​भागलपुर डीएम का कड़ा रुख: फाइलों में कैद ‘जनता के दर्द’ पर 48 घंटे का अल्टीमेटम; बुधवार तक निपटाएं सभी लंबित मामले

भागलपुर। जिले के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों फाइलों की धूल झाड़ने और लंबित मामलों को रद्दी की टोकरी से बाहर निकाल कर उनके समाधान की मुहिम तेज हो गई है। सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को भागलपुर के समीक्षा भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक ने जिले के तमाम अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने जन सुनवाई के दौरान आए उन परिवादों (शिकायतों) पर कड़ी नाराजगी जताई है जो लंबे समय से विभिन्न दफ्तरों में लंबित हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट और सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि जनता की समस्याओं को फाइलों में दबाकर रखना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रखंडों और अंचलों के वरीय पदाधिकारियों को मात्र दो दिनों का समय दिया है। यानी आगामी बुधवार तक जिले के सभी लंबित जन-शिकायतों का निष्पादन सुनिश्चित करना होगा। जिलाधिकारी की इस सक्रियता ने यह साफ संदेश दे दिया है कि ‘सुशासन’ केवल नारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे धरातल पर समयबद्ध तरीके से उतारना होगा।

फाइलों पर ‘डेडलाइन’ का पहरा: बुधवार तक का अल्टीमेटम

​समीक्षा भवन में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य उन शिकायतों का निपटारा करना था जो आम नागरिकों ने जन सुनवाई या लोक शिकायत निवारण प्रणाली के तहत दर्ज कराई थीं। जिलाधिकारी ने बारी-बारी से सभी प्रखंडों के वरीय पदाधिकारियों से उनके प्रभार वाले क्षेत्रों की स्थिति रिपोर्ट मांगी। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई ऐसे मामले हैं जो केवल छोटी-मोटी तकनीकी बाधाओं या अधिकारियों की उदासीनता के कारण अटके हुए हैं।

​डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने कहा कि “प्रशासन का काम जनता की समस्याओं को टालना नहीं, बल्कि उनका हल निकालना है।” उन्होंने निर्देश दिया कि राजस्व, आपदा प्रबंधन और लोक शिकायत निवारण से संबंधित जितने भी मामले प्रखंड और अंचल स्तर पर लंबित हैं, उन्हें हर हाल में बुधवार तक निष्पादित कर उसकी रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपी जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर फाइलों का निस्तारण नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

अनुमंडलवार लंबित मामलों की स्थिति: सदर से नवगछिया तक का हिसाब

​बैठक में तीनों अनुमंडल पदाधिकारियों (SDO) को उनके क्षेत्र में लंबित मामलों की त्वरित गति से समीक्षा करने को कहा गया। जिलाधिकारी ने अनुमंडलवार आंकड़ों पर गौर करते हुए अधिकारियों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने की हिदायत दी। सदर अनुमंडल की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए अन्य क्षेत्रों को भी इसी रफ्तार से काम करने का निर्देश दिया गया।

अनुमंडलवार लंबित परिवादों की वर्तमान स्थिति:

अनुमंडल का नाम

कुल लंबित मामले (प्रारंभिक)

निष्पादित मामले

शेष लंबित मामले

अनुमंडल सदर

61

30

31

कहलगांव

22

22

नवगछिया

21

21

अनुमंडल पदाधिकारी सदर विकास कुमार ने बैठक में जानकारी दी कि सदर अनुमंडल में कुल 61 मामलों में से 30 का निष्पादन किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने शेष 31 मामलों को भी अगले 48 घंटों में समाप्त करने को कहा। वहीं, कहलगांव और नवगछिया के अनुमंडल पदाधिकारियों को विशेष रूप से सक्रिय होने को कहा गया क्योंकि वहां के आंकड़ों में तत्काल सुधार की आवश्यकता महसूस की गई।

स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग: औचक निरीक्षण और जांच प्रतिवेदन पर जोर

​जिलाधिकारी ने केवल राजस्व और प्रशासनिक मामलों पर ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन से जुड़े स्वास्थ्य और शिक्षा विभागों पर भी पैनी नजर रखी। सिविल सर्जन भागलपुर डॉक्टर अशोक प्रसाद को निर्देश दिया गया कि वे जिले के अस्पतालों की व्यवस्था को सुधारने के लिए नियमित रूप से औचक निरीक्षण करवाएं। अक्सर यह शिकायत मिलती है कि अस्पतालों में डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मी समय पर उपलब्ध नहीं होते, या फिर मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं में कोताही बरती जाती है।

​इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के जितने भी पुराने जांच प्रतिवेदन (Reports) लंबित हैं, उन्हें तत्काल निष्पादित करने के आदेश दिए गए। शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को सख्त निर्देश दिए कि शिक्षकों से संबंधित जितने भी सेवा निवृत्ति, वेतन या अन्य विभागीय मामले लंबित हैं, उनका निष्पादन त्वरित गति से किया जाए। जिलाधिकारी का मानना है कि यदि शिक्षक और स्वास्थ्य कर्मी अपनी समस्याओं में उलझे रहेंगे, तो वे समाज को बेहतर सेवा नहीं दे पाएंगे।

अग्नि पीड़ितों को राहत: 24 घंटे में मुआवजा और अनुग्रह अनुदान

​बैठक का एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा ‘आपदा प्रबंधन’ से जुड़ा था। वर्तमान गर्मी के मौसम में अगलगी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिलाधिकारी ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सख्त गाइडलाइन जारी की। अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन ने बैठक में जानकारी दी कि अग्नि पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता के रूप में 12,000 रुपये की अनुग्रह अनुदान राशि दी जानी है।

​इस राशि में पीड़ितों के लिए वस्त्र और बर्तन की खरीद का प्रावधान शामिल है। जिलाधिकारी ने सभी अंचल अधिकारियों (CO) को निर्देश दिया कि अगलगी की घटना होने पर न केवल 12,000 रुपये की राशि, बल्कि उन्हें तत्काल ‘पॉलीथिन शीट’ और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह रहा कि घटना के 24 घंटे के अंदर हर हाल में मुआवजा अनुदान की राशि पीड़ित के खाते में या उन्हें मिल जानी चाहिए। आपदा प्रबंधन में होने वाली देरी को जिलाधिकारी ने अक्षम्य माना और अंचल अधिकारियों को इस पर कड़ाई से अमल करने को कहा।

प्रशासनिक समन्वय और उच्चाधिकारियों की मौजूदगी

​समीक्षा भवन की इस बैठक में भागलपुर प्रशासन का पूरा ‘थिंक टैंक’ मौजूद था। उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम, संयुक्त निदेशक जनसंपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता सहित तमाम विभागों के प्रमुखों ने इस विचार-मंथन में हिस्सा लिया। बैठक के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय (Coordination) की कोई कमी न रहे। अक्सर एक विभाग की फाइल दूसरे विभाग में अटकी रहने के कारण जनता को परेशानी होती है, जिसे दूर करने के लिए जिलाधिकारी ने सीधी संवाद प्रक्रिया अपनाने को कहा।

​अपर समाहर्ता राजस्व को निर्देश दिया गया कि वे अपने स्तर से अंचल अधिकारियों की निगरानी करें, खासकर दाखिल-खारिज और भूमि विवाद से जुड़े लंबित मामलों में। जिलाधिकारी ने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल फाइलों को एक टेबल से दूसरे टेबल तक पहुँचाना नहीं है, बल्कि उस नागरिक के चेहरे पर मुस्कान लाना है जो उम्मीद लेकर सरकारी दफ्तर आता है।

समीक्षा बैठक का संदेश: जनता ही सर्वोपरि

​20 अप्रैल 2026 की यह बैठक भागलपुर के प्रशासनिक इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे ‘पेंडेंसी’ (लंबित मामले) के पक्षधर नहीं हैं। बुधवार तक का समय देकर उन्होंने अधिकारियों के सामने एक चुनौती पेश की है। स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा और राजस्व—इन चारों स्तंभों पर एक साथ प्रहार कर प्रशासन ने अपनी प्राथमिकताएं तय कर दी हैं।

​अग्नि पीड़ितों के लिए 24 घंटे के भीतर मुआवजे का निर्देश यह दर्शाता है कि प्रशासन अब केवल नियमों की आड़ में नहीं छिपेगा, बल्कि संवेदनशीलता के साथ काम करेगा। आने वाले दो दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भागलपुर का प्रशासनिक अमला इस ‘अल्टीमेटम’ को कितनी गंभीरता से लेता है और बुधवार की शाम तक कितनी फाइलें अपनी मंजिल तक पहुँच पाती हैं। फिलहाल, समीक्षा भवन से निकला यह आदेश जिले के हर प्रखंड और अंचल कार्यालय तक पहुँच चुका है, जहाँ अब लंबित कार्यों के निष्पादन की जंग शुरू हो गई है।

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