
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। हालांकि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फोन पर गाली-गलौज, धमकी और मानसिक रूप से परेशान करने की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग डर या झिझक की वजह से ऐसे मामलों में चुप रह जाते हैं, जबकि कानून ऐसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई का अधिकार देता है।
अगर कोई व्यक्ति फोन पर आपको धमकी देता है, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता है या बार-बार कॉल कर परेशान करता है, तो इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
धमकी देना गंभीर अपराध
कानून के अनुसार किसी को जान से मारने या नुकसान पहुंचाने की धमकी देना गंभीर अपराध माना जाता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351 और 352 के तहत आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अलावा जानबूझकर अपमानित करना, गाली देना या शांति भंग करने की कोशिश करना भी दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
बार-बार कॉल करना भी अपराध
यदि कोई व्यक्ति लगातार कॉल, मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए किसी को परेशान करता है, तो इसे स्टॉकिंग यानी पीछा करना माना जा सकता है। ऐसे मामलों में भी कानून के तहत सख्त सजा का प्रावधान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार लोग मजाक या गुस्से में ऐसी हरकतें कर बैठते हैं, लेकिन कानूनी तौर पर यह गंभीर मामला बन सकता है।
सबूत सुरक्षित रखना बेहद जरूरी
ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण होता है सबूत सुरक्षित रखना। जांच के दौरान कॉल रिकॉर्डिंग, कॉल लॉग, स्क्रीनशॉट, व्हाट्सऐप चैट और मैसेज अहम भूमिका निभाते हैं।
इसलिए किसी नंबर को तुरंत ब्लॉक करने से पहले उससे जुड़े जरूरी सबूत सुरक्षित कर लेना चाहिए।
तुरंत करें शिकायत
अगर आपके साथ ऐसी घटना होती है तो घबराने के बजाय तुरंत नजदीकी थाने या साइबर सेल में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर महिला हेल्पलाइन और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल की भी मदद ली जा सकती है।
कानून पीड़ितों को सुरक्षा देने के लिए मौजूद है, इसलिए ऐसे मामलों में चुप रहने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाना सबसे सही कदम माना जाता है।


