
बिहार के बांका जिले स्थित प्रसिद्ध राधा-कृष्ण मंदिर (जमदाहा ठाकुरबाड़ी) से पुलिस ने एक बांग्लादेशी दंपती को उनके दो बच्चों के साथ हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, दंपती के पास भारत में रहने के लिए वैध पासपोर्ट या वीजा नहीं था। पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे एक दलाल को 20 हजार रुपये देकर अवैध रास्ते से भारत में प्रवेश किए थे। पुलिस ने विदेशी अधिनियम सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दंपती को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
ठाकुरबाड़ी संचालक की सतर्कता से हुआ खुलासा
जमदाहा ठाकुरबाड़ी के संचालक विजय राय को मंदिर परिसर में रह रहे इस परिवार की गतिविधियों और बोली-भाषा पर संदेह हुआ। उन्होंने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। सूचना के आधार पर पुलिस मंदिर पहुंची और दंपती से पूछताछ की। जांच के दौरान दोनों भारत में वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
दंपती की पहचान
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान मिल्टन हल्दर के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश के बरिशाल जिले का निवासी बताया गया है। उसकी पत्नी झुमारानी दास ढाका के मुन्सिगंज जिले की रहने वाली बताई गई है।
भारत आने की बताई वजह
पूछताछ में दंपती ने कथित तौर पर बताया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय पर अत्याचार और परिवार के कुछ सदस्यों के लापता होने के बाद उन्होंने देश छोड़ने का निर्णय लिया। उनका दावा है कि लगभग ढाई महीने पहले उन्होंने एक एजेंट को 20 हजार रुपये देकर अवैध रूप से सीमा पार की।
पश्चिम बंगाल से वृंदावन और फिर बिहार पहुंचे
पुलिस के मुताबिक, भारत में प्रवेश के बाद परिवार पहले पश्चिम बंगाल गया। बाद में वे उत्तर प्रदेश के वृंदावन पहुंचे और कुछ समय वहां रहने के बाद बिहार के बांका जिले स्थित जमदाहा ठाकुरबाड़ी आकर रहने लगे।
मोबाइल और दस्तावेज जब्त
तलाशी के दौरान पुलिस ने उनके कमरे से एक मोबाइल फोन बरामद किया, जिसमें कोई सिम कार्ड नहीं था। इसके अलावा महिला के पास से बांग्लादेश के राष्ट्रीय पहचान पत्र की फोटोकॉपी तथा पुरुष के मोबाइल में बांग्लादेशी पासपोर्ट की तस्वीर मिलने की बात कही गई है। पुलिस ने इन सामग्रियों को जब्त कर जांच शुरू कर दी है।
दंपती जेल, बच्चे बाल संरक्षण गृह भेजे गए
पुलिस ने बिना वैध दस्तावेजों के भारत में अवैध प्रवेश और निवास के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। अदालत के आदेश पर दंपती को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, उनके दोनों बच्चों को कानूनी प्रक्रिया के तहत बाल संरक्षण गृह (रिमांड होम) भेजा गया है।
फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं तथा यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अवैध प्रवेश में और कौन-कौन लोग शामिल थे।


