बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर का भाजपा पर हमला, जीविका दीदियों को लेकर 24 घंटे का अल्टीमेटम

पटना: बांकीपुर उपचुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जन सुराज के सूत्रधार और बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने रविवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारतीय जनता पार्टी और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उपचुनाव में भाजपा की ओर से बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं को उतारने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था का भी कथित तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशांत किशोर ने विशेष रूप से जीविका दीदियों को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने के मुद्दे पर आपत्ति जताई और कहा कि यदि अगले 24 घंटे में इस पर रोक नहीं लगाई गई तो जन सुराज के कार्यकर्ता चुनाव आयोग के सामने धरना देंगे।

प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल का अपने समर्थकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्रचार के लिए बुलाना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने बांकीपुर उपचुनाव में बड़ी संख्या में नेताओं, कार्यकर्ताओं और अन्य प्रमुख चेहरों को प्रचार अभियान में लगाया है, लेकिन जन सुराज को इससे कोई परेशानी नहीं है। उनके मुताबिक, जनता खुद यह देख रही है कि एक उम्मीदवार को चुनौती देने के लिए किसी राजनीतिक दल को कितनी बड़ी ताकत और कितने संसाधन मैदान में उतारने पड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से भाजपा के नेता, विधायक, सांसद और मंत्री बांकीपुर में प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं, उसे जन सुराज अपने लिए एक तरह की राजनीतिक उपलब्धि मानता है। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि कई जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में सक्रिय नहीं थे, लेकिन बांकीपुर उपचुनाव के कारण वे जनता के बीच पहुंच रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सकारात्मक बात बताते हुए कहा कि इसका श्रेय बांकीपुर के उन मतदाताओं को जाता है, जो किसी राजनीतिक दल के स्थायी समर्थक बनकर नहीं रहना चाहते।

उनका कहना था कि लोकतंत्र में मतदाताओं के पास विकल्प होना जरूरी है। यदि मतदाता किसी नए विकल्प को देखना, समझना और परखना चाहते हैं तो उन्हें इसका पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर के लोग किसी राजनीतिक विचारधारा के बंधे हुए मतदाता नहीं हैं और वे अपने विवेक के आधार पर उम्मीदवारों का मूल्यांकन कर सकते हैं।

प्रशासन के कथित इस्तेमाल पर उठाए सवाल

प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जन सुराज से जुड़े कुछ लोग जो पटना के होटलों में ठहरे हुए हैं, वहां लगातार जांच और छापेमारी की जा रही है। उनका दावा है कि इनमें से कुछ लोग अपने निजी खर्च पर चुनावी गतिविधियों में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं।

उन्होंने चुनाव आयोग और भाजपा से सवाल करते हुए कहा कि यदि जन सुराज से जुड़े लोगों के ठहरने वाले होटलों की जांच की जा रही है तो भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं के ठहरने की जगहों की भी इसी तरह जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि बड़ी संख्या में बाहर से आए भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के रहने-खाने का खर्च कौन उठा रहा है, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव में सभी उम्मीदवारों और दलों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए। उनका आरोप था कि प्रशासन का इस्तेमाल किसी एक पक्ष पर दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहने वाली सरकारों पर अक्सर प्रशासनिक प्रभाव के इस्तेमाल के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है।

जीविका दीदियों को लेकर चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग

प्रशांत किशोर ने जीविका दीदियों की कथित चुनावी भूमिका को लेकर सबसे कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं के बीच जागरूकता अभियान के नाम पर जीविका से जुड़ी महिलाओं को घर-घर भेजकर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि वे भाजपा या एनडीए के पक्ष में मतदान नहीं करेंगी तो उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो सकता है। हालांकि, ये आरोप प्रशांत किशोर की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

उन्होंने पटना जिला प्रशासन की ओर से जारी एक कथित सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि चुनाव के दौरान जीविका से जुड़ी महिलाओं को आधिकारिक तौर पर इस तरह की गतिविधियों में शामिल करने का अधिकार किस नियम के तहत दिया गया है। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका निर्धारित होती है, लेकिन अर्धसरकारी या अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़े कर्मियों को राजनीतिक प्रचार से दूर रखा जाना चाहिए।

प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज के प्रतिनिधि इस मामले को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों से पहले ही मुलाकात कर चुके हैं और आगे भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग के सामने इस मामले को गंभीरता से रखा जाएगा और यदि कथित तौर पर जीविका दीदियों को चुनावी गतिविधियों से अलग नहीं किया गया तो जन सुराज आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।

उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया पोस्ट हटाने से मामला समाप्त नहीं होगा। प्रशासन को स्पष्ट आदेश जारी करना चाहिए कि जीविका से जुड़ी कोई भी महिला या अर्धसरकारी कर्मचारी चुनावी प्रचार अथवा किसी राजनीतिक दल के पक्ष में गतिविधि का हिस्सा नहीं बने। उन्होंने इसे लोकतंत्र और मतदाताओं की स्वतंत्रता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

24 घंटे का अल्टीमेटम, आयोग के सामने धरने की चेतावनी

प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज इस मुद्दे पर केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने या चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपने तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने चुनाव आयोग को 24 घंटे का समय देते हुए कहा कि यदि इस अवधि के भीतर जीविका दीदियों को चुनावी प्रक्रिया से कथित तौर पर हटाने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो जन सुराज के नेता और कार्यकर्ता आयोग के सामने धरना देंगे। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए सभी पक्षों को समान अवसर मिलना चाहिए और किसी भी सरकारी या अर्धसरकारी व्यवस्था का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

छात्र आंदोलन पर भी प्रशांत किशोर ने रखी अपनी बात

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशांत किशोर ने छात्रों से जुड़े आंदोलनों और देश में विपक्ष की भूमिका पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति या संगठन सरकार के कथित अलोकतांत्रिक व्यवहार और नीतियों को चुनौती देना चाहता है, जन सुराज उसका समर्थन करेगा।

उन्होंने सोनम वांगचुक का जिक्र करते हुए कहा कि वह उनके मित्र हैं और उनके आंदोलन के प्रति उनकी सहानुभूति रही है। प्रशांत किशोर ने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को केवल किसी एक नेता या संगठन के आंदोलन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, बेरोजगारी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में युवा परेशान हैं और वे अपने बेहतर भविष्य के लिए आवाज उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि छात्र हित से जुड़े किसी संगठन के लोग बिहार आते हैं और युवाओं से संबंधित मुद्दों पर काम करते हैं तो जन सुराज उनका स्वागत करेगा। उन्होंने कहा कि जनता जब किसी मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाती है तो बड़ी से बड़ी सत्ता को भी अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

प्रशांत किशोर ने हालिया राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्षी दल कमजोर हो सकते हैं, लेकिन विपक्ष की भावना समाप्त नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि देश में युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन की शुरुआत हुई है और यह आगे भी जारी रह सकता है।

बांकीपुर उपचुनाव के बीच प्रशांत किशोर के इन बयानों से बिहार की सियासत में चुनावी माहौल और गर्म होने की संभावना है। एक तरफ जन सुराज भाजपा के खिलाफ राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर चुनावी मैदान में दोनों पक्षों के बीच मुकाबला लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। अब इस पूरे मामले में चुनाव आयोग और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, विधानसभा प्रभारी रामबली चंद्रवंशी, पूर्व विधायक किशोर कुमार, सुभाष कुशवाहा, कुमार सौरव, कुमार शांतनु, राकेश पटेल, मसीउद्दीन और संजय ठाकुर समेत कई अन्य नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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