
अररिया। सीमावर्ती जिले अररिया में नशीले पदार्थों के काले कारोबार के खिलाफ पुलिस ने एक बार फिर अपनी ताकत का अहसास कराया है। जिले की ताराबाड़ी थाना पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर ‘सफेद मौत’ यानी स्मैक के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाहियों में से एक को अंजाम दिया है। पुलिस ने इस तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए एक किलो से अधिक शुद्ध स्मैक बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत सवा करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अररिया की सड़कें पश्चिम बंगाल और बिहार के बीच नशीले पदार्थों की तस्करी का एक ‘सिल्क रूट’ बनती जा रही हैं। गिरफ्तार तस्कर की पहचान मिराज अंसारी के रूप में हुई है, जो न केवल इस खेप का वाहक था, बल्कि जिले के भीतर सक्रिय वितरण तंत्र की एक महत्वपूर्ण कड़ी भी माना जा रहा है। पुलिस की इस सफलता ने सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय नशा माफियाओं के बीच हड़कंप मचा दिया है।
पटेगना धर्मकांटा के पास घेराबंदी: शुक्रवार की सुबह का ‘ऑपरेशन स्मैक’
ताराबाड़ी थाना पुलिस को पिछले कुछ दिनों से इस बात के इनपुट मिल रहे थे कि बंगाल की सीमा से नशीले पदार्थों की एक बड़ी खेप अररिया के रास्ते उत्तर बिहार के अन्य जिलों में भेजी जाने वाली है। इसी सूचना को पुख्ता करते हुए ताराबाड़ी थाना पुलिस ने शुक्रवार की सुबह बैरगाछी-कुर्साकांटा मार्ग पर अपनी पैनी नजर रखी। पुलिस टीम ने पटेगना धर्मकांटा के समीप अपना जाल बिछाया। जैसे ही एक संदिग्ध युवक वहां से गुजरा, पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया।
पुलिस को देखकर युवक ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उसे चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया। जब पकड़े गए युवक की तलाशी ली गई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। युवक के पास से भारी मात्रा में भूरे रंग का नशीला पदार्थ (स्मैक) बरामद हुआ। जब इसका वजन किया गया, तो यह एक किलो 28 ग्राम निकला। नशीले पदार्थों की इतनी बड़ी मात्रा अररिया जैसे जिले में मिलना इस बात का संकेत है कि यहाँ नशाखोरी की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं।
तस्कर का प्रोफाइल: बरदाहा का रहने वाला है मिराज अंसारी
गिरफ्तार तस्कर की पहचान अररिया जिले के ही बरदाहा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बरदाहा वार्ड संख्या 11 के निवासी मो. मिराज अंसारी के रूप में की गई है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि मिराज अंसारी स्थानीय स्तर पर छोटे अपराधियों के संपर्क में था और धीरे-धीरे वह अंतरराज्यीय तस्करी के गिरोह में शामिल हो गया। मिराज का मुख्य काम बंगाल से आने वाली खेप को रिसीव करना और उसे सुरक्षित ठिकानों तक पहुँचाना था। पुलिस अब मिराज के पुराने आपराधिक इतिहास और उसके बैंक खातों की भी पड़ताल कर रही है ताकि यह पता चल सके कि इस ‘काले धंधे’ से उसने अब तक कितनी संपत्ति अर्जित की है।
मालदा कनेक्शन: बंगाल के बड़े सप्लायर का खुलासा
गिरफ्तारी के बाद जब ताराबाड़ी पुलिस ने मिराज अंसारी से कड़ी पूछताछ की, तो उसने तस्करी के उस बड़े नेटवर्क का राज उगल दिया जो पश्चिम बंगाल के मालदा से संचालित हो रहा है। मिराज ने पुलिस को बताया कि यह स्मैक उसे पश्चिम बंगाल के मालदा के एक बड़े सप्लायर ने उपलब्ध कराई थी। डिलीवरी का स्थान कुर्साकांटा मोड़ के समीप तय किया गया था, जहाँ से मिराज ने यह माल रिसीव किया और इसे आगे पहुँचाने वाला था।
मालदा का नाम सामने आने के बाद अररिया पुलिस अब पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ भी संपर्क साधने की तैयारी में है। मालदा पिछले कुछ वर्षों से नकली नोटों और नशीले पदार्थों की तस्करी का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। तस्करों के अनुसार, मालदा से यह नशा बेहद कम कीमतों पर लाया जाता है और बिहार व नेपाल के सीमावर्ती बाजारों में इसे सवा करोड़ रुपये जैसी भारी-भरकम कीमतों पर बेचा जाता है। पुलिस अब उस सप्लायर का नाम और पहचान गुप्त रख रही है ताकि भविष्य में छापेमारी कर उसे दबोचा जा सके।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सवा करोड़ की कीमत: अररिया बना ‘ट्रांजिट पॉइंट’
पुलिस द्वारा जब्त की गई एक किलो 28 ग्राम स्मैक की शुद्धता काफी अधिक बताई जा रही है। नशीले पदार्थों के विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी मात्रा की कीमत 1.25 करोड़ रुपये से भी अधिक है। अररिया जिला अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण तस्करों के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता माना जाता है। एक तरफ नेपाल की खुली सीमा और दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की नजदीकी, तस्करों को सुरक्षित निकलने और माल खपाने के लिए पर्याप्त जगह देती है।
ताराबाड़ी पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि तस्कर अब मुख्य राजमार्गों के बजाय ग्रामीण और लिंक रोड (जैसे बैरगाछी-कुर्साकांटा मार्ग) का उपयोग कर रहे हैं ताकि पुलिस की चेकिंग से बचा जा सके। पटेगना धर्मकांटा जैसे व्यस्त लेकिन लिंक रूट पर हुई यह बरामदगी पुलिस की खुफिया तंत्र की बड़ी जीत मानी जा रही है।
नशा मुक्ति की ओर अररिया पुलिस का कड़ा संदेश
इस बड़ी बरामदगी के बाद अररिया पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय की ओर से भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि नशीले पदार्थों के खिलाफ यह अभियान थमेगा नहीं। ताराबाड़ी, बरदाहा और कुर्साकांटा जैसे संवेदनशील थानों को विशेष रूप से अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस अब उन स्थानीय ‘पैडलर्स’ की सूची तैयार कर रही है जो मिराज अंसारी जैसे बड़े तस्करों से माल लेकर छोटे-छोटे पुड़ियों में युवाओं तक नशा पहुँचाते हैं।
गिरफ्तार मिराज अंसारी के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य अब मिराज के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स (CDR) खंगालना है ताकि उन सभी लोगों के चेहरे बेनकाब हो सकें जो इस सिंडिकेट को पर्दे के पीछे से संरक्षण दे रहे हैं। अररिया के जागरूक नागरिकों ने भी पुलिस की इस मुस्तैदी की सराहना की है, क्योंकि स्मैक जैसी जानलेवा लत जिले की युवा पीढ़ी को खोखला कर रही है।
भविष्य की रणनीति: सीमावर्ती इलाकों में बढ़ेगी गश्त
इस घटना के बाद ताराबाड़ी थाना पुलिस ने क्षेत्र के सभी संदिग्ध ठिकानों और ढाबों पर नजर रखना शुरू कर दिया है। पुलिस को संदेह है कि मालदा से केवल मिराज ही नहीं, बल्कि कई अन्य ‘कूरियर’ भी इसी तरह की खेप लेकर अररिया में दाखिल हुए होंगे। आने वाले दिनों में बैरगाछी और कुर्साकांटा के आसपास के इलाकों में विशेष सर्च अभियान चलाया जा सकता है। पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दें ताकि नशा माफियाओं की कमर तोड़ी जा सके। फिलहाल, मिराज अंसारी सलाखों के पीछे है और पुलिस मालदा के उस ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुँचने की कड़ियाँ जोड़ रही है जिसने सवा करोड़ की यह खेप बिहार भेजी थी।


