बिहार में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों का नया सवेरा: धान अधिप्राप्ति में 99.84 प्रतिशत की ऐतिहासिक सफलता; किसानों को 48 घंटे में गेहूँ का भुगतान और एक लाख घरों तक पहुँची पीएनजी की ‘पाइपलाइन’ क्रांति

  • ​बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने अपनी वार्षिक उपलब्धियों का लेखा-जोखा साझा करते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था और जन-सुविधाओं में आए क्रांतिकारी बदलावों को रेखांकित किया है।
  • ​पटना के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संवाद कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में विभाग की मंत्री लेशी सिंह ने सचिव अभय कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में भविष्य की कार्ययोजना पेश की।
  • ​धान अधिप्राप्ति के लक्ष्य को लगभग शत-प्रतिशत प्राप्त कर बिहार ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है, वहीं गेहूँ और मसूर की अधिप्राप्ति के लिए एमएसपी में वृद्धि कर किसानों की आय बढ़ाने का ठोस प्रयास किया गया है।
  • ​प्रदेश के 8.55 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज और साढ़े 35 लाख से अधिक संदिग्ध राशन कार्डों को रद्द कर वितरण प्रणाली को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है।
  • ​रसोई गैस (LPG) की होम डिलीवरी और घरों तक पीएनजी (PNG) पाइपलाइन पहुँचाने की गति में तीन गुना वृद्धि कर विभाग ने ‘स्मार्ट किचन’ के सपने को धरातल पर उतारा है।

पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।

किसानों की समृद्धि: अधिप्राप्ति के मोर्चे पर बिहार की बड़ी छलांग

बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले किसानों के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने इस वर्ष खुशियों की नई सौगात दी है। खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि सरकार की नियत और नीति, दोनों ही किसानों के हक में रही हैं। धान अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तक निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 99.84 प्रतिशत की सफलता हासिल की गई है। 5,40,474 किसानों के पसीने की कीमत देते हुए 8807.47 करोड़ रुपये सीधे उनके खातों तक पहुँचाए गए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार ने पहले इसकी समय-सीमा फरवरी तक ही रखी थी, लेकिन राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों के बाद इसे मार्च के अंत तक बढ़ाया गया, जिससे हजारों छोटे किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर मिला।

​अब विभाग की नजर ‘रबी विपणन मौसम 2026-27’ पर है। गेहूँ की अधिप्राप्ति के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 160 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 2585 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। 1 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान में महज 6 दिनों के भीतर 591 किसानों से 2617 मीट्रिक टन गेहूँ खरीदा जा चुका है। सरकार ने यहाँ एक पारदर्शी व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत गेहूँ की खरीद के मात्र 48 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मसूर की अधिप्राप्ति 10 अप्रैल से शुरू होने वाली है, जिसका लक्ष्य 32,000 मीट्रिक टन रखा गया है और एमएसपी 7000 रुपये प्रति क्विंटल की आकर्षक दर पर तय है।

अंतिम पायदान तक आहार: मुफ्त राशन और वितरण प्रणाली का शुद्धिकरण

खाद्य सुरक्षा के मामले में बिहार एक विशाल लक्ष्य लेकर चल रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राज्य के 8.55 करोड़ लाभुकों को हर महीने अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है। अन्त्योदय परिवारों को मिलने वाले 35 किलो और पूर्विकताप्राप्त गृहस्थी (PHH) के प्रत्येक सदस्य को मिलने वाले 5 किलो अनाज के लिए अब किसी भी लाभुक को एक पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ता। यह वितरण पूरी तरह निःशुल्क है।

​सिस्टम की सफाई को लेकर भी विभाग इस बार कड़े रुख में दिखा। भारत सरकार द्वारा भेजे गए संदिग्ध डाटा की गहन जांच के बाद 35.36 लाख अपात्र राशन कार्डों को रद्द करने के लिए चिह्नित किया गया है। यह उन लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई है जो गलत तरीके से गरीबों का हक मार रहे थे। वहीं दूसरी ओर, पात्र लोगों के लिए नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से सुलभ बनाया गया है। बीते एक साल में प्राप्त 19.26 लाख आवेदनों में से 17.74 लाख का निष्पादन करना विभाग की कार्यक्षमता को दर्शाता है। जन वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानों में पारदर्शिता लाने के लिए करीब 4,948 रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के साथ-साथ सुगम वितरण सुनिश्चित होगा।

उपभोक्ता अधिकार: कोर्ट से लेकर विज्ञापन तक, हर तरफ जागरूकता

उपभोक्ता संरक्षण निदेशालय अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019’ के प्रावधानों को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। अब राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा शुरू की जा रही है, जिसका अर्थ है कि पीड़ित उपभोक्ता अब कहीं से भी अपने केस की सुनवाई में शामिल हो सकेंगे। वादों के त्वरित निष्पादन के लिए बेंच क्लर्क और आशुटंकक के दर्जनों नए पदों पर नियुक्ति के लिए बिहार कर्मचारी चयन आयोग को अधियाचना भेजी गई है। 31 जनवरी 2026 तक राज्य भर में 1.31 लाख से अधिक परिवाद पत्रों का निष्पादन कर उपभोक्ताओं को उनका हक दिलाया जा चुका है। रेडियो जिंगल, सोशल मीडिया और जिला स्तर पर होर्डिंग्स के माध्यम से ‘जागो ग्राहक जागो’ का संदेश जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है।

ऊर्जा और रसोई: एलपीजी की होम डिलीवरी और पीएनजी का विस्तार

रसोई गैस (LPG) को लेकर जिले और प्रखंड स्तर पर फैली अफवाहों को विराम देते हुए विभाग ने स्पष्ट किया है कि आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। बुकिंग के 3-4 दिनों के भीतर सिलेंडर घर पहुँच रहे हैं। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए अब ई-केवाईसी (eKYC) की प्रक्रिया को मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे पूरा करने की सुविधा दी गई है। कालाबाजारी रोकने के लिए अब तक 25,560 निरीक्षण किए गए हैं और 114 प्राथमिकी दर्ज कर अपराधियों को कड़ा संदेश दिया गया है। विभाग का कंट्रोल रूम (0612-2233050) सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक सक्रिय है, जो उपभोक्ताओं की हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान कर रहा है।

​सबसे बड़ी क्रांति पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के क्षेत्र में देखी जा रही है। “बिहार शहरी गैस वितरण नीति-2025” के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में बुनियादी ढांचा खड़ा किया जा रहा है। आज की तारीख में बिहार के 1 लाख से अधिक घरों में चूल्हे सीधे पाइपलाइन से जल रहे हैं। कनेक्शन देने की गति जो पहले 3000 प्रति माह थी, वह मार्च 2026 में बढ़कर 8000 प्रति माह हो चुकी है। 17 जिलों में गैस उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है और शेष 12 जिलों में काम अंतिम चरण में है। पीएनजी न केवल किफायती है, बल्कि सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त भी है, जो आधुनिक बिहार की नई पहचान बन रही है।

सुशासन और पारदर्शिता का संगम

लेशी सिंह के नेतृत्व में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने यह सिद्ध किया है कि तकनीक और कड़ी निगरानी के माध्यम से जनता की बुनियादी जरूरतों को सम्मानपूर्वक पूरा किया जा सकता है। चाहे वह धान बेचने वाला किसान हो, मुफ्त अनाज पाने वाला गरीब हो, या ऑनलाइन केवाईसी करने वाला शहर का उपभोक्ता—विभाग ने हर वर्ग के लिए समाधान पेश किए हैं। पटना से लेकर सुदूर गांवों तक फैली पीएनजी की पाइपलाइन और राशन कार्डों का शुद्धिकरण बिहार के बदलते स्वरूप की गवाही दे रहे हैं।

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