भागलपुर में बनेगा नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, 96.89 एकड़ भूमि हस्तांतरित

गोराडीह के मोहनपुर में होगा औद्योगिक विकास, सरकार ने दी निशुल्क भूमि हस्तांतरण की मंजूरी

पटना, 5 अगस्त 2025: बिहार सरकार ने भागलपुर जिले में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से नवीन इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के निर्माण की मंजूरी दे दी है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि इसके लिए गोराडीह अंचल के मोहनपुर मौजा की 96.89 एकड़ सरकारी भूमि को उद्योग विभाग को निशुल्क स्थायी रूप से हस्तांतरित किया गया है।


कहाँ और कितनी भूमि हस्तांतरित की गई?

  • स्थान: गोराडीह अंचल, मौजा – मोहनपुर
  • थाना संख्या: 476
  • खाता संख्या: 64
  • खेसरा संख्या 58: 50.23 एकड़
  • खेसरा संख्या 62: 46.66 एकड़
  • कुल भूमि: 96.89 एकड़
  • प्राप्ति का आधार: राज्य सरकार द्वारा अधिशेष भूमि के रूप में अर्जित

उद्योग विभाग करेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का विकास

सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार की प्राथमिकता औद्योगिक आधारभूत संरचना को मजबूत करना है। इस भूमि पर उद्योग विभाग द्वारा नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जिससे:

  • स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा
  • निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनेगा
  • स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे

यह निर्णय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की औद्योगिक नीति के अनुरूप लिया गया है, जिसका उद्देश्य बिहार को आत्मनिर्भर और औद्योगिक दृष्टिकोण से समृद्ध राज्य बनाना है।


भागलपुर को मिलेगा औद्योगिक गति

भागलपुर, जो अब तक मुख्य रूप से कृषि और सिल्क उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है, अब इस कॉरिडोर के माध्यम से भविष्य में एक नया औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरेगा। इससे:

  • क्षेत्र में लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा
  • उद्यमिता को नया आधार मिलेगा
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी

सरकार की बड़ी पहल: औद्योगिक विकास के लिए भूमि नीति का असर

पिछले कुछ वर्षों में बिहार सरकार द्वारा लगातार विभिन्न जिलों में उद्योगों के लिए भूमि हस्तांतरण व अधिग्रहण किए जा रहे हैं। भागलपुर में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की यह पहल उसी क्रम की एक प्रमुख कड़ी है।


यह फैसला भागलपुर को औद्योगिक नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यदि इस कॉरिडोर का विकास योजना अनुसार होता है, तो यह पूर्वी बिहार के लिए एक औद्योगिक मील का पत्थर साबित हो सकता है।


 

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