बिहार में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के ताजा आंकड़ों के अनुसार राजधानी पटना सहित राज्य के सात प्रमुख शहरों की हवा ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई है। इन शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 से 300 के बीच रिकॉर्ड किया गया है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से नुकसानदेह माना जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक शहरी इलाकों में चल रहे निर्माण कार्य, वाहनों से उड़ती धूल और सूखी सड़कों के कारण प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण मानक से काफी अधिक पाए गए हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचकर गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं।
आरा रहा सबसे प्रदूषित शहर
राज्य के शहरों में भोजपुर जिले का आरा सबसे ज्यादा प्रदूषित दर्ज किया गया, जहां AQI 266 रहा। बिहारशरीफ और राजगीर में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं, दोनों जगहों पर AQI 261 रिकॉर्ड किया गया। समस्तीपुर में यह आंकड़ा 258, हाजीपुर और बक्सर में 229-229 जबकि राजधानी पटना का औसत AQI 217 दर्ज किया गया।
पटना के कई इलाकों में स्थिति और भी गंभीर नजर आई। वेटनरी कॉलेज मैदान क्षेत्र में AQI 343 पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। सचिवालय इलाके में 253, तारामंडल में 254, दानापुर में 202 और गांधी मैदान में 163 AQI दर्ज किया गया। हालांकि पटना सिटी में AQI 90 रहा, जो अपेक्षाकृत संतोषजनक है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर, डॉक्टरों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बढ़ते प्रदूषण को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि जब AQI 300 के करीब पहुंचता है तो हवा बेहद नुकसानदेह हो जाती है। इससे आंखों में जलन, सिरदर्द, खांसी, सांस फूलना और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
बच्चे, बुजुर्ग, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोग तथा गर्भवती महिलाएं सबसे अधिक जोखिम में हैं। विशेषज्ञों ने ऐसे लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने और जरूरत पड़ने पर एन95 मास्क पहनने की सलाह दी है।
प्रदूषण नियंत्रण पर उठे सवाल
प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि नगर निगम की एंटी-स्मॉग जेट मशीनें सड़कों की बजाय एयर क्वालिटी मापने वाले स्टेशनों के आसपास ज्यादा पानी का छिड़काव कर रही हैं, जिससे आंकड़े बेहतर दिखें।
हालांकि बिहार स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन डॉ. डी.के. शुक्ला ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि मॉनिटरिंग स्टेशन के पास पानी छिड़कने से AQI रीडिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और आंकड़े पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया से लिए जाते हैं।
लोगों से सहयोग की अपील
वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन और विशेषज्ञों ने लोगों से सहयोग की अपील की है। नागरिकों से कहा गया है कि अनावश्यक वाहन न चलाएं, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय अपनाएं और अधिक से अधिक पेड़ लगाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से ही बिहार में बढ़ते वायु प्रदूषण पर काबू पाया जा सकता है।


