बना सकें।

​इन सभी योजनाओं पर सरकार द्वारा लाखों रुपये का अनुदान दिया गया है, जिससे गरीब मछुआरों को बिना किसी बड़े वित्तीय बोझ के महंगे संसाधन उपलब्ध हो सके हैं।

धरती आबा अभियान: जनजातीय समुदाय का सशक्तिकरण

​अनुसूचित जनजाति वर्ग के मत्स्य कृषकों के लिए ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत विशेष वितरण किया गया। इस अभियान का उद्देश्य उन क्षेत्रों के जनजातीय लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना है जहाँ मछली पालन की अपार संभावनाएं हैं।

  • मोटरसाइकिल सह-आइस बॉक्स: 15 लाभार्थियों को बाइक के साथ आइस बॉक्स दिया गया, जिससे वे गली-मुहल्लों और दूर-दराज के गांवों में ताजा मछली की होम डिलीवरी कर सकेंगे।
  • साइकिल सह-आइस बॉक्स: 10 लाभार्थियों को साइकिल आधारित आइस बॉक्स दिए गए, जो छोटे विक्रेताओं के लिए बेहद उपयोगी हैं।
  • अन्य वाहन: 6 थ्री व्हीलर सह-आइस बॉक्स और 2 मोबाइल फिश किऑस्क भी प्रदान किए गए। मोबाइल फिश किऑस्क छोटे स्टॉल की तरह कार्य करेंगे, जहाँ से लोग साफ-सफाई के साथ मछली खरीद पाएंगे।

पारदर्शिता और भविष्य की योजनाएं

​कार्यक्रम के दौरान विभागीय अधिकारियों ने बताया कि लाभार्थियों के चयन में पूर्ण पारदर्शिता बरती गई है। विभाग को ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच करने के बाद ही पात्र लोगों को चुना गया। वर्तमान में विभाग से प्राप्त 65 प्रतिशत वित्तीय आवंटन के विरुद्ध शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। शेष 35 प्रतिशत राशि प्राप्त होते ही वेटिंग लिस्ट में मौजूद अन्य लाभार्थियों को भी लाभान्वित किया जाएगा।

​प्रशासन ने केवल वितरण तक ही अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी है, बल्कि भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम शुरू कर दिया है। वर्ष 2026-27 के लिए जिले में 5 आधुनिक मत्स्य बिक्री केंद्रों (Fresh Catch Kiosk) के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। भागलपुर नगर निगम ने इसके लिए उपयुक्त स्थानों को चिन्हित कर लिया है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। ये केंद्र शहरवासियों के लिए ताजा और स्वच्छ मछली प्राप्त करने का मुख्य स्थान बनेंगे।

​इसके अतिरिक्त, जिले के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना ‘इंटीग्रेटेड तिलापिया प्रोसेसिंग प्लांट’ की स्वीकृति भी प्राप्त हो गई है। जिलाधिकारी ने जगतपुर ढाब क्षेत्र में भूमि की पैमाइश कराने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया है, ताकि इस प्लांट का निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू किया जा सके। यह प्लांट लगने से जिले में उत्पादित मछली का प्रसंस्करण स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी

​इस महत्वपूर्ण अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे जिन्होंने लाभार्थियों का उत्साहवर्धन किया। वितरण प्रक्रिया में सुल्तानगंज के विधायक ललित नारायण मंडल, नाथनगर के विधायक मिथुन कुमार और भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने हिस्सा लिया। उनके अलावा जिला परिषद अध्यक्ष विपिन कुमार मंडल, भागलपुर नगर निगम की महापौर वसुंधरा लाल, उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, जिला परिषद उपाध्यक्ष प्रणव कुमार और उप महापौर मोहम्मद सलाउद्दीन अंसारी ने भी लाभार्थियों को प्रमाण पत्र और चाबियां सौंपीं। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ये योजनाएं ग्रामीण बिहार की तस्वीर बदलने वाली हैं और इससे अनुसूचित जनजाति व मछुआरा समुदाय के सामाजिक-आर्थिक स्तर में बड़ा सुधार आएगा। जिला मत्स्य पदाधिकारी और उनकी टीम ने कार्यक्रम के सफल संचालन में मुख्य भूमिका निभाई।

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