भागलपुर समाहरणालय में ‘सबका सम्मान- जीवन आसान’ की गूँज: जिलाधिकारी ने सुनी 20 फरियादियों की व्यथा; पेंशन और जमीन विवाद के समाधान पर जोर

भागलपुर। बिहार सरकार की महात्वाकांक्षी योजना ‘7 निश्चय पार्ट-3’ के तहत प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विकास की परिभाषा को केवल ईंट-पत्थर और सड़कों तक सीमित न रखकर अब इसे सीधे ‘जनता के सम्मान’ और ‘प्रशासनिक सुगमता’ से जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को भागलपुर समाहरणालय में ‘सबका सम्मान- जीवन आसान’ (Ease of Living) पहल के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण जन-सुनवाई का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने स्वयं अपने कार्यालय कक्ष में जिले के विभिन्न सुदूर अंचलों से आए लगभग 20 आम जनों के आवेदनों पर गहन सुनवाई की। यह आयोजन केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह उस विश्वास की बहाली का प्रयास था जहाँ एक साधारण नागरिक सीधे जिले के सर्वोच्च अधिकारी के सामने अपनी पीड़ा रख सकता है। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने न केवल समस्याओं को सुना, बल्कि संबंधित अधिकारियों को समय सीमा के भीतर निष्पादन के कड़े निर्देश भी दिए।

7 निश्चय 3 का विजन: विकास से आगे बढ़कर ‘जीवन सुगमता’ की ओर

​बिहार सरकार का ‘7 निश्चय 3’ कार्यक्रम ‘अपना बिहार’ के गौरव को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके अंतर्गत ‘सबका सम्मान- जीवन आसान’ (Ease of Living) को प्राथमिकता दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए आम आदमी को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और उनकी शिकायतों का निस्तारण सम्मानजनक तरीके से हो। भागलपुर समाहरणालय में आयोजित आज की सुनवाई इसी दर्शन को धरातल पर उतारने की एक कोशिश थी।

​जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने सुनवाई के दौरान पाया कि अधिकांश मामले लंबित पेंशन और जमीन विवाद से संबंधित थे। पेंशन एक ऐसा विषय है जो सीधे तौर पर समाज के सबसे कमजोर वर्ग, बुजुर्गों और विधवाओं के जीवनयापन से जुड़ा है। कई आवेदकों ने बताया कि तकनीकी कारणों या कागजी खानापूर्ति की वजह से उनकी पेंशन महीनों से रुकी हुई है। जिलाधिकारी ने सामाजिक सुरक्षा कोषांग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इन फाइलों का त्वरित मिलान कर भुगतान सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वृद्धावस्था और विधवा पेंशन जैसे संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जमीन विवाद: प्रशासनिक प्राथमिकता और राजस्व सुधार

​सुनवाई का दूसरा बड़ा केंद्र ‘जमीन विवाद’ रहा। बिहार में भूमि विवाद केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक समरसता की जड़ भी है। जिलाधिकारी के पास पहुँचे 20 आवेदनों में से कई मामले जमीन के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), पैतृक संपत्ति के बंटवारे और अतिक्रमण से जुड़े थे। डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने इन मामलों को सुनते हुए अपर समाहर्ता राजस्व और संबंधित अंचल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।

​जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि विवादों का समय पर निपटारा न होना ही अक्सर बड़े अपराधों की वजह बनता है। इसलिए, राजस्व विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि वे न केवल फाइलों का निपटारा करें, बल्कि मौका-मुआयना कर वास्तविक न्याय सुनिश्चित करें। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि ‘सबका सम्मान’ कार्यक्रम के तहत अब हर शनिवार को अंचलों और थानों में होने वाली बैठकों की निगरानी स्वयं जिला मुख्यालय से की जा रही है। जमीन से जुड़े विवादों में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन प्रणालियों को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो सके।

विकेंद्रीकृत सुनवाई: प्रखंड से थाने तक प्रशासनिक सक्रियता

​समाहरणालय में जिलाधिकारी की सुनवाई के समानांतर, पूरे भागलपुर जिले में प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर ‘सबका सम्मान- जीवन आसान’ के तहत जन-सुनवाई का आयोजन किया गया। उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता राजस्व, अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन और अपर समाहर्ता विधि व्यवस्था सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों से संबंधित जन-शिकायतों को सुना।

​यह सक्रियता केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रही। जिले के सभी प्रखंड कार्यालयों, अंचलों और थानों में संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), अंचल अधिकारी (CO) और थाना प्रभारियों ने भी आम जनों की समस्याओं पर सुनवाई की। प्रशासनिक तंत्र की यह व्यापक सक्रियता दर्शाती है कि ‘Ease of Living’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पदानुक्रम के हर स्तर पर जवाबदेही तय की जा रही है। जब ब्लॉक और अंचल स्तर पर ही समस्याओं का समाधान होने लगेगा, तो जिला मुख्यालय पर दबाव कम होगा और लोगों को अपने छोटे कामों के लिए मीलों दूर भागलपुर शहर नहीं आना पड़ेगा।

नागरिक सुविधाओं में बदलाव: दफ्तर का नया चेहरा

​अक्सर सरकारी दफ्तरों की छवि ऐसी रही है जहाँ फरियादी खुद को असहज महसूस करते हैं। ‘सबका सम्मान- जीवन आसान’ कार्यक्रम ने इस छवि को बदलने का काम किया है। सोमवार को समाहरणालय परिसर में आने वाले फरियादियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं देखी गईं। जिलाधिकारी के निर्देश पर सभी आगंतुकों के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था, शुद्ध पेयजल और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया।

​शिकायतों के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी सरल और पारदर्शी बनाया गया है। हर शिकायतकर्ता को आवेदन के साथ ही एक ‘प्राप्ति रसीद’ (Acknowledgment Receipt) दी जा रही है। यह रसीद केवल कागज़ का टुकड़ा नहीं है, बल्कि इस बात की गारंटी है कि नागरिक की आवाज आधिकारिक तौर पर दर्ज हो चुकी है और अब प्रशासन उस पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य है। कार्यालयों के समीप शौचालय और पेयजल की उपलब्धता जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाते हैं कि प्रशासन अब जनता को ‘प्रार्थी’ नहीं बल्कि ‘सम्मानित नागरिक’ मानकर सेवा प्रदान कर रहा है।

निष्कर्ष: प्रशासनिक जवाबदेही और सामाजिक बदलाव की आहट

​भागलपुर में जिलाधिकारी द्वारा की गई यह सुनवाई ‘7 निश्चय 3’ के उस व्यापक उद्देश्य का हिस्सा है जिसका लक्ष्य बिहार को एक विकसित और सुगम प्रदेश बनाना है। पेंशन की रुकावटों को दूर करना और जमीन विवादों को सुलझाना सीधे तौर पर आम आदमी की मानसिक शांति और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा है। डॉक्टर नवल किशोर चौधरी की यह पहल बताती है कि यदि प्रशासन संवेदनशील हो, तो जटिल से जटिल समस्याओं का मानवीय समाधान निकाला जा सकता है।

​संयुक्त निदेशक जनसंपर्क द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ऐसी सुनवाइयां नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी ताकि जिले का कोई भी नागरिक खुद को असहाय महसूस न करे। ‘सबका सम्मान- जीवन आसान’ के माध्यम से भागलपुर प्रशासन अब सीधे जनता के द्वार तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में इन आवेदनों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि ‘प्राप्ति रसीद’ केवल रस्म अदायगी न बनकर समाधान की कुंजी साबित हो। भागलपुर समाहरणालय से शुरू हुई यह सुधार की लहर अब पंचायतों तक पहुँचने के लिए तैयार है, जहाँ सुशासन का असली पैमाना तय होगा।

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