
भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की कथित एनकाउंटर में हुई मौत के मामले में उनके परिवार ने पुलिस और वर्तमान जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने पुलिस द्वारा दी जा रही सुरक्षा लेने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले की जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं है।
‘रात 12 बजे आने की क्या मंशा थी?’
काशीनाथ तिवारी ने आरोप लगाया कि घटना के कई दिन बाद पुलिस अधिकारी देर रात गांव पहुंचे। उन्होंने कहा कि यदि बातचीत करनी थी तो दिन में भी आ सकते थे। उनके अनुसार, रात में अधिकारियों का पहुंचना कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब पुलिस उनके बेटे की सुरक्षा नहीं कर सकी, तो अब उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर भरोसा करना मुश्किल है।
जांच और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
मृतक के पिता ने पूरे मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि घटना के दौरान किस स्तर पर क्या निर्णय लिए गए।
एफआईआर से नाम हटाने पर लिखित आदेश की मांग
गांव के लोगों और परिजनों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को लेकर काशीनाथ तिवारी ने कहा कि यदि प्रशासन का दावा है कि उनके नाम हटा दिए गए हैं, तो इसकी लिखित प्रति परिवार को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। केवल मौखिक जानकारी पर्याप्त नहीं है।
भाई ने लगाए धमकी देने के आरोप
भरत तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिस अधिकारियों की ओर से दबाव और धमकी दी गई। उन्होंने दावा किया कि उनसे आंदोलन और विरोध बंद करने को कहा गया। हालांकि इन आरोपों की प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मां और भाभी ने भी जताई नाराजगी
मृतक की मां आशा देवी ने कहा कि उन्हें वर्तमान जांच प्रक्रिया से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है और वह अपने बेटे के लिए निष्पक्ष जांच चाहती हैं।
वहीं, भरत तिवारी की भाभी सुमन तिवारी ने भी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जांच जारी
गौरतलब है कि भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में न्यायिक जांच जारी है। इस मामले में विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। मामले से जुड़े आरोपों और दावों की पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।


