
पटना, 8 अप्रैल 2026: बिहार में पुलिस महकमे से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। किशनगंज के पूर्व एसडीपीओ गौतम कुमार पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में कार्रवाई तेज कर दी गई है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की छापेमारी और पूछताछ के बाद सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया है।
इस मामले के सामने आने के बाद अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए सीमांचल क्षेत्र में तैनात अन्य पुलिस अधिकारियों की भी जांच शुरू कर दी गई है।
ईओयू की छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा
आर्थिक अपराध इकाई ने 31 मार्च 2026 को गौतम कुमार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। किशनगंज, पूर्णिया और पटना समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई।
जांच में सामने आया कि उनकी संपत्ति उनकी वैध आय से कई गुना अधिक है। सूत्रों के अनुसार, लगभग 80 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति के संकेत मिले हैं।
छापेमारी के दौरान:
- कई जमीनों के दस्तावेज
- लग्जरी गाड़ियों के कागजात
- भारी मात्रा में नकदी और जेवरात
- नोएडा, सिलीगुड़ी और पटना से जुड़े निवेश के दस्तावेज
बरामद किए गए हैं।
परिजनों और करीबी लोगों के नाम पर निवेश
जांच एजेंसियों के अनुसार, गौतम कुमार ने अपनी पत्नी, सास, महिला मित्रों और अन्य करीबी लोगों के नाम पर संपत्तियां खरीदीं।
पूर्णिया में एक कथित महिला मित्र के घर छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में आभूषण और जमीन से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए संपत्ति को छिपाने की कोशिश की गई।
सीमांचल में लंबी पोस्टिंग पर उठे सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि गौतम कुमार ने अपने करियर का अधिकांश समय सीमांचल क्षेत्र—किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और अररिया—में ही बिताया।
1994 में दारोगा के रूप में नियुक्ति के बाद वे प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर और फिर डीएसपी बने, लेकिन उनकी पोस्टिंग का बड़ा हिस्सा एक ही क्षेत्र में केंद्रित रहा।
इस तथ्य के सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने इसे गंभीरता से लिया है।
15 से अधिक डीएसपी की कुंडली खंगाल रही सरकार
सूत्रों के मुताबिक, अब सीमांचल क्षेत्र में तैनात 15 से अधिक एसडीपीओ/डीएसपी स्तर के अधिकारियों की सेवा रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
इनसे पूछा जा रहा है:
- वे कब-कब सीमांचल में तैनात रहे
- दारोगा और इंस्पेक्टर रहते हुए कितने समय तक इसी क्षेत्र में पोस्टिंग रही
- क्या किसी प्रकार की अनियमितता या प्रभाव का इस्तेमाल किया गया
बताया जा रहा है कि एक अन्य अधिकारी भी जांच एजेंसियों के रडार पर है, जिसने लंबे समय तक इसी इलाके में सेवा दी है।
पूछताछ जारी, फिर बुलाया गया नोटिस पर
गौतम कुमार से आर्थिक अपराध इकाई ने पटना में करीब पांच घंटे तक पूछताछ की। हालांकि पूछताछ पूरी नहीं हो सकी है और उन्हें 10 अप्रैल को फिर से उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
जांच एजेंसियां अब उनके वित्तीय लेन-देन, संपत्ति के स्रोत और कथित नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं
सरकार और पुलिस मुख्यालय में मचा हड़कंप
इस पूरे मामले ने न सिर्फ पुलिस विभाग बल्कि सरकार को भी झकझोर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी संपत्ति अर्जित करने के बावजूद यह मामला लंबे समय तक सामने क्यों नहीं आया।
साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या इस पूरे नेटवर्क में अन्य अधिकारी या प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं।
आगे क्या?
- जांच का दायरा और बढ़ सकता है
- अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई संभव
- अवैध संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है
बड़ा सवाल
यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा था और क्या आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होंगे?
बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए यह एक बड़ा टेस्ट माना जा रहा है, जहां पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर पूरी व्यवस्था को परखा जाएगा।


