नियम मानने के बाद भी अवैध वसूली का आरोप; भागलपुर में साउंड व्यवसायियों ने खोली पोल, लगन से पहले रोजी-रोटी पर संकट

  • भागलपुर के बूढ़ानाथ क्षेत्र में आयोजित ‘जिला साउंड एसोसिएशन संघ’ की बैठक में पुलिसिया उत्पीड़न और अवैध वसूली के गंभीर मामले सामने आए हैं, जिससे शहर के व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
  • ​एसोसिएशन के सदस्यों का दावा है कि वे सर्वोच्च न्यायालय और जिला प्रशासन के 10 बजे के ‘नो साउंड’ नियम का पूर्णतः पालन करते हैं, इसके बावजूद पुलिसिया तंत्र द्वारा उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है।
  • ​आरोप है कि ‘सुविधा शुल्क’ न देने पर पुलिस महकमे के कुछ कर्मचारी साउंड सिस्टम जब्त करने और फर्जी कानूनी मुकदमे दर्ज करने की धमकी देते हैं, जिससे व्यापारियों का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है।
  • ​आगामी ‘लगन’ (शादी-विवाह) के सीजन को देखते हुए व्यापारियों को डर है कि अगर यह सिलसिला नहीं रुका, तो हजारों परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
  • ​संघ के सचिव अमित गुप्ता ने जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने और भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है।

भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार/अपना भागलपुर)।

जब ‘डीजे’ बंद हो जाए, तब पुलिस का ‘वसूली’ म्यूजिक शुरू: बूढ़ानाथ में फूटा गुस्सा

भागलपुर की गलियां इन दिनों एक अजीब तरह के ‘शोर’ से परेशान हैं, लेकिन यह शोर किसी डीजे या लाउडस्पीकर का नहीं, बल्कि उन व्यापारियों का है जो पुलिसिया तंत्र की कथित अवैध वसूली से त्रस्त हो चुके हैं। बुधवार को बूढ़ानाथ क्षेत्र में जिला साउंड एसोसिएशन संघ की एक आपात बैठक हुई, जहाँ शहर के साउंड व्यवसायियों ने अपनी पीड़ा साझा की। व्यापारियों का कहना है कि वे नियम के अनुसार काम करना चाहते हैं, लेकिन पुलिस का ‘भ्रष्ट आचरण’ उन्हें चैन से व्यवसाय नहीं करने दे रहा है। बैठक में यह बात प्रमुखता से उठी कि प्रशासन और व्यापार के बीच का तालमेल अब डर और वसूली की पटरी पर उतर गया है।

नियमों की पालना बनाम पुलिसिया हठधर्मिता

साउंड एसोसिएशन के सदस्यों ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि वे जिला प्रशासन के सभी सुरक्षा मानकों और समय सीमा का कड़ाई से पालन करते हैं। रात 10 बजे के बाद जैसे ही घड़ी की सुइयां टिक-टिक करती हैं, शहर के जिम्मेदार साउंड व्यवसायी अपने सिस्टम बंद कर देते हैं। लेकिन, आरोप है कि इसी समय के बाद पुलिस का ‘खेल’ शुरू होता है। पुलिस गश्ती दल द्वारा तरह-तरह के बहाने बनाए जाते हैं—कभी बेस (Base) ज्यादा होने का तर्क, तो कभी परमिशन की बारीकियों में उलझाकर पैसे की मांग की जाती है। जब व्यवसायी अपनी बेगुनाही का सबूत देते हैं, तो उन्हें सामान जब्त करने और थाने ले जाकर ‘गलत तरीके से केस’ दर्ज करने का भय दिखाया जाता है।

लगन का सीजन और रोजी-रोटी की फिक्र: सचिव अमित गुप्ता की चेतावनी

संघ के सचिव अमित गुप्ता ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भागलपुर का साउंड व्यवसाय हजारों परिवारों की आजीविका का एकमात्र साधन है। आने वाले कुछ ही दिनों में ‘लगन’ का बड़ा सीजन शुरू होने वाला है, जिसमें साउंड और लाइटिंग की भारी मांग रहती है। व्यवसायी साल भर इसी सीजन का इंतजार करते हैं ताकि अपना पिछला कर्ज उतार सकें और परिवार चला सकें। अमित गुप्ता ने आशंका जताई कि अगर पुलिस इसी तरह ‘हंटर’ चलाती रही, तो साउंड व्यवसायी अपने उपकरण निकालने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे। पैसा न देने पर महंगे साउंड सिस्टम को जब्त कर लेना किसी भी व्यापारी के लिए ‘मौत की सजा’ के समान है, क्योंकि ये उपकरण लाखों रुपये के बैंक लोन पर लिए जाते हैं।

जब्ती का डर और कानून की आड़ में ‘अंधेरगर्दी’

बैठक में उपस्थित अन्य साउंड मालिकों ने बताया कि कई बार पुलिस स्टेशन ले जाने के बाद उनके कीमती एम्पलीफायर और स्पीकर के साथ लापरवाही बरती जाती है। एक बार सामान जब्त होने के बाद उसे छुड़ाने की प्रक्रिया इतनी जटिल और ‘खर्चीली’ बना दी जाती है कि छोटा व्यापारी टूट जाता है। आरोप है कि पुलिस यह सब केवल अपना ‘हिस्सा’ वसूलने के लिए करती है। व्यापारियों ने पूछा कि अगर वे रात 10 बजे के बाद म्यूजिक बंद कर देते हैं, तो फिर कानून की किस धारा के तहत उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है?

प्रशासन से हस्तक्षेप की गुहार: क्या मिलेगी ‘साउंड’ को सुरक्षा?

जिला साउंड एसोसिएशन संघ ने भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) और जिलाधिकारी (DM) से मांग की है कि इस अवैध वसूली पर तत्काल प्रभाव से सख्त रोक लगाई जाए। संघ ने यह भी सुझाव दिया है कि अगर किसी व्यवसायी द्वारा वास्तव में नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उस पर कानूनी प्रक्रिया के तहत जुर्माना लगाया जाए, न कि व्यक्तिगत रूप से पैसे की उगाही की जाए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है ताकि सभी लोग नियमों के दायरे में रहकर अपना सम्मानजनक व्यवसाय कर सकें।

सुशासन के दावों के बीच ‘खाकी’ की साख पर सवाल

भागलपुर पुलिस जहाँ एक ओर आधुनिकीकरण और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए प्रशंसा बटोर रही है, वहीं बूढ़ानाथ की यह बैठक उसके दामन पर ‘अवैध वसूली’ के दाग की तरह है। यदि नियम का पालन करने वाले व्यापारियों को ही शिकार बनाया जाएगा, तो अपराध मुक्त समाज की कल्पना अधूरी रह जाएगी। अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है—उसे यह तय करना होगा कि लगन के इस सीजन में भागलपुर की सड़कों पर केवल खुशियों के गीत गूँजेंगे या फिर अवैध वसूली का यह शोर व्यापारियों के घरों का चूल्हा बुझा देगा।

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