
‘मालिक नहीं हैं’ का बहाना बनाकर 45 दिनों से टाली जा रही डिलीवरी, दावों और हकीकत के बीच फंसा भागलपुर का आम आदमी
- भागलपुर के नाथनगर स्थित साईं बाबा गैस एजेंसी पर बुधवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब डेढ़ महीने से सिलेंडर का इंतजार कर रहे दर्जनों उपभोक्ता अपने खाली सिलेंडर लेकर सड़क पर उतर आए और एजेंसी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
- उपभोक्ताओं का आरोप है कि जहाँ जिले की अन्य एजेंसियां 20 से 25 दिनों के भीतर रिफिल उपलब्ध करा रही हैं, वहीं इस विशेष एजेंसी में बुकिंग के 45 दिन बीत जाने के बाद भी उपभोक्ता चक्कर काटने को मजबूर हैं।
- एजेंसी कर्मियों द्वारा दिए जा रहे ‘मालिक मौजूद नहीं हैं’ जैसे गैर-जिम्मेदाराना जवाबों ने मुसाफिरों और गृहणियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है, जिससे एजेंसी परिसर में घंटों तक हंगामा और बहस की स्थिति बनी रही।
- जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग द्वारा जिले में गैस की प्रचुरता के दावों पर सवालिया निशान लग गया है, क्योंकि जमीनी स्तर पर एजेंसी की मनमानी और प्रबंधन की विफलता ने हजारों घरों का बजट और खाना दोनों बिगाड़ दिया है।
- उपभोक्ताओं ने अब सीधे जिला पदाधिकारी और आपूर्ति विभाग से इस एजेंसी के लाइसेंस की समीक्षा करने और तत्काल सिलेंडर मुहैया कराने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि गरीब तबके को कालाबाजारी का शिकार न होना पड़े।
भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।
हवा हवाई दावे और धरातल की कड़वी सच्चाई: नाथनगर में एलपीजी का ‘अकाल’
भागलपुर जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग पिछले कई दिनों से लगातार यह संदेश प्रसारित कर रहा है कि जिले में रसोई गैस (LPG) की कोई कमी नहीं है और वितरण व्यवस्था पूरी तरह सुचारु है। लेकिन बुधवार को नाथनगर से जो तस्वीरें और शिकायतें सामने आईं, उन्होंने इन आधिकारिक दावों की हवा निकाल दी है। नाथनगर स्थित साईं बाबा गैस एजेंसी के बाहर जमा हुई भीड़ केवल लोगों का समूह नहीं था, बल्कि उन परिवारों का गुस्सा था जिनकी रसोई पिछले कई दिनों से धुएं और अनिश्चितता के बीच फंसी हुई है। 45 दिनों का इंतजार किसी भी मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार के लिए एक मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना के समान है, विशेषकर तब जब पड़ोसी मोहल्ले की दूसरी एजेंसी में समय पर आपूर्ति हो रही हो।
प्रबंधन की विफलता या जानबूझकर की जा रही देरी?
नाथनगर के उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा आक्रोश एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर है। यहाँ सवाल केवल स्टॉक की कमी का नहीं है, बल्कि उस व्यवहार का है जो एजेंसी कर्मियों द्वारा उपभोक्ताओं के साथ किया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि जब भी वे अपनी बुकिंग की स्थिति जानने पहुँचते हैं, उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर देने के बजाय टालमटोल किया जाता है। उपभोक्ता मनोज कुमार उपाध्याय ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि एजेंसी के कर्मचारी बड़ी ही सहजता से कह देते हैं कि ‘मालिक नहीं हैं, इसलिए काम रुका है’। यह तर्क अपने आप में हास्यास्पद और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है। क्या एक आवश्यक वस्तु की आपूर्ति किसी व्यक्ति विशेष की उपस्थिति पर निर्भर होनी चाहिए? यह बहाना कहीं न कहीं एजेंसी के भीतर चल रही अव्यवस्था या बैकडोर से की जा रही कालाबाजारी की ओर इशारा करता है।
25 बनाम 45 दिन: वितरण में दोहरा मापदंड
भागलपुर जिले में गैस वितरण की स्थिति पर नजर डालें तो आईओसीएल (IOCL) के बैकलॉग की खबरें पहले भी आती रही हैं, लेकिन नाथनगर की इस एजेंसी ने देरी के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जहाँ शहर की अन्य प्रमुख एजेंसियां 25 दिनों के भीतर सिलेंडरों की होम डिलीवरी सुनिश्चित कर रही हैं, वहीं साईं बाबा गैस एजेंसी में 45 दिनों का समय लगना वितरण तंत्र में बड़े छेद को दर्शाता है। उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि बार-बार चक्कर काटने के बावजूद उन्हें ‘वेटिंग लिस्ट’ का हवाला दिया जाता है, जबकि एजेंसी के पिछले दरवाजे से ऊंची कीमतों पर सिलेंडर निकालने की शिकायतें भी दबी जुबान में सामने आ रही हैं।
गृहणियों का संकट: चूल्हा जलने की चिंता और बढ़ता खर्च
रसोई गैस की इस किल्लत का सबसे ज्यादा असर घर की महिलाओं पर पड़ रहा है। नाथनगर की कई गृहणियों ने बताया कि सिलेंडर खत्म होने के बाद वे इंडक्शन चूल्हे या कोयले के चूल्हे पर निर्भर हैं, जिससे बिजली का बिल और ईंधन का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। कई घरों में तो पड़ोसियों से सिलेंडर मांगकर या होटलों से खाना मंगाकर काम चलाया जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहाँ 48 घंटे में भुगतान और ऑनलाइन ट्रैकिंग की बातें होती हैं, वहां 45 दिनों तक एक गैस सिलेंडर के लिए सड़क पर उतरना शर्मनाक है।
प्रशासनिक दावों की पोल खोलती ‘जमीनी हकीकत’
हाल ही में जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुधीर कुमार ने प्रेस के माध्यम से आश्वस्त किया था कि जिले में आपूर्ति नियमित है और कहीं कोई संकट नहीं है। लेकिन नाथनगर की यह घटना साबित करती है कि कागजों पर दिखने वाली आपूर्ति और असलियत में उपभोक्ता के घर पहुँचने वाले सिलेंडर के बीच एक गहरी खाई है। प्रशासन ने 24/7 कंट्रोल रूम (0641-2402871) तो बना दिया है, लेकिन शायद इन कंट्रोल रूम्स तक पहुँचने वाली शिकायतों पर एजेंसियों के खिलाफ कड़े एक्शन का अभाव है। जब तक किसी लापरवाह एजेंसी का लाइसेंस निलंबित नहीं होगा या उन पर भारी जुर्माना नहीं लगेगा, तब तक ‘मालिक नहीं हैं’ जैसे बहाने उपभोक्ताओं को सुनाई देते रहेंगे।
एजेंसी के तर्क और उपभोक्ताओं की चेतावनी
साईं बाबा गैस एजेंसी के कर्मियों का कहना है कि उन्हें ऊपर से ही स्टॉक कम मिल रहा है, जिसकी वजह से बैकलॉग बढ़ा है। हालांकि, उपभोक्ता इस तर्क को मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर स्टॉक की कमी है तो यह कमी जिले की सभी एजेंसियों के लिए समान होनी चाहिए, केवल एक एजेंसी के लिए क्यों? बुधवार को हुए प्रदर्शन के दौरान उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों के भीतर लंबित बुकिंग्स का वितरण शुरू नहीं हुआ, तो वे मुख्य मार्ग को जाम करेंगे और जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे। उपभोक्ताओं ने माँग की है कि वितरण पंजी (Distribution Register) की जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि बुकिंग नंबर के अनुसार ही गैस दी जा रही है या इसमें कोई पक्षपात हो रहा है।
क्या है समाधान? विशेषज्ञों की राय
वितरण तंत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भागलपुर में एलपीजी की समस्या का मूल कारण ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ में पारदर्शिता की कमी है। एजेंसियों को अपनी रोजना की स्टॉक स्थिति और वितरण की गई बुकिंग संख्याओं का बोर्ड कार्यालय के बाहर लगाना चाहिए। इसके अलावा, प्रशासन को चाहिए कि वह रैंडम तरीके से एजेंसियों का निरीक्षण करे और देखे कि बैकलॉग वास्तव में तकनीकी कारणों से है या कृत्रिम किल्लत पैदा की जा रही है। नाथनगर की घटना यह संदेश देती है कि उपभोक्ताओं की सहनशीलता अब जवाब दे रही है।
जवाबदेही तय करने का समय
नाथनगर में उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा एक बड़ी चेतावनी है। यह केवल गैस सिलेंडर का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक विश्वास का है। जब सरकार और अधिकारी कहते हैं कि ‘सब कुछ ठीक है’ और जनता को बुनियादी जरूरत के लिए तरसना पड़े, तो व्यवस्था पर सवाल उठना अनिवार्य है। साईं बाबा गैस एजेंसी के प्रबंधन को अपनी चुप्पी तोड़नी होगी और प्रशासन को इन ‘मनमानी’ करने वाली एजेंसियों पर नकेल कसनी होगी। नाथनगर की जनता अब आश्वासनों से नहीं, बल्कि भरी हुई गैस की टंकियों से शांत होगी।


