भागलपुर की सड़कों पर दौड़ेगी ‘ग्रीन क्रांति’! 50 इलेक्ट्रिक बसों के लिए तिलकामांझी में बनेगा हाई-टेक टर्मिनल; पवन कुमार शांडिल्य संभालेंगे ऑपरेशन की कमान

समाचार के मुख्य बिंदु: प्रदूषण मुक्त भविष्य की ओर सिल्क सिटी का बड़ा कदम

  • प्रशासनिक फेरबदल: बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को प्रभावी बनाने के लिए भागलपुर सहित पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है।
  • नई जिम्मेदारी: पवन कुमार शांडिल्य को यात्री प्रबंधक के पद से मुक्त कर अब सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (संचालन), भागलपुर की महत्वपूर्ण कमान सौंपी गई है।
  • विशाल लक्ष्य: शहर के सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के लिए कुल 50 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की योजना पर मुहर लग चुकी है और इस पर काम तेज कर दिया गया है।
  • आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: तिलकामांझी स्थित परिवहन निगम परिसर की 9.66 एकड़ भूमि में से 5.6 एकड़ हिस्से को अत्याधुनिक टर्मिनल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • सुविधाओं का जखीरा: नए टर्मिनल में जी+1 (दो मंजिला) प्रशासनिक भवन, एक उन्नत कार्यशाला और 10 ई-चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए जाएंगे।
  • हाइब्रिड मॉडल: प्रारंभिक योजना के अनुसार यहाँ 25 इलेक्ट्रिक बसों का आधार रहेगा, जबकि संशोधित ड्राफ्ट में 10 अतिरिक्त सीएनजी और डीजल बसों की सुविधा भी जोड़ी गई है।
  • VOB इनसाइट: भागलपुर जैसे ऐतिहासिक और घनी आबादी वाले शहर के लिए इलेक्ट्रिक बसें केवल सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत हैं। विक्रमशिला सेतु और कचहरी चौक जैसे इलाकों में लगने वाले जाम और वहां बढ़ते प्रदूषण के स्तर को कम करने में यह ‘साइलेंट ट्रांसपोर्ट’ गेम-चेंजर साबित होगा। परिवहन निगम का यह कदम न केवल यात्रियों को सुलभ यात्रा देगा, बल्कि शहर की ‘स्मार्ट सिटी’ रैंकिंग को भी ग्लोबल मानकों के करीब ले जाएगा।

भागलपुर | 29 मार्च, 2026

​बिहार की सिल्क सिटी अब डीजल के धुएं और इंजन के शोर से मुक्ति पाने की दहलीज पर खड़ी है। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने राज्य के शहरी परिवहन को ‘इलेक्ट्रिक युग’ में ले जाने के लिए अपनी कमर कस ली है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, भागलपुर में इलेक्ट्रिक बसों के सुचारू और तकनीकी रूप से सक्षम संचालन के लिए न केवल जमीन पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है, बल्कि प्रशासनिक मोर्चे पर भी बड़ी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की गई है। अधिकारियों के तबादलों और नई नियुक्तियों के जरिए निगम यह संदेश देना चाहता है कि अब ढुलमुल रवैये की जगह ‘रफ्तार और शुद्धता’ को प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रशासनिक सर्जरी: ऑपरेशनल दक्षता पर निगम का दांव

​इलेक्ट्रिक बसों का संचालन सामान्य डीजल बसों की तुलना में तकनीकी रूप से कहीं अधिक जटिल होता है। इसमें चार्जिंग स्टेशन का प्रबंधन, बैटरी लाइफ की निगरानी और रूट ऑप्टिमाइजेशन जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, निगम ने राज्य स्तर पर पदाधिकारियों का व्यापक पदस्थापन किया है।

​भागलपुर के संदर्भ में, परिवहन निगम ने पवन कुमार शांडिल्य पर भरोसा जताया है। उन्हें यात्री प्रबंधक की पारंपरिक भूमिका से हटाकर अब सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (संचालन) के पद पर तैनात किया गया है। शांडिल्य की प्राथमिक जिम्मेदारी 50 इलेक्ट्रिक बसों के उस महा-बेड़े को सड़कों पर उतारना और उनके रखरखाव के लिए जरूरी तंत्र को सक्रिय करना होगा। यह बदलाव दर्शाता है कि निगम अब ‘मैनेजमेंट’ से ज्यादा ‘एक्जीक्यूशन’ (कार्यान्वयन) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

तिलकामांझी का कायाकल्प: 5.6 एकड़ में सजेगा ‘फ्यूचरिस्टिक’ टर्मिनल

​भागलपुर का तिलकामांझी इलाका हमेशा से परिवहन की धुरी रहा है। अब यहाँ स्थित परिवहन निगम परिसर को पूरी तरह से बदला जा रहा है। निगम के पास यहाँ कुल 9.66 एकड़ की विशाल भूमि उपलब्ध है, जिसके एक बड़े हिस्से यानी 5.6 एकड़ भूमि को विशेष रूप से इस नई योजना के लिए आवंटित किया गया है।

टर्मिनल की तकनीकी विशेषताएं:

  1. प्रशासनिक भवन (G+1): यहाँ एक दो मंजिला भवन बनेगा जहाँ से बसों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और प्रशासनिक कार्यों को अंजाम दिया जाएगा।
  2. आधुनिक कार्यशाला: इलेक्ट्रिक बसों की सर्विसिंग के लिए विशेष वर्कशॉप तैयार की जा रही है, जो सामान्य गैरेज से काफी अलग और हाई-टेक होगी।
  3. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यहाँ स्थापित होने वाले 10 ई-चार्जिंग पॉइंट हैं। ये चार्जिंग पॉइंट ‘फास्ट चार्जिंग’ तकनीक से लैस होंगे ताकि बसों को कम समय में चार्ज कर लंबी दूरी के रूट्स पर भेजा जा सके।

50 बसों का बेड़ा: प्रदूषण के खिलाफ भागलपुर की ‘एयर स्ट्राइक’

​नगर निगम और परिवहन विभाग ने मिलकर भागलपुर शहर के लिए 50 इलेक्ट्रिक बसों का खाका तैयार किया है। यह संख्या किसी भी टायर-2 शहर के लिए काफी प्रभावशाली मानी जा रही है।

​प्रारंभिक चरण में, तिलकामांझी परिसर से 25 इलेक्ट्रिक बसों का पूर्ण संचालन करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, शहर की विविध जरूरतों को देखते हुए निगम ने अपनी योजना को थोड़ा लचीला (Flexible) रखा है। संशोधित योजना के अनुसार, इलेक्ट्रिक बसों के साथ-साथ 10 अतिरिक्त सीएनजी और डीजल बसों की सुविधा भी यहाँ जोड़ी गई है। यह ‘हाइब्रिड मिक्स’ यह सुनिश्चित करेगा कि यदि किसी तकनीकी कारण से इलेक्ट्रिक ग्रिड में समस्या आती है, तो भी शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था ठप न हो।

राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण: एक व्यापक दृष्टिकोण

​जैसा कि हाल ही में राज्यपाल अता हसनैन ने भी संकेत दिया था कि सड़कों का अपना एक संपूर्ण इकोसिस्टम होना चाहिए, परिवहन निगम की यह पहल उसी दिशा में एक कदम है। इलेक्ट्रिक बसों के आने से भागलपुर की आबोहवा में कार्बन उत्सर्जन का स्तर काफी कम हो जाएगा।

इसके प्रत्यक्ष लाभों पर एक नज़र:

  • शांत सफर: इलेक्ट्रिक बसें आवाज नहीं करतीं, जिससे शहर में ‘ध्वनि प्रदूषण’ (Noise Pollution) कम होगा।
  • किफायती यात्रा: डीजल की बढ़ती कीमतों के मुकाबले बिजली से चलने वाली बसें लंबे समय में काफी किफायती साबित होंगी, जिसका सीधा लाभ यात्रियों को कम किराए के रूप में मिल सकता है।
  • स्मार्ट कनेक्टिविटी: इन बसों को जीपीएस और पैनिक बटन जैसी सुरक्षा सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जिससे महिलाओं और छात्रों का सफर सुरक्षित होगा।

VOB का नजरिया: क्या भागलपुर तैयार है?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि बुनियादी ढांचे का निर्माण केवल आधी लड़ाई है।

  1. बिजली की निर्बाध आपूर्ति: 10 चार्जिंग पॉइंट्स को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी। क्या बिजली विभाग ने तिलकामांझी टर्मिनल के लिए अलग ग्रिड या विशेष फीडर की व्यवस्था की है?
  2. सड़कों की चौड़ाई: भागलपुर की कई सड़कें बेहद तंग हैं। 50 बसों का बड़ा बेड़ा सड़कों पर उतरने के बाद जाम की समस्या पैदा न करे, इसके लिए रूट प्लानिंग बेहद सटीक होनी चाहिए।
  3. कुशल मैनपावर: इलेक्ट्रिक बसों को चलाने और उनके रखरखाव के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित ड्राइवरों और मैकेनिकों की जरूरत होगी। पवन कुमार शांडिल्य के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी कि वे अपनी टीम को इस नई तकनीक के लिए कैसे तैयार करते हैं।

निष्कर्ष: सुशासन और नीली क्रांति का संगम

​भागलपुर में इलेक्ट्रिक बसों का आगमन केवल एक परिवहन योजना नहीं, बल्कि शहर की जीवनशैली बदलने का एक जरिया है। तिलकामांझी में बनने वाला यह आधुनिक टर्मिनल बिहार के अन्य जिलों के लिए भी एक ‘मॉडल’ साबित होगा। जैसे-जैसे निर्माण कार्य आगे बढ़ेगा, भागलपुर के लोगों की उम्मीदें भी परवान चढ़ेंगी।

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) तिलकामांझी टर्मिनल के निर्माण की प्रगति, पवन कुमार शांडिल्य द्वारा जारी किए जाने वाले नए बस रूट्स और इन इलेक्ट्रिक बसों के पहले ट्रायल रन की हर ताज़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।

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