​भागलपुर के ‘भगवान पुस्तकालय’ के दिन बहुरेंगे: जिलाधिकारी ने खुद संभाली कमान, जीर्णोद्धार के लिए दिए कड़े निर्देश

भागलपुर। सिल्क सिटी के नाम से मशहूर भागलपुर की पहचान केवल इसके रेशमी धागों से नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध बौद्धिक विरासत और शिक्षा के प्रति इसके लगाव से भी रही है। शहर के नया बाजार इलाके में स्थित ‘भगवान पुस्तकालय’ दशकों से ज्ञान के एक ऐसे केंद्र के रूप में खड़ा है, जिसने न जाने कितनी पीढ़ियों का भविष्य संवारा है। हालांकि, वक्त की मार और रखरखाव के अभाव में इस ऐतिहासिक धरोहर की चमक कुछ धुंधली पड़ने लगी थी। लेकिन अब इस पुस्तकालय की सूरत बदलने वाली है। शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को भागलपुर के जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने नया बाजार पहुँचकर भगवान पुस्तकालय का औचक निरीक्षण किया। जिलाधिकारी का यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने पुस्तकालय की जर्जर हो चुकी दीवारों और व्यवस्थाओं को देखकर गहरी चिंता व्यक्त की। मौके पर ही उन्होंने भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को तलब किया और स्पष्ट निर्देश दिए कि पुस्तकालय के अस्तित्व को बचाने के लिए अविलंब एक विस्तृत प्राक्कलन (Estimate) तैयार किया जाए। जिलाधिकारी की इस सक्रियता ने शहर के बुद्धिजीवियों और छात्रों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है कि भागलपुर का यह ‘ज्ञान का मंदिर’ एक बार फिर अपने पुराने वैभव को प्राप्त कर सकेगा।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी की पैनी नजर

​शनिवार की दोपहर जब जिलाधिकारी का काफिला नया बाजार की तंग गलियों से होते हुए भगवान पुस्तकालय के द्वार पर पहुँचा, तो वहां मौजूद कर्मियों और अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने पुस्तकालय परिसर में प्रवेश करते ही एक-एक कोने का बारीकी से मुआयना किया। उन्होंने न केवल पुस्तकों के रख-रखाव को देखा, बल्कि भवन की छतों, दीवारों और फर्श की वर्तमान स्थिति का भी जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान यह बात स्पष्ट रूप से उभरकर आई कि भवन को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है।

​पुस्तकालय के भीतर मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों और पुरानी पुस्तकों को दीमकों और सीलन से बचाने के लिए जिलाधिकारी ने विशेष सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने महसूस किया कि अगर इस समय ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इस विरासत को सहेजना नामुमकिन हो जाएगा। जिलाधिकारी ने वहां मौजूद पाठकों और छात्रों से भी बात की और उनसे पुस्तकालय में मिलने वाली सुविधाओं और कमियों के बारे में फीडबैक लिया।

कार्यपालक अभियंता को निर्देश: मरम्मत नहीं, पुनरुद्धार की तैयारी

​निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी के साथ भवन प्रमंडल, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता भी मौजूद थे। भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने कार्यपालक अभियंता को कड़े लहजे में निर्देश दिया कि वे इस पूरे परिसर का तकनीकी निरीक्षण करें और आवश्यकतानुसार एक व्यापक प्राक्कलन तैयार करें। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि उन्हें केवल ऊपरी रंग-रोगन नहीं, बल्कि भवन की मजबूती और उसके ऐतिहासिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए पूर्ण मरम्मती चाहिए।

​उन्होंने कहा कि पुस्तकालय का माहौल ऐसा होना चाहिए जहाँ छात्र और शोधकर्ता घंटों बैठकर शांति से अध्ययन कर सकें। इसके लिए उन्होंने प्रकाश व्यवस्था (Lighting), बैठने के लिए आधुनिक फर्नीचर और वेंटिलेशन को बेहतर बनाने का सुझाव दिया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि प्राक्कलन तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि पुस्तकालय की मूल वास्तुकला से कोई समझौता न हो, बल्कि उसे आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ा जाए।

जिला योजना पदाधिकारी की भूमिका और टीम वर्क

​इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान जिला योजना पदाधिकारी मोनू कुमार भी जिलाधिकारी के साथ मौजूद थे। जिलाधिकारी ने मोनू कुमार को निर्देश दिया कि वे इस जीर्णोद्धार परियोजना के लिए फंड के आवंटन और योजना की प्रगति पर निरंतर नजर रखें। पुस्तकालय के अधिकारियों को भी यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि मरम्मत कार्य के दौरान पुस्तकों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुँचे।

​जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी शहर के विकास का पैमाना केवल उसकी सड़कें और पुल नहीं होते, बल्कि वहां के शिक्षण संस्थान और पुस्तकालय भी होते हैं। भगवान पुस्तकालय भागलपुर की एक सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर है और इसे बचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से एक समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा ताकि जीर्णोद्धार का काम जल्द से जल्द धरातल पर शुरू किया जा सके।

नया बाजार और भगवान पुस्तकालय का महत्व

​भगवान पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि यह नया बाजार और आसपास के क्षेत्रों के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए एक सहारा है। भागलपुर जैसे शहर में, जहाँ से हर साल बड़ी संख्या में युवा प्रशासनिक सेवाओं और अन्य सरकारी नौकरियों में जाते हैं, वहां ऐसे पुस्तकालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। नया बाजार एक व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र है, और इसके बीचों-बीच स्थित यह पुस्तकालय शांति और ज्ञान का एक टापू है।

​स्थानीय निवासियों का कहना है कि भगवान पुस्तकालय का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। यहाँ कई ऐसी दुर्लभ पुस्तकें मौजूद हैं जो शायद ही कहीं और मिलें। जिलाधिकारी के इस कदम से उन शोधार्थियों को भी लाभ होगा जो भागलपुर के इतिहास और संस्कृति पर काम कर रहे हैं। पुस्तकालय के नवीनीकरण से यहाँ डिजिटल लाइब्रेरी की संभावनाओं को भी बल मिलेगा, जिसकी मांग लंबे समय से छात्र कर रहे हैं।

शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर प्रशासन का जोर

​डॉक्टर नवल किशोर चौधरी जब से भागलपुर के जिलाधिकारी बने हैं, उन्होंने जिले के शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को सुधारने पर विशेष ध्यान दिया है। भगवान पुस्तकालय का निरीक्षण इसी कड़ी का एक हिस्सा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में ‘नीतीश मॉडल’ के साथ-साथ ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ को बढ़ावा दिया जाएगा। शहरों के विस्तारीकरण और नवीनीकरण की योजनाओं के बीच ऐतिहासिक पुस्तकालयों का कायाकल्प इसी विजन को दर्शाता है।

​जिलाधिकारी का मानना है कि यदि हम नई पीढ़ी को बेहतर शिक्षा और अध्ययन के साधन उपलब्ध कराएंगे, तो वे समाज के निर्माण में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग तभी है जब वे सीधे तौर पर जनता के कल्याण और शिक्षा से जुड़े हों। भगवान पुस्तकालय की मरम्मती के लिए तैयार होने वाला प्राक्कलन आने वाले दिनों में जिले के अन्य पुराने पुस्तकालयों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।

भविष्य की योजना: कैसा होगा नया ‘भगवान पुस्तकालय’?

​सूत्रों की मानें तो जिलाधिकारी की योजना इस पुस्तकालय को पूरी तरह से आधुनिक बनाने की है। मरम्मती के बाद यहाँ सीसीटीवी कैमरे, इंटरनेट कनेक्टिविटी और ई-लाइब्रेरी की सुविधा भी प्रदान की जा सकती है। इसके अलावा, पाठकों के लिए पीने के शुद्ध पानी और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था भी प्राक्कलन का हिस्सा होगी। जिलाधिकारी ने कार्यपालक अभियंता को निर्देशित किया है कि वे ऐसे डिजाइन पर काम करें जिससे पुस्तकालय में प्राकृतिक रोशनी का अधिक से अधिक उपयोग हो सके।

​निरीक्षण के बाद पुस्तकालय के अधिकारियों और वहां मौजूद पाठकों में काफी उत्साह देखा गया। लोगों का कहना है कि कई सालों बाद किसी जिलाधिकारी ने व्यक्तिगत रुचि लेकर इस धरोहर की सुध ली है। अब गेंद भवन प्रमंडल के पाले में है कि वे कितनी जल्दी इस प्राक्कलन को तैयार कर प्रशासन को सौंपते हैं। 18 अप्रैल 2026 की यह दोपहर भागलपुर की बौद्धिक यात्रा के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।

विरासत को सहेजने का साझा संकल्प

​भगवान पुस्तकालय का जीर्णोद्धार केवल ईंट और पत्थर की मरम्मत नहीं है, बल्कि यह भागलपुर की आत्मा को सहेजने का एक प्रयास है। जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने अपनी प्रशासनिक सूझबूझ से यह स्पष्ट कर दिया है कि वे विकास की रफ़्तार के साथ-साथ अपनी जड़ों को भी सींचने में विश्वास रखते हैं। अब शहर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कब से यहाँ काम शुरू होता है और कब छात्र एक नए और भव्य पुस्तकालय में बैठकर अपने सपनों को नई उड़ान देंगे। नया बाजार की यह संकरी गली अब जल्द ही ज्ञान के नए उजाले से रौशन होगी, और इसमें जिला प्रशासन का यह कदम मील का पत्थर साबित होगा।

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