बिहार में शराबबंदी कानून का सख्त प्रहार: भागलपुर विशेष उत्पाद न्यायालय ने दो अलग-अलग मामलों में दोषियों को सुनाई 5-5 साल की सजा; भारी जुर्माने के साथ कानून तोड़ने वालों को कड़ा संदेश

भागलपुर/नवगछिया। बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को धरातल पर उतारने और तस्करों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए राज्य सरकार और न्यायपालिका की सक्रियता अब रंग लाने लगी है। भागलपुर जिले के नवगछिया स्थित विशेष उत्पाद न्यायालय (कैंप कोर्ट) ने न्याय और कानून की सर्वोच्चता को सिद्ध करते हुए दो अलग-अलग शराब तस्करी के मामलों में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष उत्पाद न्यायालय के न्यायाधीश शिव कुमार शर्मा (जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-12) ने इन मामलों की सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध अभियुक्तों को न केवल जेल की सलाखों के पीछे भेजा है, बल्कि उन पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो राज्य में प्रतिबंधित पदार्थों के अवैध व्यापार के जरिए अपनी तिजोरी भरने का प्रयास करते हैं। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि शराबबंदी केवल एक नीति नहीं, बल्कि एक सामाजिक व्यवस्था है, जिसका उल्लंघन करने वालों को कानून की कठोरता का सामना करना ही होगा।

पहला मामला: भूसा घर में छिपाई गई थी मौत की खेप; नवीन कुमार को मिली सजा

​कानूनी कार्यवाही के पहले मामले में नवगछिया थाना कांड संख्या 258/2022 और विशेष उत्पाद वाद संख्या 2470/2022 पर सुनवाई की गई। इस मामले का मुख्य अभियुक्त नवीन कुमार था। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने उसे बिहार मध्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 की धारा 30(ए) के अंतर्गत दोषी पाया।

​घटनाक्रम के अनुसार, एएलटीएफ (Anti-Liquor Task Force) के प्रभारी जय प्रकाश पंडित को एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि ग्राम मधतपुर में अवैध रूप से देशी शराब का संग्रहण और विक्रय किया जा रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने त्वरित छापेमारी की। तलाशी के दौरान अभियुक्त नवीन कुमार के घर के पास स्थित भूसा घर से जार और गैलन में भरी हुई कुल 25 लीटर देशी शराब बरामद की गई। इसके अतिरिक्त अन्य संदिग्धों के ठिकानों से शराब निर्माण के उपकरण भी प्राप्त हुए थे।

​न्यायाधीश शिव कुमार शर्मा ने इस मामले में नवीन कुमार को 05 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर ₹1,00,000/- (एक लाख रुपये) का जुर्माना भी लगाया गया है। कानून की कड़ाई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यदि अभियुक्त जुर्माना अदा करने में विफल रहता है, तो उसे 06 माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। हालांकि, इसी मामले के सह-अभियुक्तों सावन कुमार सिंह और गनौरी सिंह को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण न्यायालय ने पहले ही संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया था। यह दर्शाता है कि न्यायालय साक्ष्यों की सुक्ष्मता से जांच कर केवल वास्तविक अपराधियों को ही दंडित कर रहा है।

दूसरा मामला: लग्जरी वाहन से हो रही थी तस्करी; वाहन स्वामी को नहीं मिली राहत

​न्यायालय के समक्ष आया दूसरा मामला आधुनिक तस्करी के तरीकों पर प्रहार करता है। नवगछिया कांड संख्या 337/2024 एवं विशेष उत्पाद वाद संख्या 3756/2024 में एक महिंद्रा बोलेरो मैक्स पिकअप (पंजीयन संख्या BR-11GF-1446) का उपयोग भारी मात्रा में विदेशी शराब की खेप ले जाने के लिए किया जा रहा था। पुलिस को जब इस संदिग्ध वाहन की सूचना मिली, तो उसका पीछा किया गया। अंधेरे और भौगोलिक स्थितियों का लाभ उठाकर वाहन पर सवार दो व्यक्ति तो भागने में सफल रहे, लेकिन पुलिस ने जब वाहन की तलाशी ली, तो उसमें से विभिन्न ब्रांडों की कुल 465 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई।

​इस मामले में पुलिस ने वाहन से प्राप्त ‘ऑनर बुक कार्ड’ और अन्य दस्तावेजों के आधार पर वाहन स्वामी की पहचान मनीष कुमार के रूप में की। चूंकि वाहन का उपयोग अवैध गतिविधि के लिए किया गया था और वाहन स्वामी अपनी निर्दोषता सिद्ध करने में विफल रहा, इसलिए न्यायालय ने मनीष कुमार को मुख्य उत्तरदायी माना। इस मामले में भी न्यायाधीश ने कड़ा रुख अपनाते हुए मनीष कुमार को 05 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹1,00,000/- जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे भी 06 माह की अतिरिक्त कैद काटनी होगी। यह फैसला उन वाहन स्वामियों के लिए एक सबक है जो अपने वाहनों को बिना पूरी जांच-पड़ताल के या लालच में आकर तस्करों के हवाले कर देते हैं।

अभियोजन पक्ष की दलीलें और कानूनी टीम की सक्रियता

​इन दोनों ही मामलों में राज्य सरकार और कानून का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में विशेष लोक अभियोजक भोला कुमार मंडल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने न्यायालय के समक्ष बिंदुवार तरीके से पुलिस की छापेमारी, बरामदगी की प्रक्रिया और अभियुक्तों की संलिप्तता को उजागर किया। मंडल ने अपनी दलीलों में इस बात पर जोर दिया कि शराबबंदी कानून की सफलता के लिए तस्करों को कड़ी सजा मिलना अनिवार्य है ताकि समाज में कानून का डर बना रहे।

​बहस के दौरान उनका सहयोग अधिवक्ता राजेंद्र कुमार, रविरंजन कुमार और पिंटू कुमार सिंह ने किया। इस पूरी कानूनी टीम की मुस्तैदी का ही परिणाम रहा कि पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों को न्यायालय ने पर्याप्त माना और अभियुक्तों को सजा तक पहुँचाया। विशेष लोक अभियोजक ने फैसले के बाद कहा कि यह न्याय की जीत है और उन पुलिस अधिकारियों के मनोबल को बढ़ाने वाली है जो अपनी जान जोखिम में डालकर इन तस्करों को पकड़ते हैं।

बिहार मध्यनिषेध अधिनियम: समाज सुधार की दिशा में एक कदम

​बिहार में वर्ष 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून को लेकर अक्सर बहस होती रहती है, लेकिन नवगछिया न्यायालय के ये फैसले बताते हैं कि कानूनी स्तर पर इसके कार्यान्वयन में कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही है। उत्पाद अधिनियम की धारा 30(ए) के तहत दी गई यह सजा यह स्पष्ट करती है कि शराब का भंडारण, परिवहन या विक्रय करना एक गंभीर संज्ञेय अपराध है।

​अक्सर अपराधी यह सोचते हैं कि वे छोटी मात्रा में या गुप्त स्थानों पर शराब छिपाकर बच जाएंगे, लेकिन नवीन कुमार के भूसा घर से हुई बरामदगी और उस पर मिली 5 साल की जेल ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। वहीं मनीष कुमार का मामला यह सिद्ध करता है कि केवल मौके से फरार हो जाना अपराधी को बचा नहीं सकता; यदि आपके नाम पर पंजीकृत वाहन का उपयोग तस्करी में हुआ है, तो जिम्मेदारी आपकी ही तय होगी।

सुशासन और न्याय की संयुक्त विजय

​भागलपुर और नवगछिया के इन दो फैसलों ने स्थानीय स्तर पर शराब माफियाओं के बीच हड़कंप मचा दिया है। 5 साल का सश्रम कारावास एक लंबी अवधि होती है, जो किसी भी अपराधी के सामाजिक और पारिवारिक जीवन को अस्त-व्यस्त करने के लिए पर्याप्त है। साथ ही, 1 लाख रुपये का जुर्माना आर्थिक चोट पहुँचाने का एक प्रभावी जरिया है।

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