
मुख्य बिंदु:
- रणनीतिक पहल: भागलपुर रेंज के आईजी विवेक कुमार ने साइबर अपराध को जड़ से मिटाने के लिए डाक विभाग के साथ मिलाया हाथ।
- क्षेत्रीय कवरेज: पूर्वी क्षेत्र (Eastern Region) के 14 जिलों के डाक अधीक्षकों और पोस्टमैन के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन।
- ग्रामीण सुरक्षा: गांव-गांव तक पहुँच रखने वाले पोस्टमैन अब ग्रामीणों को डिजिटल ठगी से बचाने के लिए करेंगे जागरूक।
- संदिग्ध खातों पर नजर: पोस्ट ऑफिस के बचत खातों का उपयोग ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ या फ्रॉड के लिए न हो, इसके लिए आईजी ने दिए सख्त निर्देश।
- पुलिस-डाक समन्वय: साइबर सेल और डाक विभाग के बीच सूचना साझा करने के लिए ‘रियल-टाइम’ नेटवर्क बनाने पर सहमति।
भागलपुर। जैसे-जैसे तकनीक हमारे जीवन को सुगम बना रही है, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों के जाल भी उतने ही जटिल होते जा रहे हैं। बिहार के भागलपुर और आसपास के जिलों में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के मामलों को देखते हुए अब पुलिस प्रशासन ने एक ऐसी रणनीति तैयार की है जो सीधे तौर पर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगी। भागलपुर रेंज के आईजी विवेक कुमार ने शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को साइबर सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए डाक विभाग (पोस्टल डिपार्टमेंट) के साथ एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक की। आईजी ने इस बात को गहराई से समझा है कि शहरों में तो लोग फिर भी थोड़े जागरूक हैं, लेकिन असली खतरा हमारे ग्रामीण इलाकों में है, जहाँ मासूम लोग अपनी मेहनत की कमाई पोस्ट ऑफिस के खातों में जमा करते हैं। विवेक कुमार का यह कदम उन अपराधियों के लिए एक बड़ी चुनौती है जो बैंकों के बाद अब पोस्ट ऑफिस पेमेंट बैंक (IPPB) और बचत खातों को अपना निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
पोस्टमैन: डिजिटल सुरक्षा के नए ‘पहरेदार’
आईजी विवेक कुमार ने डाक विभाग के पूर्वी क्षेत्र से जुड़े 14 जिलों के डाक अधीक्षकों को संबोधित करते हुए एक बहुत ही मार्मिक और रणनीतिक बात कही। उन्होंने कहा कि एक पोस्टमैन केवल चिट्ठियां या पार्सल नहीं पहुँचाता, बल्कि वह ग्रामीण समाज का सबसे विश्वसनीय हिस्सा होता है। गांव का हर व्यक्ति पोस्टमैन को जानता है और उन पर अटूट भरोसा करता है। आईजी का विजन है कि इसी भरोसे को ‘साइबर सुरक्षा कवच’ के रूप में इस्तेमाल किया जाए।
विवेक कुमार ने निर्देश दिया कि पोस्टमैन जब भी गांव के किसी घर में जाएं, तो वे केवल अपनी आधिकारिक ड्यूटी न करें, बल्कि चलते-फिरते जागरूकता दूत की भूमिका भी निभाएं। वे ग्रामीणों को समझाएं कि किसी को भी अपना ओटीपी (OTP), पिन (PIN) या आधार नंबर न बताएं। पोस्टमैन को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे बुजुर्गों और कम पढ़े-लिखे लोगों को बताएं कि ‘लॉटरी’ या ‘इनाम’ के नाम पर आने वाले फोन कॉल असल में उनकी जमापूंजी लूटने का जरिया हैं।
संदिग्ध लेन-देन पर ‘डिजिटल रेडार’: आईजी की सख्त चेतावनी
बैठक के दौरान आईजी विवेक कुमार ने एक गंभीर तकनीकी पहलू पर भी चर्चा की। अक्सर देखा गया है कि साइबर ठग मासूम ग्रामीणों के पोस्ट ऑफिस खातों का उपयोग ठगी की रकम को इधर-उधर करने (Money Trail) के लिए करते हैं। आईजी ने डाक अधीक्षकों को सख्त हिदायत दी कि वे अपने सिस्टम में ऐसे ‘रेड फ्लैग’ (Red Flag) सेट करें जो किसी भी संदिग्ध या असामान्य लेन-देन को तुरंत पकड़ सकें।
उन्होंने कहा कि अगर किसी ऐसे खाते में अचानक बड़ी रकम आती है जो सालों से निष्क्रिय था, या अगर एक ही पते पर कई संदिग्ध खाते खोले गए हैं, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या जिले के साइबर सेल को दी जाए। विवेक कुमार ने स्पष्ट किया कि केवाईसी (KYC) नियमों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पोस्टल अधिकारियों से कहा कि वे अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें ताकि वे ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के जरिए होने वाली ठगी के पैटर्न्स को पहचान सकें।
14 जिलों का नेटवर्क: एक बड़ा सुरक्षा घेरा
इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें भागलपुर, बांका सहित पूर्वी बिहार के 14 जिलों के डाक अधीक्षक शामिल हुए थे। यह एक बहुत बड़ा भौगोलिक क्षेत्र है जहाँ की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब भी पारंपरिक डाक सेवाओं और पोस्ट ऑफिस बैंकिंग पर निर्भर है। विवेक कुमार ने इस नेटवर्क को पुलिस के लिए एक ‘फर्स्ट रिस्पॉन्स टीम’ की तरह तैयार करने का निर्देश दिया है।
आईजी ने कहा कि पुलिस और डाक विभाग के बीच अब ‘रियल-टाइम’ समन्वय (Coordination) होगा। यदि किसी व्यक्ति के साथ ठगी होती है और वह पोस्ट ऑफिस के माध्यम से हुई है, तो पुलिस को अब लंबी कागजी कार्रवाई का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। डाक विभाग के अधिकारी तुरंत उस खाते को ‘फ्रीज’ करने और ट्रांजेक्शन डिटेल्स साझा करने में पुलिस की मदद करेंगे।
साइबर सेल का ‘कवच’: पुलिस हर कदम पर साथ
आईजी विवेक कुमार ने डाक विभाग के कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। उन्होंने कहा— “पुलिस विभाग का साइबर सेल हर परिस्थिति में पोस्टल विभाग के साथ खड़ा है।” आईजी ने घोषणा की कि पुलिस के साइबर विशेषज्ञ डाक विभाग के कर्मचारियों के लिए विशेष ‘ट्रेनिंग मॉड्यूल’ तैयार करेंगे। इसमें बताया जाएगा कि कैसे आधुनिक सॉफ्टवेयर और एआई (AI) का उपयोग कर अपराधियों के लोकेशन और उनके मोडस ऑपरेंडी (काम करने के तरीके) को समझा जा सकता है।
विवेक कुमार ने सुझाव दिया कि पोस्ट ऑफिस के बाहर और भीतर बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर लगाए जाएं जिन पर स्थानीय साइबर थाने का नंबर और नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) प्रमुखता से लिखा हो। उन्होंने यह भी कहा कि डाक विभाग के अधिकारी समय-समय पर ‘डिजिटल साक्षरता शिविर’ लगाएं, जिसमें पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहकर लोगों के सवालों के जवाब देंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने की चुनौती
बिहार के ग्रामीण इलाकों में वित्तीय साक्षरता की कमी हमेशा से एक चुनौती रही है। हाल के दिनों में ‘डिजिटल इंडिया’ की प्रगति के साथ-साथ साइबर फ्रॉड के मामलों में भी वृद्धि हुई है। विवेक कुमार ने रेखांकित किया कि अगर एक गरीब किसान या विधवा महिला की पेंशन की राशि पोस्ट ऑफिस खाते से गायब होती है, तो यह केवल एक आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह उस व्यक्ति के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
आईजी ने कहा कि अपराधियों का गिरोह अब झारखंड के जामताड़ा या देवघर जैसे इलाकों से निकलकर बिहार के सीमावर्ती गांवों में अपनी जड़ें जमा रहा है। वे स्थानीय लोगों को लालच देकर उनके खातों को किराए पर लेते हैं। पोस्टमैन को इस बात पर भी नजर रखने को कहा गया है कि उनके क्षेत्र में कौन से युवा अचानक बिना किसी काम के महंगी गाड़ियों या जीवनशैली का प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि ये ‘साइबर सिंडिकेट’ के प्यादे हो सकते हैं।
सुशासन और डिजिटल सुरक्षा का नया अध्याय
आईजी विवेक कुमार का यह कदम भागलपुर रेंज में सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। पुलिस और डाक विभाग का यह अभूतपूर्व समन्वय अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए पर्याप्त है। जब एक पोस्टमैन गांव की चौपाल पर बैठकर यह बताएगा कि “साहब, पुलिस ने कहा है कि कोई लिंक नहीं खोलना है,” तो उस बात का असर किसी विज्ञापन से कहीं अधिक होगा।
विवेक कुमार ने इस बैठक के जरिए यह संदेश दे दिया है कि साइबर अपराध के खिलाफ जंग केवल बंद कमरों या कंप्यूटर के सामने बैठकर नहीं लड़ी जा सकती, बल्कि इसके लिए जमीन पर मौजूद हर ‘मानवीय संसाधन’ का उपयोग करना होगा। भागलपुर की जनता के लिए यह राहत की खबर है कि उनका पुलिस प्रशासन न केवल अपराधियों को पकड़ने में सक्रिय है, बल्कि उन्हें ठगी का शिकार होने से बचाने के लिए भी नए-नए रास्तों की तलाश कर रहा है।


