
पश्चिम चंपारण: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से सामने आए एक वायरल वीडियो ने बाढ़ प्रभावित इलाकों की बदहाल स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में एक पिता अपने छोटे बेटे को कंधे पर बैठाकर तेज बहाव वाली नदी पार करता दिखाई दे रहा है। दावा किया जा रहा है कि वह अपने बेटे को स्कूल पहुंचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहा है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
स्कूल पहुंचाने के लिए पिता ने उठाया बड़ा जोखिम
वीडियो में दिख रहा है कि नदी का बहाव काफी तेज है, लेकिन इसके बावजूद पिता अपने बेटे को कंधे पर बैठाकर सावधानी से नदी पार कर रहा है। यह दृश्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की मजबूरी और बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर करता है।
नेपाल में भारी बारिश का असर, बिहार की नदियां उफान पर
नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब बिहार के सीमावर्ती जिलों में साफ दिखाई दे रहा है। गंडक, मसान समेत कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। 14 जुलाई की रात वाल्मीकिनगर गंडक बराज से करीब 2.21 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद कई निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।
कई पंचायतों में घुसा बाढ़ का पानी
बढ़ते जलस्तर के कारण बगहा अनुमंडल के पिपरासी और मधुबनी प्रखंड की सिसई और चिउरही पंचायत सहित कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है। कई घर जलमग्न हो चुके हैं और लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। जिला प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे नहीं जाने और सतर्क रहने की अपील की है।
प्रशासन ने राहत कार्य शुरू होने का किया दावा
मधुबनी प्रखंड के अंचलाधिकारी नंदलाल राम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की टीमें भेजी गई हैं और पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
हर साल दोहराती है यही त्रासदी
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामनगर प्रखंड के दोन क्षेत्र के दर्जनों गांव हर वर्ष बरसात के मौसम में लगभग 22 नदियों से घिर जाते हैं। सड़क, पुल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट जाता है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।
वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल
भले ही वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह दृश्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों की कठिन जिंदगी की झलक जरूर दिखाता है। हर साल बाढ़ आने के बावजूद यदि लोगों को स्कूल और अस्पताल जाने के लिए उफनती नदियां पार करनी पड़ें, तो यह बुनियादी सुविधाओं और आपदा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


