मुजफ्फरपुर में अमृत सरोवर की जमीन बिकने का आरोप, पंचायत की सरकारी भूमि पर भू-माफिया का कब्जा

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड अंतर्गत राज विशुनपुर बघनगरी पंचायत से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। केंद्र सरकार की अमृत सरोवर योजना के तहत जिस पोखर पर निर्माण होना था, उसकी जमीन पहले ही कथित तौर पर बेच दी गई। आरोप है कि पंचायत की स्कूल, सड़क और अन्य सरकारी जमीनों पर भी अवैध कब्जा कर खरीद-फरोख्त की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं।

मुखिया का आरोप: सरकारी जमीनें बिक चुकीं

पंचायत की मुखिया बबीता कुमारी ने भू-माफियाओं पर सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कर उन्हें बेचने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार सकरा अंचलाधिकारी को लिखित शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण पंचायत के विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं।

भूमि पूजन से पहले ही जमीन गायब

राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित मुखिया बबीता कुमारी के अनुसार, पंचायत में विवाह भवन के निर्माण के लिए भूमि पूजन प्रस्तावित था। लेकिन भूमि पूजन से ठीक पहले पता चला कि जिस जमीन पर भवन बनना था, वह किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर बेच दी गई है। उनका दावा है कि पंचायत की करीब 10 से 12 एकड़ सरकारी जमीन कथित तौर पर बिक चुकी है।

मुखिया ने कहा,
“इस पंचायत में सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन कागजों में दर्ज है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकतर जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा है। पोखर, स्कूल और सड़क तक की जमीन नहीं बची है। बार-बार पत्राचार के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे विकास कार्य पूरी तरह रुक गया है।”

समाजसेवियों का भी आरोप

समाजसेवी बबलू कुमार ने कहा कि राज विशुनपुर बघनगरी को ‘मॉडल पंचायत’ का दर्जा मिला है, इसके बावजूद विकास कार्यों के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भू-माफियाओं ने पंचायत की महत्वपूर्ण जमीनों को बेच दिया है और अंचल प्रशासन ने अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।

डीएम ने दिए जांच के निर्देश

सरकारी जमीन की कथित खरीद-फरोख्त के मामले में अब प्रशासन हरकत में आया है। एसडीएम तुषार कुमार ने बताया कि सरकारी जमीन की बिक्री कानूनन संभव नहीं है और यदि आरोप सही पाए गए तो दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एसडीएम ने कहा,
“मामला संज्ञान में आया है। अंचलाधिकारी द्वारा जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया किसी प्रकार का दाखिल-खारिज या म्यूटेशन नहीं पाया गया है। स्थल निरीक्षण कराया जाएगा और प्रिवेंशन के लिए जमीन का सीमांकन भी कराया जाएगा।”

जांच के बाद कार्रवाई संभव

प्रशासनिक जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि पंचायत की सरकारी जमीनों की बिक्री किस तरह हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। फिलहाल पूरे मामले पर जिले की नजर बनी हुई है।


 

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